BCCI ने किया भज्जी, वेंगसरकर, चेतन चौहान को टाइट
क्रिकेट में बड़ी कुर्सी पर बैठने वाले अब आएंगे कंट्रोल में. BCCI में चली लोकपाल की झाड़ू.
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फोटो - thelallantop
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भारत में क्रिकेट के हेड ऑफिस यानी BCCI ने अपना लोकपाल रक्खा हुआ है. लोकपाल वही केजरीवाल वाला. आंतरिक लोकपाल, जो BCCI के अन्दर चलने वाले हर काम पर अपनी नज़र जमाये रहता है. अरे, क्लास का मॉनिटर समझ लो. जो इत्ता सा भी बोलने पर बोर्ड पर आपका नाम लिख देता था और टीचर के आने पर आपको उल्टी हथेली पर लकड़ी की पटरी से पांच बार पड़ती थी.
तो इसी लोकपाल ने एक नया बखेड़ा खड़ा किया है. कहने वाले इसे तुगलकी फ़रमान कह रहे हैं. इस लोकपाल ने BCCI के पे-रोल पे रहने वाले हर एम्प्लॉयी के conflict of interest पर ऊँगली उठाई है. Conflict of interest यानी कि आप किसी कंपनी में अपने पोस्ट और पोज़ीशन का फायदा उठाते हुए ऐसा डिसीज़न लें जिससे आपको पर्सनल प्रॉफिट हो.

हाल ही में Conflict of interest का मुद्दा इंडियन क्रिकेट में अच्छा-खासा गरमाया हुआ है. इसकी शुरुआत IPL में धोनी की रिती स्पोर्ट्स में 15% के मालिकाना हक़ से हुई थी. रिती स्पोर्ट्स जो कागजों पर चेन्नई सुपर किंग्स की मार्केटिंग को सम्हालती थी मगर कहा जाता था कि चेन्नई सुपर किंग्स और रिती स्पोर्ट्स एक ही सिक्के के दो साइड हैं. इसके अलावा रिती स्पोर्ट्स, सुरेश रैना और रवीन्द्र जडेजा को भी मैनेज करती थी. किताबों के हिसाब से सिचुएशन ऐसी हो गयी थी कि धोनी इंडियन टीम के कैप्टन थे जो सेलेक्शन में भी अहम रोल प्ले करते थे, और उनकी ही कंपनी के दो नाम (रैना और जडेजा) सेलेक्शन के लिए मौजूद रहते थे. ऐसे में घोर conflict of interest की स्थिति बन जाती है. रैना ने जुलाई 2015 में रिती स्पोर्ट्स से अपना कॉन्ट्रैक्ट खतम कर लिया था.

MSD was captain of India and held 15% stake in Rhiti Sports that managed Raina & Jadeja
फिलहाल, ये conflict of interest का बवाल फिर से उठ खड़ा हुआ है. BCCI के लोकपाल ए. पी. शाह के मुताबिक BCCI के अंडर आने वाले सभी खिलाड़ियों, सेलेक्टर्स, और ऐसे लोग जिनको डिसीज़न लेने का हक़ है, उन्हें अपने सभी कॉन्ट्रैक्ट्स और किसी भी ऐसी कंपनी जिसका क्रिकेट से कोई भी लेना देना हो, उस कनेक्शन को साफ़-साफ़ दिखाना होगा. अगर किसी भी कनेक्शन में लोकपाल के हिसाब से conflict of interest की स्थिति पैदा होगी, तो उस इंसान के पास दो ऑप्शन होंगे - या तो कनेक्शन खतम करो या BCCI से बाहर जाओ.
BCCI में इस बार इस फ़ितूर की शुरुआत हुई नीरज गुंडे की कम्प्लेंट से. उन्होनें बताया कि हरभजन सिंह की कंपनी भज्जी स्पोर्ट्स लगभग 6 रणजी टीमों को क्रिकेट किट पहुंचाती है. ऐसे में conflict of interest का तगड़ा केस बनता है. हरभजन सिंह ने कहा कि भज्जी स्पोर्ट्स कंपनी के न ही वो मालिक हैं न ही उसपर कैसा भी मालिकाना हक़ है. उनके मुताबिक उस कम्पनी की मालकिन उनकी मां अवतार कौर हैं.

Source: Bhajji Sports on twitter
ए पी शाह ने कहा कि भज्जी स्पोर्ट्स, हरभजन के अभी के कॉन्ट्रैक्ट शुरू होने के पहले और अभी के conflict of interest के नियम बनने से पहले बनाई गयी थी. इसलिए हरभजन को ये डिक्लेयर करना होना कि आगे से वो ऐसी किसी भी तरह से भज्जी स्पोर्ट्स से नहीं जुड़ेंगे जिससे conflict of interest की सिचुएशन पैदा हो.
कुछ ऐसी चीज़ें हैं जिनपर बहुत ही साफ़-सफाई से सीधे शब्दों में बताया गया है कि वो conflict of interest की लिस्ट में आराम से आ सकते हैं. वो हैं - क्रिकेट का कैसा भी सामान बनाने वाली कम्पनियां, क्रिकेट कोचिंग या अकैडमी, या फिर कोई भी ऐसी कंपनी जो स्पोर्ट्स इवेंट्स या खिलाडियों को मैनेज करती है. अगर देखें तो हर खिलाड़ी लपेटे में आएगा. सहवाग क्रिकेट कोचिंग चलाते हैं. हांलांकि उनका सेलेक्शन में कोई भी अहम रोल नहीं है लेकिन वो रणजी अभी भी खेलते हैं. वैसे अभी उनकी अकैडमी छोटे बच्चों के लिए ही है. उन्हें इतना घबराने की ज़रुरत नहीं है. हाँ चेतन चौहान और दिलीप वेंगसरकर को झटके ज़रूर लग सकते हैं. ये दोनों ही क्रिकेट अकैडमी चलाते हैं और ये BCCI में बड़े पदों पर बैठे हैं.
दिलीप वेंगसरकर की सुनें तो वो कहते हैं कि ये अब तक की सबसे वाहियात बात है जो BCCI की और से आई है. एक क्रिकेट खिलाड़ी होने के नाते जितना कुछ भी एक क्रिकेटर को मालूम होता है, वो पूरी कोशिश करके दूसरों तक उसे पहुंचना चाहता है. जिससे देश के क्रिकेट की और तरक्की हो. और ऐसे में BCCI की और से ऐसे फ़रमान से उसमें अच्छी खासी रुकावट आएगी.

Dilip Vengarkar was left baffled after the decision by BCCI
लल्लन की मानें तो कोई क्रिकेट अकैडमी चलाने वाला अगर सेलेक्शन करने बैठे या किसी ऐसी कुर्सी पे बैठे जिसपे रहकर वो अपनी अकैडमी से आने वाले किसी भी क्रिकेटर का कभी भी और कैसे भी थोड़ा भी फ़ायदा करवा सकता है तो ये कई मायनों में ग़लत होगा. ऐसा नहीं ही होना चाहिए. हांलांकि दिलीप वेंगसरकर जैसे 'वजनी' और दिमागदार लोगों को अकैडमी बंद करने या BCCI से निकाल देने से भी इंडिया के क्रिकेट और इण्डिया के फ्यूचर के क्रिकेट को उतना ही नुकसान होगा.
कुल मिला के सिचुएशन गंभीर है. गंभीर भी टीम में नहीं है. हांलांकि टीम पूरी तरह से गंभीर है एशिया कप और उसे तुरन बाद आने वाले टी-20 वर्ल्ड कप के लिए. ये गंभीरता ज़रूरी भी है. फिलहाल तो टीम को इन दो टूर्नामेंट पे फोकस करना चाहिए. अंग्रेजी में हौंके तो 'Conflict of interest can take a back seat.'
तो इसी लोकपाल ने एक नया बखेड़ा खड़ा किया है. कहने वाले इसे तुगलकी फ़रमान कह रहे हैं. इस लोकपाल ने BCCI के पे-रोल पे रहने वाले हर एम्प्लॉयी के conflict of interest पर ऊँगली उठाई है. Conflict of interest यानी कि आप किसी कंपनी में अपने पोस्ट और पोज़ीशन का फायदा उठाते हुए ऐसा डिसीज़न लें जिससे आपको पर्सनल प्रॉफिट हो.

हाल ही में Conflict of interest का मुद्दा इंडियन क्रिकेट में अच्छा-खासा गरमाया हुआ है. इसकी शुरुआत IPL में धोनी की रिती स्पोर्ट्स में 15% के मालिकाना हक़ से हुई थी. रिती स्पोर्ट्स जो कागजों पर चेन्नई सुपर किंग्स की मार्केटिंग को सम्हालती थी मगर कहा जाता था कि चेन्नई सुपर किंग्स और रिती स्पोर्ट्स एक ही सिक्के के दो साइड हैं. इसके अलावा रिती स्पोर्ट्स, सुरेश रैना और रवीन्द्र जडेजा को भी मैनेज करती थी. किताबों के हिसाब से सिचुएशन ऐसी हो गयी थी कि धोनी इंडियन टीम के कैप्टन थे जो सेलेक्शन में भी अहम रोल प्ले करते थे, और उनकी ही कंपनी के दो नाम (रैना और जडेजा) सेलेक्शन के लिए मौजूद रहते थे. ऐसे में घोर conflict of interest की स्थिति बन जाती है. रैना ने जुलाई 2015 में रिती स्पोर्ट्स से अपना कॉन्ट्रैक्ट खतम कर लिया था.

MSD was captain of India and held 15% stake in Rhiti Sports that managed Raina & Jadeja
फिलहाल, ये conflict of interest का बवाल फिर से उठ खड़ा हुआ है. BCCI के लोकपाल ए. पी. शाह के मुताबिक BCCI के अंडर आने वाले सभी खिलाड़ियों, सेलेक्टर्स, और ऐसे लोग जिनको डिसीज़न लेने का हक़ है, उन्हें अपने सभी कॉन्ट्रैक्ट्स और किसी भी ऐसी कंपनी जिसका क्रिकेट से कोई भी लेना देना हो, उस कनेक्शन को साफ़-साफ़ दिखाना होगा. अगर किसी भी कनेक्शन में लोकपाल के हिसाब से conflict of interest की स्थिति पैदा होगी, तो उस इंसान के पास दो ऑप्शन होंगे - या तो कनेक्शन खतम करो या BCCI से बाहर जाओ.
BCCI में इस बार इस फ़ितूर की शुरुआत हुई नीरज गुंडे की कम्प्लेंट से. उन्होनें बताया कि हरभजन सिंह की कंपनी भज्जी स्पोर्ट्स लगभग 6 रणजी टीमों को क्रिकेट किट पहुंचाती है. ऐसे में conflict of interest का तगड़ा केस बनता है. हरभजन सिंह ने कहा कि भज्जी स्पोर्ट्स कंपनी के न ही वो मालिक हैं न ही उसपर कैसा भी मालिकाना हक़ है. उनके मुताबिक उस कम्पनी की मालकिन उनकी मां अवतार कौर हैं.

Source: Bhajji Sports on twitter
ए पी शाह ने कहा कि भज्जी स्पोर्ट्स, हरभजन के अभी के कॉन्ट्रैक्ट शुरू होने के पहले और अभी के conflict of interest के नियम बनने से पहले बनाई गयी थी. इसलिए हरभजन को ये डिक्लेयर करना होना कि आगे से वो ऐसी किसी भी तरह से भज्जी स्पोर्ट्स से नहीं जुड़ेंगे जिससे conflict of interest की सिचुएशन पैदा हो.
कुछ ऐसी चीज़ें हैं जिनपर बहुत ही साफ़-सफाई से सीधे शब्दों में बताया गया है कि वो conflict of interest की लिस्ट में आराम से आ सकते हैं. वो हैं - क्रिकेट का कैसा भी सामान बनाने वाली कम्पनियां, क्रिकेट कोचिंग या अकैडमी, या फिर कोई भी ऐसी कंपनी जो स्पोर्ट्स इवेंट्स या खिलाडियों को मैनेज करती है. अगर देखें तो हर खिलाड़ी लपेटे में आएगा. सहवाग क्रिकेट कोचिंग चलाते हैं. हांलांकि उनका सेलेक्शन में कोई भी अहम रोल नहीं है लेकिन वो रणजी अभी भी खेलते हैं. वैसे अभी उनकी अकैडमी छोटे बच्चों के लिए ही है. उन्हें इतना घबराने की ज़रुरत नहीं है. हाँ चेतन चौहान और दिलीप वेंगसरकर को झटके ज़रूर लग सकते हैं. ये दोनों ही क्रिकेट अकैडमी चलाते हैं और ये BCCI में बड़े पदों पर बैठे हैं.
दिलीप वेंगसरकर की सुनें तो वो कहते हैं कि ये अब तक की सबसे वाहियात बात है जो BCCI की और से आई है. एक क्रिकेट खिलाड़ी होने के नाते जितना कुछ भी एक क्रिकेटर को मालूम होता है, वो पूरी कोशिश करके दूसरों तक उसे पहुंचना चाहता है. जिससे देश के क्रिकेट की और तरक्की हो. और ऐसे में BCCI की और से ऐसे फ़रमान से उसमें अच्छी खासी रुकावट आएगी.

Dilip Vengarkar was left baffled after the decision by BCCI
लल्लन की मानें तो कोई क्रिकेट अकैडमी चलाने वाला अगर सेलेक्शन करने बैठे या किसी ऐसी कुर्सी पे बैठे जिसपे रहकर वो अपनी अकैडमी से आने वाले किसी भी क्रिकेटर का कभी भी और कैसे भी थोड़ा भी फ़ायदा करवा सकता है तो ये कई मायनों में ग़लत होगा. ऐसा नहीं ही होना चाहिए. हांलांकि दिलीप वेंगसरकर जैसे 'वजनी' और दिमागदार लोगों को अकैडमी बंद करने या BCCI से निकाल देने से भी इंडिया के क्रिकेट और इण्डिया के फ्यूचर के क्रिकेट को उतना ही नुकसान होगा.

कुल मिला के सिचुएशन गंभीर है. गंभीर भी टीम में नहीं है. हांलांकि टीम पूरी तरह से गंभीर है एशिया कप और उसे तुरन बाद आने वाले टी-20 वर्ल्ड कप के लिए. ये गंभीरता ज़रूरी भी है. फिलहाल तो टीम को इन दो टूर्नामेंट पे फोकस करना चाहिए. अंग्रेजी में हौंके तो 'Conflict of interest can take a back seat.'

