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सोशल मीडिया कंपनियां पत्रकारों को देंगी पैसा, ऑस्ट्रेलिया की सरकार का बड़ा फैसला

सरकार का कहना है कि पत्रकार अपनी मेहनत से खबरें जुटाते हैं, जिसके बाद खबर सोशल मीडिया पर वायरल होती है. उसी खबर के साथ विज्ञापन दिखाकर गूगल, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पैसे कमाते हैं. इससे होता ये है कि पत्रकारों को अपनी मेहनत के पूरे पैसे नहीं मिलते और सोशल मीडिया कंपनियों को बिना कुछ किए फायदा हो जाता है.

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29 अप्रैल 2026 (पब्लिश्ड: 07:57 PM IST)
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ऑस्ट्रेलिया की सरकार सोशल मीडिया कंपनियों से पैसे लेकर मीडिया हाउसेज में बांटने की तैयारी कर रही है. एक नया कानून लाया जा रहा है, जिसका नाम है न्यूज बार्गेनिंग इंसेंटिव (NBI). इसके तहत कंपनियों को या तो सीधे मीडिया हाउस से डील करनी होगी, नहीं तो सरकार टैक्स के जरिए कंपनियों से पैसे लेकर मीडिया वालों में बांट देगी. 

सरकार का कहना है कि पत्रकार अपनी मेहनत से खबरें जुटाते हैं, जिसके बाद खबर सोशल मीडिया पर वायरल होती है. उसी खबर के साथ विज्ञापन दिखाकर गूगल, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पैसे कमाते हैं. इससे होता ये है कि पत्रकारों को अपनी मेहनत के पूरे पैसे नहीं मिलते और सोशल मीडिया कंपनियों को बिना कुछ किए फायदा हो जाता है.

सोशल मीडिया कंपनियों का पैसा मीडिया को मिलेगा

NBI के तहत सभी सोशल मीडिया कंपनियों को छोटे-बड़े हर ऑस्ट्रेलियाई मीडिया आउटलेट से बात करके ये तय करना होगा कि वो न्यूज हाउस को कितना पैसा देंगे, उन सभी खबरों के लिए जो सोशल मीडिया पर लोग देखते हैं. अगर उन्होंने ऐसा नहीं किया तो सरकार खुद 2.25% का लोकल रेवेन्यू टैक्स उन पर लगा देगी.

मीडिया हाउस में पैसे बांटने का तरीका भी सरकार ने बताया है. जिस मीडिया हाउस में जितने लोग काम करते हैं, उसके हिसाब से उन्हें हिस्सा दिया जाएगा.

पहले भी आया ऐसा कानून

इससे पहले भी 2021 में तब की लिबरल पार्टी की सरकार ऐसा ही कानून लेकर आई थी, जिसका नाम था न्यूज मीडिया एंड डिजिटल प्लेटफॉर्म्स मेंडेटरी बार्गेनिंग कोड एक्ट 2021. इस कानून में भी यही कहा गया था कि सोशल मीडिया कंपनियों को मीडिया हाउस से डील करनी होगी. ऐसा नहीं करने पर प्लेटफॉर्म को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. हालांकि उस बिल में टैक्स का कोई नियम नहीं था. तब इस कानून को कंपनियों के विरोध का सामना करना पड़ा था.

कैसे होती है सोशल मीडिया पर कमाई?

हर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अलग-अलग तरीके से क्रिएटर्स को पैसे कमाने का मौका देता है. जैसे इंस्टाग्राम पर सब्सक्रिप्शन से, फेसबुक और यूट्यूब पर व्यूज के हिसाब से पैसे दिए जाते हैं. इसके साथ ही स्पॉन्सर्स के जरिए भी पैसे कमाए जा सकते हैं. लेकिन यहां दिक्कत ये है कि व्यूज के हिसाब से दिए जाने वाले पैसों पर सिर्फ प्लेटफॉर्म का कंट्रोल होता है. किसे कितना पैसा मिलेगा, ये सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ही तय करता है, ना कि क्रिएटर. कंपनियां क्रिएटर्स को छोटा हिस्सा देती हैं और ज्यादा हिस्सा खुद रखती हैं.

कंपनियों ने क्या कहा?

2021 में भी जब ये कानून आया था तो सोशल मीडिया कंपनियों ने इसका कड़ा विरोध किया था. फेसबुक ने अपने प्लेटफॉर्म पर न्यूज पेज बंद भी कर दिए थे. गूगल ने भी धमकी दी थी कि अगर सरकार ने नियम नहीं हटाए तो गूगल अपना सर्च फंक्शन ऑस्ट्रेलिया में बंद कर देगा. बाद में कुछ बदलावों के साथ बिल को स्वीकार कर लिया गया और कंपनियों में डील भी हुई. उस समय करीब 200 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के समझौते हुए थे, जिससे मीडिया आउटलेट्स को फायदा हुआ.

अब 2026 में भी सोशल मीडिया कंपनियों ने इस नए कानून का विरोध किया है. उनका कहना है कि सरकार उन पर कानून थोप रही है. साथ ही कुछ कॉन्ट्रैक्ट अभी भी जारी हैं, तो नए कानून की क्या जरूरत है. गूगल ने ये भी कहा कि इस कानून में AI प्लेटफॉर्म्स को क्यों नहीं जोड़ा गया.

क्यों लाया गया नया कानून?

पुराने कानून के होते हुए भी नया कानून लाया जा रहा है. इसका कारण कंपनियों द्वारा पुराने नियमों का पालन न करना है. हुआ ये कि 2022 में ऑस्ट्रेलिया की सरकार बदली. लिबरल्स की जगह नई लेबर सरकार आई और एंथनी अल्बनीज़ नए प्रधानमंत्री बने.

सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन साल 2024 में मेटा ने घोषणा कर दी कि वो न्यूज आउटलेट्स से की गई 70 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (473 करोड़ रुपये) की अपनी सभी डील्स को रिन्यू नहीं करेगी. कंपनी का कहना था कि लोग खबरों के लिए उनके प्लेटफॉर्म्स पर नहीं आते. इसके बाद मीडिया कंपनियों में घाटे का डर बढ़ गया. तब सरकार को लगा कि क्योंकि पिछले नियम में कोई सख्त प्रावधान नहीं है, इसलिए नया कानून लाया जाए.

सरकार के क्या हैं तर्क?

ऑस्ट्रेलियाई सरकार का कहना है कि लोकतंत्र के लिए अच्छे पत्रकारों का होना जरूरी है. यदि सभी लोग सोशल मीडिया से ही खबरें पढ़ने लगे तो न्यूज साइट्स पैसे नहीं कमा पाएंगी और उनका काम करना मुश्किल हो जाएगा.

मंगलवार, 28 अप्रैल को ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने बयान दिया कि अगर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टैक्स से बचना चाहते हैं तो वो न्यूज आउटलेट्स से नए कॉन्ट्रैक्ट कर सकते हैं. साथ ही उन्होंने अनुमान लगाया कि नई डील्स से छोटे न्यूज आउटलेट्स भी फायदा पाएंगे, जिसके बाद कमाई का कुल आंकड़ा 250 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (1690 करोड़ रुपये) तक पहुंच सकता है.

ऑस्ट्रेलिया की कम्युनिकेशन मिनिस्टर अनिका वेल्स ने कहा कि लोग हर तरह की न्यूज फेसबुक, इंस्टाग्राम और टिकटॉक पर ही देखते हैं. ऐसे में बेहतर यही होगा कि बड़े प्लेटफॉर्म पत्रकारों को उनकी मेहनत के लिए अपनी कमाई से हिस्सा दें, ताकि उनकी आमदनी बढ़ सके.

कंपनियों को क्या है डर?

उधर गूगल, फेसबुक, इंस्टाग्राम और टिकटॉक जैसी सोशल मीडिया कंपनियों को सबसे ज्यादा डर कमाई घटने का है. उनका कहना है कि सरकार बिना कुछ किए एक सेक्टर से दूसरे सेक्टर में पैसा भेजना चाहती है. कंपनियों को ये डर भी है कि अगर ये बिल ऑस्ट्रेलिया में लागू हो गया तो बाकी देश भी ऐसा कर सकते हैं, जो उनके लिए बड़ा घाटा साबित हो सकता है.

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