इस वजह से पतंग के कन्ने से डरता है पाकिस्तान!
और ये वजह आपकी हमारी अम्मी भी जानती हैं. बचपन में समझाया था कई बार हमें...
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ढील देदे रे देदे रे भइया. इस पतंग को ढील दे. जैसी ही जान लेने पर आए. इस पतंग पर बैन लगा दे.बैन तो समझते ही होंगे आप. बीते दिनों से कई बार बैन सुना होगा. पर सोचिए, मौसमों पर बैन लग जाए तो क्या होगा. घबराइए मत. इस बैन का इंडिया से नहीं, प्यारे पाकिस्तान से लेना-देना है. बसंत पंचमी मूड से निकलिए. और सुनिए एक ऐसा सच, जिसे जानकर आप कहेंगे-ओह तेरी, यू के बवाल है!
पाकिस्तान का प्रांत है पंजाब. वहां है लाहौर. यहां एक चांदनी चौक जैसी जगह है. तक्साली गेट. खूब भीड़-भाड़ वाला इलाका. रौनक ठीक वैसी जैसी दिल्ली के जामा मस्जिद के पास रहती है. लोग भी वैसे ही. हंसी खुशी सारे जश्न मनाने वाले. जब सब कुछ इत्ता मिल रहा है तो सरकारें कैसे अलग हो सकती हैं.

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हां तो खबर ये है कि लाहौर में बसंत बैन है. यूं तो सालों पहले हर साल बसंत फेस्टिवल मनाया जाता था. सालों से पतंगबाजी होती थी खूब तक्साली गेट पर. लोग खुशी खुशी बसंत फेस्ट मनाते. 'काटी बो, काय पोचे' की आवाज से भरा रहता था तक्साली गेट वाला इलाका. फिर आया एक कानून और लग गया बसंत फेस्टिवल और पतंगबाजी पर पूरी तरह बैन. साल था 2007. पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने पतंगबाजी पर पूरी तरह बैन लगा दिया. वजह कांच और खतरनाक चीजों का इस्तेमाल करके बनाया कैड़ा मांजा है. वही जो छू जाए तो हाथ, गर्दन कट जाती है. खून भी निकल आता है.

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पतंगबाजी से क्यों चिढ़े? जिंदगी मौत न बन जाए संभालो यारो, वाली वजह है. पाकिस्तान के पंजाब में जब लोग पतंग उड़ाते. तो मंजा या पतंग कटकर सड़क पर ही आते. अब वहां धूम मचाले स्पीड में लोग बाइक चला रहे होते हैं. मंजा अचानक आंखों के सामने आता. बैलेंस बिगड़ता. और हो जाता हादसा. बताते हैं उस तरफ इस वजह से कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी. बस तो सरकार ने लगा दिया बैन. ये मांजा इत्ता खतरनाक होता कि लोगों के लगता को बस घायल कर देता. कुछ की जानें भी गई थीं. इसके अलावा, कुछ कट्टरपंथियों की सुलगी रहती थी. कहते मुस्लिमों बसंत न मनाओ. हराम है. याद रहे कि कठमुल्लाओं का फेवरेट शब्द 'हराम' है.

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बैन से असर? बसंत पर काइट बैन से खुशियों में खलल तो पड़ा ही. लेकिन जेब पर भी फर्क पड़ा है उधर, लोगों की. पतंग बनाने के धंधे में हजारों लोग लगे हुए थे. अब जब लाहौर में पतंगबाजी ही नहीं होती तो लोगों के काम धंधे पर भी फर्क पड़ा है. रुपये, पइसे का नुकसानहो रहा है. लोगों की रोजी-रोटी छिनी है. लोगों का कहना है कि अगर पतंगबाजी की वजह से हादसे होते हैं तो पक्का इस पर बैन लगना चाहिए. लेकिन हादसे तो ट्रैफिक की वजह से होते हैं. ऐसे में क्या ट्रैफिक पर बैन लगा देना चाहिए? नहीं न. तो फिर पतंगबाजी और बसंत से ऐसी दुश्मनी क्यों?

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पतंगबाजी के चक्कर में 2014 में हुई गिरफ्तारियां अब सरकार इत्ती सख्त है पतंगबाजी को लेकर. कि साल 2014 में फैसलाबाद में दर्जनों पतंगबाजों को लपक लिया. हजारों पतंग जब्त कीं. पुलिस बोली- ये क्या गैरकानूनी काम हो रिया है इधर. बंद करो पतंगबाजी.
बैन गया तेल लेने.. पाकिस्तानी पंजाब का शहर है रावलपिंडी. यहां भी पतंग उड़ाने पर बैन है. पर जमाने और सरकार का हर कोई लोड नहीं लेता. साल 2015 में रावलपिंडी में बैन के बाद भी लोगों ने जमकर पतंग उड़ाई.

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सब कुछ गैर कानूनी हो रहा था तो भाईजी यकीन मानो एक-एक पतंग हजार रुपये की बिकी है. बैन के बाद हुई इस पतंगबाजी के बाद पुलिस ने कहा, 60 लोग पतंग के मांजे से घायल हो गए. पुलिस ने 60 लोगों को अरेस्ट किया.

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लॉ पढ़े हो कि नहीं.. बिलकुल पढ़े हैं. पाकिस्तान में पंतगबाजी को लेकर कानून है 'द पंजाब प्रोहिबिशन ऑफ काइट फ्लाइंग ऑर्डिनेंस- 2001' कानून के मुताबिक, पंजाब में कहीं भी किसी भी तरह की डोर, मांजे, धागे, मेटेलिक वायर, टंडी या किसी भी तरह से पतंग उड़ाना सख्त मना है. ताकि इंसानी जिंदगी या प्रॉपर्टी का नुकसान न हो. शार्प मांजे के लिए कानून में स्पेशली मेंशन करते हुए मना किया गया है. इसके बाद भी किसी ने पतंग उड़ाई तो सुन ले, गैर जमानती वॉरेंट निकलेगा गुरु. अच्छा बैन सिर्फ इत्ता नहीं है. पतंग बनाते, बेचते, स्टोर करते कोई पकड़ा गया तो उसको भी बराबर सजा मिलेगी.


