बाटला हाउस एनकाउंटर के दोषी आरिज खान को नहीं होगी फांसी, जुर्माने में भी भारी कमी
सितंबर 2008 में हुए बाटला हाउस एनकाउंटर में दिल्ली पुलिस के एक इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा की मौत हो गई थी.

दिल्ली हाई कोर्ट ने बाटला हाउस एनकाउंटर मामले में आरिज खान की मौत की सजा रद्द कर उसे आजीवन कारावास में बदल दिया है. हाई कोर्ट के जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और जस्टिस अमित शर्मा की डिविजन बेंच ने मामले में ये फैसला दिया. सितंबर 2008 में हुए इस एनकाउंटर में दिल्ली पुलिस के एक इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा की मौत हो गई थी.
मामले की सुनवाई के दौरान ट्रायल कोर्ट ने इसे 'Rarest Of Rare Crime' बताया था. इस आधार पर ट्रायल कोर्ट ने खान को मौत की सजा सुनाई थी. साथ ही 11 लाख का जुर्माना भी लगाया था. लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट ने अपनी सुनवाई में इसे दुर्लभतम श्रेणी का अपराध नहीं मानते हुए दोषी के लिए आजीवन कारावास की सजा को उपयुक्त माना है. लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक 11 लाख के जुर्माने को भी कम कर के 1 लाख 15 हजार रुपये कर दिया है.
फैसले में कोर्ट ने ये भी कहा कि आरिज खान इतना सक्षम नहीं है कि 11 लाख रुपये का जुर्माना चुका सके. हालांकि कोर्ट ने इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा को याद करते हुए कहा कि उनके योगदान को देश कभी भुला नहीं सकता.
क्या हुआ था बाटला हाउस एनकाउंटर में?
19 सितंबर 2008 को दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम को एक टिप मिली थी कि बाटला हाउस इलाके में कुछ आतंकी छिपे हुए हैं. इसके बाद दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा के नेतृत्व में एक टीम बाटला हाउस के फ्लैट नंबर 108 के पास पहुंची. छापेमारी के दौरान वहां गोलीबारी शुरू हो गई. इस एनकाउंटर में इंडियन मुजाहिदीन के दो आतंकी आतिफ आमिन और मोहम्म्द साजिद मारे गए. लेकिन आरिज खान भाग निकलने में कामयाब रहा था. गोलीबारी में इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा भी घायल हो गए जिससे उनकी मौत हो गई.
इस पूरे एनकाउंटर को करने के तरीके और मोहन चंद शर्मा की मौत को लेकर लंबे वक्त तक विवाद रहा. 2018 में दिल्ली पुलिस ने आरिज को उत्तराखंड के बनबसा से गिरफ्तार किया था. आरिज नेपाल में मोहम्मद सलीम नाम के फर्जी नागरिकता कार्ड और फर्जी पासपोर्ट के साथ रह रहा था.
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