बांग्लादेश में हजारों हिंदू मशाल लेकर सड़कों पर उतरे, भगवान राम के 'अपमान' का आरोप लगाया
Bangladesh में भगवान राम के कथित अपमान के बाद हिंदू संगठनों से जुड़े लोगों ने Dhaka में मशाल के साथ विरोध प्रदर्शन किया. पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है, लेकिन अब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है.

बांग्लादेश में एक बार फिर हिंदू-मुस्लिम तनाव बढ़ गया है. बांग्लादेशी हिंदुओं ने मुस्लिम समुदाय से जुड़े लोगों पर भगवान राम का ‘अपमान’ करने का आरोप लगाया है. हिंदू संगठनों से जुड़े हजारों लोग राजधानी ढाका में मशाल लेकर विरोध प्रदर्शन करने निकले. उन्होंने आरोपियों को 72 घंटे में गिरफ्तार करने की मांग की है. पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है, लेकिन अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है.
शुक्रवार, 19 जून के दिन हिंदू संगठनों से जुड़े हजारों लोगों ने ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाते हुए प्रदर्शन किया. लोगों के हाथों में जलती हुई मशालें देखी गईं. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, मामला गाइबांधा जिले के पलाशबाड़ी के रंगपुर में श्री श्री राधा गोविंद मंदिर परिसर के अंदर भगवान राम की 81 फीट ऊंची मूर्ति बनाने से जुड़ा है.
भगवान राम की प्रतिमा बनाने का काम रुकाआरोप है कि मुस्लिम समुदाय से जुड़े चरमपंथी समूहों के विरोध और धमकी के बाद भगवान राम की प्रतिमा बनाने का काम रोक दिया. इससे हिंदू समुदाय के लोग नाराज होकर सड़कों पर उतर आए. सभी प्रदर्शनकारी शाहबाग चौराहे पर इकट्ठा हुए और नेशनल प्रेस क्लब तक मशाल मार्च निकाला.

जुलूस में शामिल लोगों ने ‘जय श्रीराम’ के नारे भी लगाए. हिंदू संगठनों ने चेतावनी दी कि अगर 72 घंटे में आरोपी गिरफ्तार नहीं होते, तो वे इससे भी बड़ा विरोध प्रदर्शन करेंगे. जानकारी के मुताबिक, भगवान राम की मूर्ति बनाने का काम 80% तक पूरा हो चुका है. मंदिर प्रशासन के अध्यक्ष हरिदास चंद्र दासी की ओर से बताया गया कि सांप्रदायिक तनाव से बचने और इलाके में शांति बनाए रखने की वजह से मूर्ति बनाने का काम अभी रोक दिया गया है.
हिंदू अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने का आरोपबांग्लादेश की कुल आबादी में हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय की हिस्सेदारी करीब 8% है. यह मामला ऐसे समय पर हुआ, जब बांग्लादेश में लगातार हिंदू अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने के आरोप लग रहे हैं. इसी साल फरवरी में तारिक रहमान ने देश के प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली. उन्होंने अपने पहले ही संबोधन में कहा था कि ‘धर्म लोगों का एक निजी मामला’ है, लेकिन देश ‘सभी’ का है. हालांकि, इसके बाद भी जनवरी 2026 से मार्च 2026 के बीच करीब 133 सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं दर्ज की गईं.
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