The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • News
  • Bangladesh Releases Dawood Ibrahim’s Top Aide

गुलशन कुमार की हत्या के दोषी को बांग्लादेश ने रिहा किया

क्या उसे भारत लाया जा सकेगा?

Advertisement
Img The Lallantop
गुलशन कुमार, दाऊद मर्चेंट
pic
लल्लनटॉप
7 नवंबर 2016 (Updated: 7 नवंबर 2016, 04:55 PM IST)
font-size
Small
Medium
Large
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share
बांग्लादेश की सरकार ने आज गुलशन कुमार की हत्या के दोषी और अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहीम के गुर्गे दाऊद मर्चेंट को ढाका के सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया है. दाऊद मर्चेंट का पूरा नाम अब्दुल रउफ दाऊद मर्चेंट है. मर्चेंट को नकली बांग्लादेशी पासपोर्ट रखने के आरोप में 2009 में गिरफ्तार किया गया था. दाऊद मर्चेंट ढाका सेंट्रल जेल से संडे शाम 4.30 बजे जेल से बाहर आया.
daood marchent feature

 
 
 
 
 
 
 
 
 
बांग्लादेश पुलिस ने मई 2009 में मर्चेंट को एक गुप्त सूचना पर बांग्लादेश के ब्राह्मणबरिया जिले से गिरफ्तार किया था. वो मुंबई में अपने परिवार से मुलाकात के लिए पैरोल पर रिहा होने के दौरान भारत से बांग्लादेश भाग आया था. उसे बाद में बांग्लादेश में अवैध तरीके से घुसने और रहने के मामले में दोषी ठहराया गया और दिसंबर 2014 में रिहा कर दिया गया. उसकी रिहाई के तुरंत बाद ही उसे फिर से गिरफ्तार कर लिया गया. बांग्लादेश की पुलिस ने तब कहा था कि इस्लामी आतंकवादियों से उसके संपर्कों का पता लगाने के लिए पूछताछ जरूरी है.
बांग्लादेश के होम मिनिस्टर असदुज्जमां खान कमाल ने बताया कि, “दाऊद मर्चेंट को रिहा किया गया है क्योंकि उसकी सजा पहले ही पूरी हो चुकी थी. पर उसे भारत को कब सौंपा जाएगा, ये अभी क्लियर नहीं है.” हालांकि कमाल ने इसी साल जनवरी  में मीडिया से कहा था, ‘‘हम कई विदेशी कैदियों की कैद की अवधि पूरी हो जाने पर उनके देश वापस भेज देते हैं. दाऊद मर्चेंट भी उनमें से एक है.’’ 

गुलशन कुमार हत्याकांड 

गुलशन कुमार
गुलशन कुमार

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
म्यूजिक बैरन के नाम से पुकारे जाने वाले गुलशन कुमार की हत्या 12 अगस्त 1997 में कर दी गई थी. वो मुंबई के अंधेरी में मौजूद जीतेश्वर महादेव के मंदिर में पूजा के लिए गए थे. वहां से वापस आते समय उनकी हत्या कर दी गयी थी. आरोप लगा कि इस हत्या में नदीम-श्रवण संगीतकार जोड़ी के नदीम सैफ का हाथ है. माना जाता है कि नदीम-श्रवण संगीतकार जोड़ी को बॉलीवुड में लाने वाले गुलशन कुमार ही थे. और कहा जाता है कि बाद में नदीम का गुलशन कुमार के साथ विवाद हो गया था.
गुलशन कुमार की हत्याकांड की जांच कर रही मुंबई पुलिस का मानना था कि कैसेट किंग गुलशन कुमार की हत्या के लिए नदीम ने दाऊद इब्राहिम की मदद ली थी. दाऊद के शार्प शूटर मर्चेंट और उसके साथी अब्दुल रशीद ने गुलशन कुमार पर मंदिर के बाहर गोली चला कर हत्या की थी. गुलशन कुमार की हत्या होने के वक्त नदीम लंदन में था. बाद में केस में नाम आने के बाद से वो लंदन में रहने लगा. हत्या का मामला चलाने के लिए भारत सरकार ने नदीम को वापस लाने के लिए बहुत हाथ-पांव मारे. लेकिन कामयाबी नहीं मिली, क्योंकि ब्रिटेन की हाई कोर्ट ने नदीम के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा था कि नदीम पर हत्या व हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप नेक इरादे से नहीं लगाए गए हैं. इस तरह नदीम को वापस लाने का मामला खारिज हो गया था.
इधर मुंबई अदालत में भी पुलिस इस हत्या में नदीम के शामिल होने के आरोप को साबित करने में नाकाम रही. क्योंकि हत्या के समय नदीम लंदन में था. मुंबई की एक अदालत ने 2002 में गुलशन कुमार की हत्या में शामिल 19 आरोपियों में केवल एक को दोषी पाया और वो दाऊद मर्चेंट था. जाहिर है नदीम का मामला रद्द हो गया. हालांकि इस मामले में नदीम की गिरफ्तारी के वारंट को कभी वापस नहीं लिया गया. इधर दाऊद मार्चेंट पर हत्या का मुकदमा चला. पता चला कि इस हत्या में दाऊद इब्राहिम का हाथ था. पुलिस के हिसाब से गुलशन कुमार की कैसेट कंपनी टी सीरीज की सफलता को देखकर दाऊद इब्राहिम ने एक बड़ी रकम की मांग की थी. वो रकम नहीं दिए जाने के कारण गुलशन कुमार की हत्या हुई. इस हत्या के लिए 2002 में दाऊद मर्चेंट को हत्या का दोषी माना गया और उसे उम्र कैद की सजा सुनायी गयी थी. लेकिन 2009 में उसे उसके परिवार के किसी बीमार सदस्य को देखने के लिए 14 दिन के परोल पर इस शर्त पर छोड़ा गया कि वो हर रोज थाने में हाजिरी देगा. लगातार सात दिनों तक दाऊद मर्चेंट ने थाने में हाजिरी दी, लेकिन इसके बाद उसका कुछ पता नहीं चला. जांच के एक हफ्ता बाद खुफिया पुलिस को पता चला कि वो बांग्लादेश भाग गया है. बांग्लादेश जाने पर मर्चेंट को वहां की पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था. तब से लेकर अब तक वो जेल में ही रहा था. बस बीच में वो कुछ दिनों के लिए जेल से बाहर आया था.
भारत की सरकार तो बहुत दिनों से दाऊद मर्चेंट को भारत लाने की कोशिश कर रही है. लेकिन बांग्लादेश सरकार ने अभी तक उसे भारत को सौंपने के बारे में कुछ साफ नहीं कहा है.


ये स्टोरी आदित्य प्रकाश ने की है 


 

Advertisement

Advertisement

()