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सिर्फ शक पर मुस्लिम को 'विदेशी' घोषित किया था, SC ने ऐसा फैसला दिया कि अब किसी के साथ ये नहीं होगा

Supreme Court की बेंच ने 11 जुलाई को उस आकस्मिक तरीके पर निराशा जताई जिसमें अधिकारियों ने बिना किसी मटेरियल के केवल शक के आधार पर मोहम्मद रहीम अली के खिलाफ कार्यवाही शुरू कर दी थी.

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authorities cant accuse anyone of being foreigners without suspicion information says supreme court
सुप्रीम कोर्ट ने गुवाहाटी हाई कोर्ट के फैसले को पलटा. (फाइल फोटो- आजतक)
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ज्योति जोशी
12 जुलाई 2024 (पब्लिश्ड: 04:11 PM IST)
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भारतीय नागरिकता की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है. कहा है कि कोई अधिकारी बिना सोचे-समझे लोगों पर विदेशी होने का आरोप नहीं लगा सकते हैं (Supreme Court Indian Citizenship Suspicion). साथ ही बताया कि शक से जुड़ी जानकारी के बिना किसी की राष्ट्रीयता की जांच शुरू नहीं की जा सकती.

दरअसल, 2012 में असम में नलबाड़ी की फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल ने अपीलकर्ता मोहम्मद रहीम अली को विदेशी घोषित कर दिया था. इसके बाद 2015 में गुवाहाटी हाई कोर्ट ने भी इसकी पुष्टि कर दी. अब सुप्रीम कोर्ट ने गुवाहाटी हाई कोर्ट के उस फैसले को पलट दिया है.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की बेंच ने 11 जुलाई को उस ‘आकस्मिक तरीके’ पर निराशा जताई जिसमें अधिकारियों ने बिना किसी मटेरियल के केवल शक के आधार पर कार्यवाही शुरू कर दी थी. कोर्ट ने कहा,

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बता दें, विदेशी अधिनियम 1946 की धारा 9 के मुताबिक, Burden of Proof उस व्यक्ति पर होता है जिसके खिलाफ कार्रवाई की जाती है. इसको लेकर जस्टिस अमानुल्लाह ने फैसले में कहा,

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कोर्ट ने साफ किया कि ऐसे आरोपों का सख्त सबूत शुरुआती चरण में ही आरोपी व्यक्ति को देना होगा. आगे कहा गया,

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ये भी पढ़ें- मुस्लिम महिलाएं भी पति से मांग सकती हैं गुजारा भत्ता, सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

अदालत ने निर्देश दिया कि इस फैसले की एक कॉपी 1964 के फॉरेनर्स ऑर्डर, 1964 के तहत बने सभी ट्रिब्यूनल्स को भेजी जाए.

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