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चीन-ताइवान नहीं, इन देशों ने एक दूसरे के सैनिक मार पहाड़ी कब्जा ली

अजरबैजान और अर्मेनिया के बीच एक बार फिर से तनाव की स्थिति बन गई है.

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4 अगस्त 2022 (अपडेटेड: 4 अगस्त 2022, 11:40 AM IST)
Azerbaizan Armenia
साल 2020 में नागोर्नो काराबाख इलाके में मौजूद अर्मेनिया के सैनिक. (फोटो: AP)
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अजरबैजान (Azerbaizan) ने कहा है कि उसने विवादित नागोर्नो-काराबाख क्षेत्र (Nagorno Karabakh) के पास अर्मेनिया (Armenia) के हमले का करारा जवाब दिया. अजरबैजान की तरफ से ये भी कहा गया कि उसने नागोर्नो-काराबाख की कई पहाड़ियों पर भी कब्जा कर लिया है. बतौर अजरबैजान, तनातनी की शुरुआत तब हुई जब अर्मेनिया के सैनिकों ने विवादित क्षेत्र में उसके एक सैनिक को मार दिया. इधर अर्मेनिया के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि अजरबैजान के हमले में उसके दो सैनिकों की मौत हुई है. वहीं इलाके में तैनात रूस की शांति सेना ने अजरबैजान की तरफ से तीन बार संघर्ष विराम उल्लंघन की जानकारी दी है.

दरअसल, 90 के दशक में सोवियत संघ के विघटन के बाद नस्लीय लड़ाई में नागोर्नो-काराबाख इलाका अर्मेनिया के समर्थन से अजरबैजान से अलग हो गया था. साल 2020 में अजरबैजान ने इस इलाके पर फिर से नियंत्रण हासिल कर लिया था. इसके बाद इलाके में रूस के सैनिक तैनात किए गए थे और सीज फायर एग्रीमेंट हुआ था. हालांकि, दोनों पक्ष समय-समय पर एक दूसरे पर इस सीज फायर के उल्लंघन का आरोप लगाते रहे हैं.

Azerbaizan- Armenia के बीच तनाव

अजरबैजान के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि अर्मेनिया ने संघर्ष विराम का उल्लंघन कर एक सैनिक को मार दिया और साथ ही साथ विवादित इलाके में एक पहाड़ी पर कब्जा करने की कोशिश की. जवाबी कार्रवाई में हमले में शामिल अर्मेनिया के सैनिकों को मार गिराया गया. इधर अर्मेनिया ने कहा कि संघर्ष विराम का उल्लंघन अजरबैजान ने किया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अजरबैजान के आक्रामक रवैये का संज्ञान लेना चाहिए और इसपर रोक लगाने के लिए कदम उठाने चाहिए.

इधर यूरोपियन यूनियन ने इस तनाव पर बयान जारी करते हुए कहा कि दोनों पक्षों को सीज फायर एग्रीमेंट का सम्मान करना चाहिए. वहीं अमेरिका की तरफ से भी तनाव पर चिंता जताई गई और स्थिति को सामान्य करने के लिए कदम उठाने की अपील की गई. रूस की तरफ से कहा गया कि विवादित इलाके में हालात अस्थिर हैं.

अजरबैजान और अर्मेनिया पड़ोसी देश हैं. दोनों ही सोवियत संघ का हिस्सा रह चुके हैं. ये दोनों देश यूरोप के बिल्कुल नजदीक हैं और ईरान और तुर्की के बीच आते हैं.  

वीडियो- अजरबैजान का ये ‘यूनेस्को धरोहर’ क्या हिंदुओं का मंदिर था?

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