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बच्चे ने दूसरे बच्चे से पूछा, मुस्लिम हो? 'न' कहने पर गला काट दिया

ढाका में हुए आतंकी हमले की बच्चे कर रहे हैं नकल. वायरल हो रहा है वीडियो.

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7 जुलाई 2016 (अपडेटेड: 7 जुलाई 2016, 02:10 AM IST)
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फोटो - thelallantop
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पाकिस्तान की मशहूर शायरा हैं, जेहरा निगाह. 13 साल के अफगानी बच्चे पर लिखी जेहरा की नज्म 'गुल बादशाह' चर्चित रही है. ये एक ऐसे बच्चे की कहानी है, जिसने दहशतगर्दों के चलते पहले अपने दादा को खोया, फिर मां को और फिर बाप को, जो मुजाहिद था. इसमें भी चौंकाने वाली बात ये कि उसके बाप को उसके चाचा ने ही मारा, क्योंकि वो शुमाली मुजाहिद था. और अब अंत में गुल बादशाह अपनी छोटी बहन को खोकर खुद छोटा मुजाहिद बन गया है. जो वहां अकेला भटक रहा है. ये कविता कुछ यूं ख़त्म होती है-

मैं दहकते पहाड़ों में तनहा अपने तरके की बंदूक थामे खड़ा हूं तमाशा-ए-एहल-ए-करम देखता था तमाशा-ए-एहल-ए-करम देखता हूं

कविता तो यहां खत्म हो जाती है पर पीछे छोड़ जाती है ढेर सारे सवाल. अफगानिस्तान में आतंकवाद की हालत पर, खून-खराबे के बीच पलते बच्चों की बेबसी पर. हम सोचते हैं जब बचपन तक आतंक का प्रभाव चला जाता है, तब हमारे भविष्य का तबाह होना तय है. ऐसी ही एक खबर बांग्लादेश से भी आई है. पिछले दो दिनों से एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में कुछ बांग्लादेशी बच्चे ढाका में हुए आतंकी हमले की नकल करते दिख रहे हैं. इस्तांबुल और ओरलैंडो के नाइटक्लब के विस्फोट को गुजरे महीना नहीं हुआ था कि आतंकियों ने ढाका में धमाके कर इंसानियत को फिर शर्मिंदा किया. बहरहाल इस वायरल हो रहे वीडियो में बिल्कुल उसी तरह से आतंकवादी बने बच्चे, बंधक बने बच्चों से आतंकियों की तरह ही पूछ रहे हैं, तुम मुस्लिम हो और उनका गला काट दे रहे हैं. जबकि ये एक खेल ही है फिर भी इसमें दिखता है कि इन चीजों ने बच्चों पर कैसे असर किया है? जो वो आंतकवादी हमले को नाटक के जैसे खेल रहे हैं. वीडियो में एक लड़की भी नजर आती है जो बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना बनी हुई है. उससे सुरक्षाकर्मी बना एक लड़का पूछता है. इस अटैक का बोझ किसके सर डालना है? अब आतंकवादी बने लड़के पहले बंधक बनाए लड़कों को मारते हैं फिर खुद को मार लेते हैं. यानी कर लेते हैं सुसाइड. इतना सब होने के बाद आर्मी एक्टिव मोड में आती है और आतंकियों को मारने का क्रेडिट ले लेती है. यानी एक ऐसी चीज का क्रेडिट जो उसने कभी किया ही नहीं. यूं इस समझ के साथ बच्चो का खेलना, मन में डर भर देता है. बांग्लादेश के आवाम को अब जाग जाना चाहिए. बांग्लादेश का बचपन खतरे में है, याद रहे यही बचपन बांग्लादेश का भविष्य भी है. https://www.youtube.com/watch?v=FKumFgmuZkg

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