दीपू चंद्र दास के परिवार को कितना मुआवजा मिला? भीड़ ने हत्या कर शव जला दिया था
बीते साल 18 दिसंबर को मैमनसिंह जिले के भालुका में दीपू चंद्र दास की कथित तौर पर फैक्ट्री परिसर से उठाकर बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी. उनकी बॉडी को नग्न अवस्था में पेड़ से लटकाकर आग लगा दी गई थी.

बांग्लादेश में हिंसक भीड़ के हमले में मारे गए हिंदू अल्पसंख्यक दीपू चंद्र दास के परिवार को सरकारी आर्थिक मदद मिली है. सोमवार, 16 फरवरी को बांग्लादेश सरकार ने दीपू दास के परिवार को 25 लाख टका (करीब 18.54 लाख रुपये) दिए. यह मदद बचत प्रमाणपत्र (सेविंग्स सर्टिफिकेट) के रूप में दी गई. पूर्व मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के कार्यालय की तरफ से यह प्रमाणपत्र पीड़िता परिवार को सौंपा गया.
सोमवार को दोपहर बाद ढाका विश्वविद्यालय के जगन्नाथ हॉल में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई. बांग्लादेशी अखबार ‘प्रोथोम आलो’ की रिपोर्ट के मुताबिक, इसी कार्यक्रम में दीपू दास के परिवार के सदस्यों ने सरकारी मदद की पुष्टि की. इसके लिए उन्होंने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार का आभार जताया.
बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के लिए काम करने वाले संगठन बांग्लादेश सम्मिलित सनातनी जागरण जोत ने यह प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. इस दौरान दीपू की मां शेफाली रानी दास ने कहा,
उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि दीपू की पत्नी को नौकरी दी जाए. अपने बेटे के लिए इंसाफ की मांग करते हुए शेफाली रानी ने कहा कि हत्या में शामिल सभी आरोपियों की अब तक गिरफ्तारी नहीं हुई है. उन्होंने बताया कि परिवार मुकदमे में जो हो रहा है, उससे संतुष्ट नहीं है. दीपू के पिता रोबी लाल चंद्र दास ने कहा,
दीपू दास की पत्नी मेघना रबीदास ने भी कहा,
परिवार ने आर्थिक सहायता मिलने के बावजूद साफ किया कि उनकी सबसे बड़ी मांग अब भी न्याय है. पीड़ित परिवार को सरकारी मुआवजा मिला, तो संगठन के संयुक्त प्रवक्ता कुशल बरन चक्रवर्ती ने कहा,
बीते साल 18 दिसंबर को मैमनसिंह जिले के भालुका में दीपू चंद्र दास की कथित तौर पर फैक्ट्री परिसर से उठाकर बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी. इसके बाद उनके शव को ढाका–मैमनसिंह हाईवे के डिवाइडर पर एक पेड़ से नग्न अवस्था में लटकाकर आग लगा दी गई थी. पायनियर्स निटवेयर्स (बीडी) लिमिटेड में काम करने वाले दीपू मैमनसिंह के ताराकांदा उपजिला के मोकामियाकांदा गांव के रहने वाले थे.
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