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बांग्लादेश में हिंसा के चलते 105 लोगों की मौत, 15 हजार भारतीय किस हाल में हैं?

Bangladesh Quota Protests: सरकारी नौकरियों में आरक्षण को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन और हिंसा के बीच अधिकारियों ने देशव्यापी कर्फ्यू लगा दिया है. आरोप है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने जेल से कैदियों को रिहा कर उसमें आग लगा दी. अब तक वहां क्या-क्या हुआ है?

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bangladesh quota protest violence 105 dead 15 thousand indians stuck nationwide curfew imposed
प्रदर्शनकारियों, पुलिस और अवामी लीग समर्थकों के बीच झड़प के दौरान पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े (फोटो- रॉयटर्स)
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ज्योति जोशी
20 जुलाई 2024 (पब्लिश्ड: 12:20 PM IST)
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पड़ोसी देश बांग्लादेश में आरक्षण को लेकर बवाल मचा हुआ है (Bangladesh Violence Quota Protest). विरोध प्रदर्शन कर रहे हजारों छात्रों और सुरक्षा बलों के बीच हुई हिंसा में अब तक 105 लोगों की मौत हो चुकी है. हजारों लोग घायल हुए हैं. इस बीच वहां के अधिकारियों ने देशव्यापी कर्फ्यू लागू कर दिया है. इसके साथ ही सुरक्षा और अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती का आदेश भी दिया गया है. 

कॉलेज-यूनिवर्सिटी बंद कर दिए गए हैं. ट्रेन-मेट्रो सेवाएं ठप हो चुकी हैं. इंटरनेट बंद होने की खबरें भी हैं. भारत के विदेश मंत्रालय ने वहां फंसे हजारों भारतीयों को लेकर जानकारी साझा की है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि फिलहाल बांग्लादेश में रह रहे 8,500 छात्रों समेत 15,000 भारतीय सुरक्षित हैं. सरकार ने 125 छात्रों समेत 245 भारतीयों की वापसी का प्रबंध किया है. वो सभी 19 जुलाई को देश वापस लौट आए हैं.

कैदियों को छोड़ा, जेल में आग लगाई!

स्थानीय पुलिस ने बताया कि 19 जुलाई को प्रदर्शनकारियों ने मध्य बांग्लादेश के नरसिंगडी जिले की एक जेल से कई सारे कैदियों को मुक्त कर दिया और फिर जेल की इमारत में आग लगा दी. एक पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर समाचार एजेंसी AFP को बताया,

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इससे पहले प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर देश के सरकारी टीवी चैनल में घुसकर आग लगा दी थी. आरोप है कि वहां पार्क किए गए वाहनों को भी आग लगा दी गई और इस दौरान पत्रकारों समेत कुछ कर्मचारी अंदर फंसे रहे.

आरक्षण को लेकर क्या विवाद हो गया है?

प्रदर्शनकारी छात्र बांग्लादेश सरकार से पाकिस्तान के साथ 1971 के स्वतंत्रता संग्राम में लड़ने वाले लोगों के परिवारों के लिए सरकारी नौकरियों में 30% आरक्षण को खत्म करने की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि ये कोटा प्रणाली शेख हसीना की अवामी लीग के समर्थकों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई गई है. मांग है कि योग्यता आधारित प्रणाली लागू की जाए. लगभग तीन हफ्ते से चल रहे विरोध प्रदर्शन अब और तेज हो गए हैं. 

टीवी पर राष्ट्र के नाम संबोधन में प्रधानमंत्री शेख हसीना ने छात्रों को मुद्दे का शांतिपूर्ण समाधान खोजने के लिए बातचीत के लिए आमंत्रित किया है. इससे पहले उन्होंने छात्रों से मामले पर अगला फैसला आने तक धैर्य बनाए रखने का आग्रह किया था.  

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बांग्लादेश का सुप्रीम कोर्ट अब 7 अगस्त को इस मसले पर सुनवाई करेगा.

वीडियो: दुनियादारी: बांग्लादेश में हिंसा से भारत को कैसा ख़तरा है?

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