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बंगाल के गर्वनर ने 'बेगुनाही वाला' CCTV जारी किया, महिला की पहचान दिखाने पर बवाल हो गया

Bengal Governor CV Bose Molestation allegations: 9 मई को Raj Bhawan ने 'सच के सामने' कार्यक्रम के तहत 100 लोगों को कथित CCTV फुटेज दिखाया. फुटेज में राजभवन के उत्तरी गेट के सामने दो कैमरों की रिकॉर्डिंग शामिल है.

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10 मई 2024 (अपडेटेड: 16 मई 2024, 08:23 AM IST)
bengal governor cv bose shows cctv sexual harassment case victim identity revealed
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल CV आनंद बोस पर यौन उत्पीड़न के आरोप (फाइल फोटो- आजतक)
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पश्चिम बंगाल के गर्वनर CV आनंद बोस (Bengal Governor CV Bose) पर राजभवन की पूर्व कर्मचारी के साथ यौन उत्पीड़न के आरोप हैं. आरोपों के जवाब में 9 मई को गर्वनर ने घटना वाले दिन का कथित CCTV फुटेज जारी किया. अब महिला ने आरोप लगाया है कि फुटेज में उनकी पहचान उजागर कर दी गई है जो कि अपराध है.

8 मई को CV आनंद बोस ने कहा था कि वो जनता को घटना से जुड़ा CCTV फुटेज दिखाएंगे. उन्होंने ये भी साफ किया कि फुटेज मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) या उनकी पुलिस को नहीं दिखाया जाएगा. इसी कड़ी में 9 मई को राजभवन ने 'सच के सामने' कार्यक्रम के तहत 100 लोगों को कथित CCTV फुटेज दिखाया.

CCTV में क्या दिखा?

इंडियन एक्सप्रेस ने आधिकारिक सूत्रों के हवाले से बताया कि फुटेज में राजभवन के उत्तरी गेट के सामने दो कैमरों की रिकॉर्डिंग शामिल है.

मामले को लेकर बंगाल की वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने 10 मई को कहा कि फुटेज में जो दिखा वो उन्हें पहले से ही पता था. बोलीं कि सीसीटीवी में महिला राजभवन में और फिर ऑफिस इन-चार्ज के कमरे में जाती दिख रही है जो कि वो पहले ही बता चुकी हैं, ये फुटेज महिला के बयान की ही पुष्टि करता है.

महिला का क्या कहना?

रिपोर्ट के मुताबिक, महिला ने कहा,

फुटेज मेरी अनुमति के बिना जारी किया गया. कानून कहता है कि शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जानी चाहिए. लेकिन गर्वनर ने मेरी पहचान उजागर कर दी. अगर वो निर्दोष है तो पुलिस को जांच क्यों नहीं करने दे रहे हैं? उन्होंने इस CCTV फुटेज से क्या साबित किया है? मैं जानती हूं कि वो जिस तरह के पद पर हैं उन्हें कभी सजा नहीं मिलेगी.

ये भी पढ़ें- पश्चिम बंगाल के राज्यपाल पर लगा यौन उत्पीड़न का आरोप, शिकायत में क्या-क्या लिखा है?

रिपोर्ट के मुताबिक, राजभवन के एक सूत्र ने कहा है कि पहले महिला कह रही थी कि अगर आपकी कोई गलती नहीं है तो फुटेज जारी करें, अब जब हमने फुटेज जारी कर दी है तो वो नया मुद्दा उठा रही हैं. आरोप निराधार हैं.

राजभवन में कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर चुकी महिला ने अपनी शिकायत में कहा,

"गवर्नर सर ने मुझे कुछ समय निकालकर अपने CV के साथ मिलने के लिए बुलाया. 24 अप्रैल को दोपहर 12.45 बजे के करीब उन्होंने मुझे अपने ऑफ़िस के रूम में बुलाया. फिर उन्होंने कुछ देर बातचीत के बाद मुझे छुआ. मैं किसी तरह वहां से निकलने में कामयाब रही. 2 मई को उन्होंने मुझे फिर फोन किया. मैं अपने सुपरवाइजर को अपने साथ कॉन्फ़्रेंस रूम लेकर गई, क्योंकि मैं डरी हुई थी. कुछ देर काम के बारे में बात करने के बाद उन्होंने सुपरवाइजर को जाने के लिए कहा. उन्होंने मेरे प्रमोशन की बात कही और बातचीत को लंबा खींचा. उन्होंने मुझे रात में फोन करने की बात भी कही. साथ ही ये बात किसी को न बताने के लिए कहा. जब मैंने मना किया तो उन्होंने मुझे छूने की कोशिश की. फिर मैं कैसे भी बचते-बचाते वहां से निकल गई."

राज्यपाल आनंद बोस ने आरोपों को निराधार बताया. संवैधानिक छूट के चलते पुलिस, राज्यपाल को आरोपी के रूप में नामित नहीं कर सकती ना ही मामले की जांच कर सकती है. 

वीडियो: बंगाल में बीड़ी बनाने वाले ममता बनर्जी से क्यों गुस्सा हैं?

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