आज़म आप PM नहीं बन सकते, दूसरा ऑप्शन खुला है
आज़म ने कहा पीएम बना दो, गलत कहूं तो पागलखाने भेज दो, लल्लन ने जवाब दिया है.
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आज़म के खिलाफ एक दिन में ही 8 FIR दर्ज की गयी है.
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आज़म खान ने बयान दिया है. अभी मत हंसिए. बयान पढ़िए. कहा है,
ये आपकी ही बातें हैं, इनमें से किसे सही और किसे गलत ठहराना है, पब्लिक तय कर लेगी. आपकी पार्टी बूड़ रही है. आपके नेता खुद पीएम बनने के लिए मुंह फरगाए बैठे हैं. अपनी इच्छाएं एक लेटर में लिखकर उनको भेज दीजिए. तो हम आपको सीरियसली लेंगे. वरना दूसरा विकल्प तो खुला ही है. हम क्या कहें.
‘काबिलियत का पता काम कराने से चलता है. पीएम बना दो. दो साल के भीतर भारत को अमेरिका से ताकतवर न बना दूं तो कहना. मेरी बातें गलत लगती हैं तो पागलखाने भिजवा दो.’अब आप हंस सकते हैं. ये बात उनने दोबारा कही है. पहले कहा था कि 'मुझे पीएम बनाओ, बहुत अच्छा पीएम बनूंगा. जब मुसलमान राष्ट्रपति बन सकता है तो पीएम क्यों नहीं.' लेकिन कोई सिर्फ मुसलमान होने से ही राष्ट्रपति नहीं हो जाता. जम्हूरियत की यह सुंदर बात. है ना? अगर आपको लगता है कि आपके महजब की बुनियाद पर लोग आपको पीएम बनाएंगे तो क्लास मॉनिटर बनने के लिए भी आपकी समझ उथली है. यूपी के नगर विकास और संसदीय मंत्री हैं आप, क्योंकि चुनकर आए हैं, इसलिए नहीं कि आप मुसलमान हैं. ये बात थोड़ी लेक्चरवादी हो गई, इसलिए अब टेक्निकल बात करते हैं. प्रधानमंत्री होने के लिए सांसद होना पड़ता है और आप वो कद्दू हैं नहीं. आपकी समाजवादी पार्टी बीते लोकसभा चुनाव में किसी तरह 5 सीटें बचा पाई है. इस गति से चलेंगे तो PM बनने के लिए जरूरी सीटें निकालने में मोटा-मोटी 57 साल लग जाने हैं. राज्यसभा के लिए सीटें आपके यहां आरक्षित होती हैं, आप जानते हैं.
और फिर भी आप कह रहे हैं कि हमें पीएम बना दो. कह भी किस से रहे हैं, सपा कार्यकर्ताओं से. भई पांचवी का बच्चा भी जानता है कि आगे चलकर कभी सपा से कोई पीएम कैंडिडेट बना तो वह आपके ‘माननीय’ मुलायम सिंह होंगे. फिर आपके अरमान घड़े के बाहर क्यों फुदक रहे हैं? मतलब आप मान रहे हैं कि आपकी हैसियत ‘नेताजी’ मुलायम सिंह यादव से ज्यादा बड़ी हो गई है?ऐसा है तो खुलकर कहें. या फिर यह मान लिया जाए कि पार्टी में दो-ध्रुव बनाए रखने से आपकी पॉलिटिक्स मजबूत होती है. ताकि मुसलमानों में अपने मजबूत जनाधार का हवाला देकर गाहे-बगाहे पार्टी आलाकमान को ब्लैकमेल कर सकें. अपनी शर्तें मनवा सकें.
आपने ये भी कहा कि अगर मेरी बातें गलत लगती हैं तो पागलखाने भिजवा दो. आपको आपकी कुछ बातें याद दिलाते हैं.
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ये आपकी ही बातें हैं, इनमें से किसे सही और किसे गलत ठहराना है, पब्लिक तय कर लेगी. आपकी पार्टी बूड़ रही है. आपके नेता खुद पीएम बनने के लिए मुंह फरगाए बैठे हैं. अपनी इच्छाएं एक लेटर में लिखकर उनको भेज दीजिए. तो हम आपको सीरियसली लेंगे. वरना दूसरा विकल्प तो खुला ही है. हम क्या कहें.

