सरकारी बैंकों में गजब खेल चल रहा है! एक तरफ तो बैंक आर्थिक तंगी का हवाला दे रहेहैं और सरकार से पैसा ऐंठ रहे हैं, दूसरी ओर, शातिर कर्जदारों के कर्जे बट्टे खातेमें डाल रहे हैं. बट्टे खाते में एनपीए कैटेगरी का वो कर्ज डाला जाता है, जिसकीवसूली संभव नहीं. बीते 10 में बैंकों ने 7,00,000 (सात लाख) करोड़ रुपए का कर्जबट्टे खाते में डाला है. चालू साल में ही दिसंबर, 2018 तक बैंकों ने 1,56,702 करोड़रुपए बट्टे खाते में डाले. इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के मुताबिक बट्टे खाते मेंकरीब 80 फीसदी रकम बीते पांच साल के दौरान डाली गई. अप्रैल, 2014 से 5,55,603 करोड़रुपए का कर्जा बट्टे खाते में डाला गया. ये खुलासा अखबार को मिले रिज़र्व बैंक केआंकड़ों से हुआ है.किस तरह बढ़ता जा रहा है कर्ज डूबने का सिलसिला?इंडियन एक्सप्रेस में छपी जॉर्ज मैथ्यू की रिपोर्ट के मुताबिकसाल 2016-17 में 1,08,374 करोड़ रुपए. 2017-18 में 1,61,328 करोड़ और 2018-19 केपहले छह महीने के दौरान 82,799 करोड़ रुपए बट्टे खाते में डाले गए. अक्टूबर सेदिसंबर 2018 के बीच यानी सिर्फ तीन महीने के दौरान 64,000 करोड़ रुपए बट्टे खातेयानी राइट ऑफ किए गए.बैंकों का पैसा डूब रहा. सांकेतिक तस्वीर, इंडिया टुडे.बैंक किसका कर्ज माफ कर रहे? अखबार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि बैंक किनकर्जदारों का कितना पैसा बट्टे खाते में डाल रहे हैं, इसका खुलासा नहीं हो पा रहाहै. न तो बैंक और न ही रिज़र्व बैंक. इस मसले पर मुंह खोलने को तैयार नहीं हैं. औरयही शक की बड़ी वजह बनता जा रहा है. बैंक ये दावे जरूर करते हैं कि वे फंसे हुएकर्ज की वसूली के लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं. पर ऐसे कर्ज की वसूली साल में 15-20फीसदी से ज्यादा नहीं है. इसकी तुलना में बट्टे खाते में डाले जाने वाला लोन बहुतज्यादा है. इसकी भरपाई न तो लोन की वसूली से हो सकती है और न बैंकों को मिल रहीसरकारी मदद से. रिज़र्व बैंक ने हाल में अपने एक सर्कुलर के जरिए कहा था कि, किसीभी कर्ज को बट्टे खाते में डालने से पहले बैंकों को उस लोन की वसूली के लिए हरसंभवकोशिश करनी चाहिए. ऐसा देखा जा रहा है कि कुछ बैंक कुछ बट्टे खातों को तकनीकी राइटऑफ कैटेगरी में डाल रहे हैं, इससे वसूली की संभावनाएं कम होती हैं. यही रिज़र्वबैंक अपने एक दूसरे सर्कुलर में इस पूरी प्रक्रिया को सामान्य बताता है. रिजर्वबैंक के बयान के मुताबिक- 'एनपीए यानी नॉन परफॉर्मिंग असेट्स को तकनीकी बट्टे खातेमें डालना सामान्य है. इसे बैंकों की बैलेंस शीट दुरुस्त करने का तरीका माना जासकता है. तकनीकी राइट ऑफ किए गए लोन के ब्योरे बैंकों के बही खातों से हटा दिए जातेहैं. इसका मतलब ये नहीं होता कि बैंक अब इस कर्ज की वसूली नहीं करेगा. जब इस लोन कीवसूली हो जाती है, तो उसे फिर से प्रॉफिट और लॉस अकाउंट में दर्ज कर लिया जाता है.'रिजर्व बैंक के एक पूर्व अधिकारी के मुताबिक बैंकों को बकाए को बट्टे खाते मेंडालने से पहले सौ बार सोचना चाहिए. इसके लिए एक नीति हो, जिसका बैंक पालन करें. लोनकी वसूली के लिए पूरे प्रयास किए जाएं. राइट ऑफ किेए जाने वाले लोन की छंटनी जरूरीहै.बट्टे खाते पर बैंकों का बचाव करते रहे हैं वित्तमंत्री अरुण जेटली. फाइल फोटो.भाजपा-कांग्रेस इस मुद्दे पर पहले भी टकराती रही हैं इससे पहले बड़े पूंजीपतियों कापैसा बट्टा खाते में डालने को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप चलतेरहे हैं. अक्टूबर, 2018 में कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने आरोप लगाया था कि- नरेंद्र मोदी सरकार पर कर्ज की अदायगी नहीं करने वाले बैंक डिफाल्टर्स पर 'कृपा'कर रही है. इस सरकार ने गत चार वर्षों में तीन लाख करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज बट्टेखाते में डाल दिया. सरकारी बैंकों में जमा जनता के पैसे से 3.16 लाख करोड़ रुपए काकर्ज बट्टे खाते में डाल दिया. जबकि 14 फीसदी कर की वसूली हो सकी और डिफाल्टर्स कोबचने का अवसर मिला.दूसरी ओर, वित्तमंत्री अरुण जेटली ने इन आरोपों पर बैंकों का बचाव करते हुए एकफेसबुक पोस्ट में लिखा था कि कर्ज को बट्टा खाते में डालने का मतलब ये नहीं है किकर्ज की वसूली छोड़ दी गई है. ये बैंकिंग कारोबार में एक सामान्य प्रक्रिया है.इससे बैंकों का बही-खाता साफ-सुथरा होता है. जेटली ने लिखा कि बैंकों की ओर से'तकनीकी रूप से कर्ज को राइट ऑफ' करने की कार्रवाई भारतीय रिजर्व बैंक केदिशानिर्देशों के अनुसार की जाती है. राइट ऑफ करने का मतलब कर्ज माफ करना नहीं होताहै. बैंक पूरी तत्परता से कर्ज वसूली का काम करते रहते हैं.' इससे पहले कांग्रेसअध्यक्ष राहुल गांधी ने भी एक रिपोर्ट के आधार पर सरकार को घेरते हुए कहा था किनोटंबदी से काला धन सफेद हुआ. 3.16 लाख करोड़ रुपए का कर्ज राइट ऑफ हो गया.--------------------------------------------------------------------------------वीडियोः सुप्रीम कोर्ट में इलेक्टोरल बॉन्ड पर मोदी सरकार के दिए तर्क गले नहींउतरे |दी लल्लनटॉप शो| Episode 194