गुलशन कुमार की हत्या के दोषी को बांग्लादेश ने रिहा किया
क्या उसे भारत लाया जा सकेगा?
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गुलशन कुमार, दाऊद मर्चेंट
बांग्लादेश की सरकार ने आज गुलशन कुमार की हत्या के दोषी और अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहीम के गुर्गे दाऊद मर्चेंट को ढाका के सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया है. दाऊद मर्चेंट का पूरा नाम अब्दुल रउफ दाऊद मर्चेंट है. मर्चेंट को नकली बांग्लादेशी पासपोर्ट रखने के आरोप में 2009 में गिरफ्तार किया गया था. दाऊद मर्चेंट ढाका सेंट्रल जेल से संडे शाम 4.30 बजे जेल से बाहर आया.
बांग्लादेश पुलिस ने मई 2009 में मर्चेंट को एक गुप्त सूचना पर बांग्लादेश के ब्राह्मणबरिया जिले से गिरफ्तार किया था. वो मुंबई में अपने परिवार से मुलाकात के लिए पैरोल पर रिहा होने के दौरान भारत से बांग्लादेश भाग आया था. उसे बाद में बांग्लादेश में अवैध तरीके से घुसने और रहने के मामले में दोषी ठहराया गया और दिसंबर 2014 में रिहा कर दिया गया. उसकी रिहाई के तुरंत बाद ही उसे फिर से गिरफ्तार कर लिया गया. बांग्लादेश की पुलिस ने तब कहा था कि इस्लामी आतंकवादियों से उसके संपर्कों का पता लगाने के लिए पूछताछ जरूरी है.
गुलशन कुमार
म्यूजिक बैरन के नाम से पुकारे जाने वाले गुलशन कुमार की हत्या 12 अगस्त 1997 में कर दी गई थी. वो मुंबई के अंधेरी में मौजूद जीतेश्वर महादेव के मंदिर में पूजा के लिए गए थे. वहां से वापस आते समय उनकी हत्या कर दी गयी थी. आरोप लगा कि इस हत्या में नदीम-श्रवण संगीतकार जोड़ी के नदीम सैफ का हाथ है. माना जाता है कि नदीम-श्रवण संगीतकार जोड़ी को बॉलीवुड में लाने वाले गुलशन कुमार ही थे. और कहा जाता है कि बाद में नदीम का गुलशन कुमार के साथ विवाद हो गया था. इधर मुंबई अदालत में भी पुलिस इस हत्या में नदीम के शामिल होने के आरोप को साबित करने में नाकाम रही. क्योंकि हत्या के समय नदीम लंदन में था. मुंबई की एक अदालत ने 2002 में गुलशन कुमार की हत्या में शामिल 19 आरोपियों में केवल एक को दोषी पाया और वो दाऊद मर्चेंट था. जाहिर है नदीम का मामला रद्द हो गया. हालांकि इस मामले में नदीम की गिरफ्तारी के वारंट को कभी वापस नहीं लिया गया. इधर दाऊद मार्चेंट पर हत्या का मुकदमा चला. पता चला कि इस हत्या में दाऊद इब्राहिम का हाथ था. पुलिस के हिसाब से गुलशन कुमार की कैसेट कंपनी टी सीरीज की सफलता को देखकर दाऊद इब्राहिम ने एक बड़ी रकम की मांग की थी. वो रकम नहीं दिए जाने के कारण गुलशन कुमार की हत्या हुई. इस हत्या के लिए 2002 में दाऊद मर्चेंट को हत्या का दोषी माना गया और उसे उम्र कैद की सजा सुनायी गयी थी. लेकिन 2009 में उसे उसके परिवार के किसी बीमार सदस्य को देखने के लिए 14 दिन के परोल पर इस शर्त पर छोड़ा गया कि वो हर रोज थाने में हाजिरी देगा. लगातार सात दिनों तक दाऊद मर्चेंट ने थाने में हाजिरी दी, लेकिन इसके बाद उसका कुछ पता नहीं चला. जांच के एक हफ्ता बाद खुफिया पुलिस को पता चला कि वो बांग्लादेश भाग गया है. बांग्लादेश जाने पर मर्चेंट को वहां की पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था. तब से लेकर अब तक वो जेल में ही रहा था. बस बीच में वो कुछ दिनों के लिए जेल से बाहर आया था.
भारत की सरकार तो बहुत दिनों से दाऊद मर्चेंट को भारत लाने की कोशिश कर रही है. लेकिन बांग्लादेश सरकार ने अभी तक उसे भारत को सौंपने के बारे में कुछ साफ नहीं कहा है.
बांग्लादेश पुलिस ने मई 2009 में मर्चेंट को एक गुप्त सूचना पर बांग्लादेश के ब्राह्मणबरिया जिले से गिरफ्तार किया था. वो मुंबई में अपने परिवार से मुलाकात के लिए पैरोल पर रिहा होने के दौरान भारत से बांग्लादेश भाग आया था. उसे बाद में बांग्लादेश में अवैध तरीके से घुसने और रहने के मामले में दोषी ठहराया गया और दिसंबर 2014 में रिहा कर दिया गया. उसकी रिहाई के तुरंत बाद ही उसे फिर से गिरफ्तार कर लिया गया. बांग्लादेश की पुलिस ने तब कहा था कि इस्लामी आतंकवादियों से उसके संपर्कों का पता लगाने के लिए पूछताछ जरूरी है.
गुलशन कुमार हत्याकांड
गुलशन कुमार
म्यूजिक बैरन के नाम से पुकारे जाने वाले गुलशन कुमार की हत्या 12 अगस्त 1997 में कर दी गई थी. वो मुंबई के अंधेरी में मौजूद जीतेश्वर महादेव के मंदिर में पूजा के लिए गए थे. वहां से वापस आते समय उनकी हत्या कर दी गयी थी. आरोप लगा कि इस हत्या में नदीम-श्रवण संगीतकार जोड़ी के नदीम सैफ का हाथ है. माना जाता है कि नदीम-श्रवण संगीतकार जोड़ी को बॉलीवुड में लाने वाले गुलशन कुमार ही थे. और कहा जाता है कि बाद में नदीम का गुलशन कुमार के साथ विवाद हो गया था. इधर मुंबई अदालत में भी पुलिस इस हत्या में नदीम के शामिल होने के आरोप को साबित करने में नाकाम रही. क्योंकि हत्या के समय नदीम लंदन में था. मुंबई की एक अदालत ने 2002 में गुलशन कुमार की हत्या में शामिल 19 आरोपियों में केवल एक को दोषी पाया और वो दाऊद मर्चेंट था. जाहिर है नदीम का मामला रद्द हो गया. हालांकि इस मामले में नदीम की गिरफ्तारी के वारंट को कभी वापस नहीं लिया गया. इधर दाऊद मार्चेंट पर हत्या का मुकदमा चला. पता चला कि इस हत्या में दाऊद इब्राहिम का हाथ था. पुलिस के हिसाब से गुलशन कुमार की कैसेट कंपनी टी सीरीज की सफलता को देखकर दाऊद इब्राहिम ने एक बड़ी रकम की मांग की थी. वो रकम नहीं दिए जाने के कारण गुलशन कुमार की हत्या हुई. इस हत्या के लिए 2002 में दाऊद मर्चेंट को हत्या का दोषी माना गया और उसे उम्र कैद की सजा सुनायी गयी थी. लेकिन 2009 में उसे उसके परिवार के किसी बीमार सदस्य को देखने के लिए 14 दिन के परोल पर इस शर्त पर छोड़ा गया कि वो हर रोज थाने में हाजिरी देगा. लगातार सात दिनों तक दाऊद मर्चेंट ने थाने में हाजिरी दी, लेकिन इसके बाद उसका कुछ पता नहीं चला. जांच के एक हफ्ता बाद खुफिया पुलिस को पता चला कि वो बांग्लादेश भाग गया है. बांग्लादेश जाने पर मर्चेंट को वहां की पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था. तब से लेकर अब तक वो जेल में ही रहा था. बस बीच में वो कुछ दिनों के लिए जेल से बाहर आया था.
भारत की सरकार तो बहुत दिनों से दाऊद मर्चेंट को भारत लाने की कोशिश कर रही है. लेकिन बांग्लादेश सरकार ने अभी तक उसे भारत को सौंपने के बारे में कुछ साफ नहीं कहा है.

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