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PFI बैन पर आए विपक्षी नेताओं के बयान, ओवैसी ने गलत बताया, बाकी बोले- RSS को भी बैन करो

केंद्र सरकार ने 27 सितंबर को PFI पर बैन लगा दिया. विपक्षी नेताओं ने कहा कि RSS भी सांप्रदायिकता फैलाता है, उसे भी बैन करना चाहिए.

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ओवैसी ने PFI के बैन पर आपत्ति जताई है. (फोटो - PTI/ANI)
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सोम शेखर
28 सितंबर 2022 (अपडेटेड: 28 सितंबर 2022, 06:41 PM IST)
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केंद्र सरकार ने 27 सितंबर को इस्लामिक संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) को पांच साल के लिए बैन कर दिया. गृह मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक़, PFI के साथ उसके अन्य 8 सहयोगी संगठनों पर भी बैन लगाया गया है. इसके बाद से ही मुख्यधारा मीडिया और सोशल मीडिया पर बहसें चल रही हैं. एक तरफ़, सरकार के पक्षकार क़दम को क्रांतिकारी बता रहे हैं. वहीं, विपक्षी पार्टियां कह रही हैं कि अगर कट्टरपंथ के नाम पर PFI को बैन किया है, तो दक्षिणपंथी संगठन RSS को भी बैन किया जाना चाहिए. 

RLD प्रमुख लालू यादव ने भी ठीक यही बात कही. ट्वीट किया,

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केंद्र सरकार के इस क़दम पर हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने ट्वीट किया. कहा,

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केरल के कांग्रेस सांसद ने यही कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया एक जैसे हैं. और, RSS 'हिंदू सांप्रदायिकता' फैलाता है, इसलिए उस पर भी प्रतिबंध लगाने की मांग की. के सुरेश ने कहा,

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वामपंथी पार्टी CPI(M) ने भी यही बात पूछी. CPI(M) पॉलिट ब्यूरो ने आधिकारिक बयान भी जारी किया. पूछा,

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PFI के अलावा रिहैब इंडिया फाउंडेशन (RIF), कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI), ऑल इंडिया इमाम्स काउंसिल (AIIC), नेशनल कन्फिडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन (NCHRO), नेशनल वीमन्स फ्रंट (NWF), जूनियर फ्रंट (JF), एम्पावर इंडिया फाउंडेशन (EIF) और रिहैब फाउंडेशन (केरल) पर भी प्रतिबंध लगाया गया है.

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