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बांग्लादेश की स्कूली किताबों से शेख हसीना गायब, भारत के योगदान को भी सीमित करके दिखाया

Bangladesh Textbooks: बांग्लादेश की स्कूली किताबों में बड़े बदलाव किए गए हैं. इसे इस तरह का सबसे कठोर कदम बताया जा रहा है. उस ऐतिहासिक तस्वीर को भी हटा दिया गया है जिसमें पाकिस्तान, भारत के सामने आत्मसमर्पण कर रहा था.

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Pakistan Surrender 1971
1971 की लड़ाई के बाद आत्मसमर्पण करता पाकिस्तान. इस तस्वीर को किताब से हटा दिया गया है. (फाइल फोटो: IAF)
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रवि सुमन
28 फ़रवरी 2025 (पब्लिश्ड: 09:07 AM IST)
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पिछले साल शेख हसीना (Sheikh Hasina) को बांग्लादेश के राष्ट्रपति का पद छोड़ना पड़ा. इसके बाद से वहां की स्कूली किताबों में कई बड़े बदलाव किए गए हैं. इसकी तैयारी पिछले कई महीनों से चल रही थी. किताबों में भारत से जुड़े बदलाव भी किए गए हैं. किताबों से शेख हसीना से जुड़ी सारी तस्वीरों और चैप्टर्स को पूरी तरह से हटा दिया गया है. उनके पिता और देश के संस्थापक राष्ट्रपति शेख मुजीबुर्रहमान (Mujibur Rahman) से जुड़े कॉन्टेंट भी या तो हटा दिए गए हैं या उनको छोटा कर दिया गया है.

बांग्लादेश की आजादी के आंदोलन में भारत की भूमिका को बरकरार रखा गया है. लेकिन मुजीबुर्रहमान के साथ भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की तस्वीरें हटा दी गई हैं.

इससे पहले किताबों के पिछले कवर पेज पर छात्रों के लिए शेख हसीना का संदेश लिखा होता था. अब उसे बदल दिया गया है. जुलाई 2024 में हसीना के खिलाफ विद्रोह शुरू हुआ था. पिछले कवर पर अब इस विद्रोह से जुड़ी तस्वीरें लगाई गई हैं.

441 किताबों में बदलाव

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ये बदलाव नेशनल करिकुलम एंड टेक्स्टबुक बोर्ड (NCTB) की ओर से किए गए हैं. इस साल स्कूली किताबों में किया गया ये सबसे बड़ा बदलाव है. इसे इस तरह का सबसे कठोर कदम भी बताया जा रहा है. 

रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि बांग्लादेश शिक्षा मंत्रालय ने इसके लिए 57 से अधिक एक्सपर्ट्स की टीम का गठन किया था. प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्कूल की 441 किताबों में बदलाव हुए हैं. वर्तमान सेशन के लिए 40 करोड़ से अधिक नई किताबें छापी गई हैं.

भारत और बांग्लादेश की किताबें

दिसंबर 1971 में भारत और बांग्लादेशी स्वतंत्रता सेनानियों ने साथ मिलकर पाकिस्तान के खिलाफ लड़ाई लड़ी. इसी के कारण बांग्लादेश अस्तित्व में आया. पांचवी क्लास की किताब में इसको बताने के लिए एक चैप्टर है. इसका नाम है, 'पाकिस्तानी बहिनिर अंतमोसमर्पण ओ आमदेर बिजॉय (पाकिस्तानी सेना का आत्मसमर्पण और हमारी जीत)'. 

इस चैप्टर में बताया गया है कि कैसे भारतीय सेना और मुक्तिजोद्धा (बांग्लादेशी स्वतंत्रता सेनानी) ने पाकिस्तानी सेना को हराने के लिए हाथ मिलाया. इसी पाठ में एक ऐतिहासिक तस्वीर भी थी. तस्वीर में पाकिस्तान, भारत के समझ आत्मसमर्पण कर रहा है. भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट-जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा, पाकिस्तान के लेफ्टिनेंट-जनरल अमीर अब्दुल्ला खान नियाजी से आत्मसमर्पण का दस्तावेज स्वीकार कर रहे हैं. इस तस्वीर को भी हटा दिया गया है.

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इंदिरा गांधी की भी तस्वीर हटी

इसके अलावा छठी क्लास की अंग्रेजी की किताब के अंदर के कवर पेज से दो तस्वीरें हटाई गई हैं. इनमें इंदिरा गांधी और मुजीबुर्रहमान साथ में दिख रहे थे. पहली तस्वीर 6 फरवरी, 1972 की है. मुजीबुर्रहमान इस तस्वीर में कोलकाता में एक रैली में भाषण दे रहे थे और गांधी मंच पर थीं. दूसरी तस्वीर 17 मार्च, 1972 की थी. उसमें बांग्लादेश के राष्ट्रपति ढाका हवाई अड्डे पर भारतीय प्रधानमंत्री का स्वागत कर रहे थे. 

इंडियन एक्सप्रेस ने NCTB के अध्यक्ष एकेएम रेजुल हसन के हवाले से बताया,

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आगे भी होंगे बदलाव

हसन के मुताबिक,

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दूसरी किताबों से भी मुजीबुर्रहमान की तस्वीरें हटा दी गई हैं. इनमें वो दुनिया के बड़े नेताओं के साथ दिख रहे थे.

इसके अलावा राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रीय गीत को किताबों के पहले पन्ने से हटाकर पीछे की ओर कर दिया गया है. बकौल हसन, एक्सपर्ट टीम को लगा कि किताबों में राष्ट्रीय ध्वज और गीत की जरूरत नहीं है. उन्हें लगा कि सामने के कवर पर ऐसी तस्वीरें होनी चाहिए जो बच्चों का ध्यान खींचे. यही कारण है कि दोनों (ध्वज और गीत) को पीछे की ओर कर दिया गया है. हसन ने कहा कि ये बाद में तय किया जाएगा कि उन्हें पूरी तरह से हटाया जाना चाहिए या नहीं.

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