अपना पड़ोसी बांग्लादेश इस्लामिक नेशन है. 1988 में बांग्लादेश में आठवां संशोधनबिल पास हुआ था, जिसके बाद से इस्लाम को राजकीय धर्म का दर्जा दिया गया था. यानीबांग्लादेश बना मुस्लिम मुल्क. उस तरफ के सेक्यूलर नाखुश हो गए. अपील कर कहा किबांग्लादेश इस्लामिक नहीं, सेक्यूलर राष्ट्र बने. लेकिन 28 साल बाद अब कोर्ट नेसेक्यूलरों की याचिका खारिज कर कर दी है. कोर्ट ने कहा- बांग्लादेश इस्लामिक नेशनबना रहेगा, याचिकाकर्ताओं को अपील करने का कोई अधिकार नहीं है. अच्छा इसमें लोचा येहै कि साल 2011 में बांग्लादेशी संसद में एक काम हुआ. हुआ यूं कि धर्मनिरपेक्षता कोराष्ट्रीय नीति के तहत फिर से लागू किए जाने के लिए संविधान में संशोधन किया गया.ऐसे में अगर बांग्लादेश इस्लामिक नेशन बना रहता है तो 2011 के संशोधन का कोई मतलबनहीं रह जाता है. बांग्लादेश में सुप्रीम कोर्ट के हिंदू वकील समेंद्र नाथ गोस्वामीने इस बारे में अपील की. बांग्लादेश की बड़ी पार्टी जमात-ए-इस्लामी याचिका परकोर्ट की सुनवाई को लेकर हड़ताल भी कर चुकी है. बता दें बांग्लादेश में मुस्लिमोंकी आबादी करीब 90 फीसदी है. ये फैसला कोर्ट की जिस पीठ ने सुनाया है, उसका गठनसुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेंद्र कुमार सिन्हा के आदेश के बाद हुआ था.