नक्सलियों ने कहा, BJP नेता ने 5 करोड़ के पुराने नोट लेकर नए नहीं दिए तो बम से उड़ा दिया
बिहार के औरंगाबाद में नक्सली हमले में BJP विधायक के चाचा की मौत.
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बिहार के औरंगाबाद में नक्सलियों ने हमला कर कई गाड़ियों में आग लगा दी. नक्सलियों ने एमएलसी राजन सिंह के चाचा की हत्या कर दी है.
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8 नवंबर, 2016. इतिहास की एक तारीख. जिसने कई लोगों का वर्तमान और भविष्य तक बिगाड़ दिया. और बिगड़े भी क्यों न, नोटबंदी जो हुई थी. सारे 500 और 1000 के नोट बंद कर दिए थे. सरकार ने कहा था कि इसकी वजह से देश में कई अच्छी चीजें होंगी. इन अच्छी चीजों में आतंकवाद का खात्मा, काले धन का खात्मा, नक्सलवाद का खात्मा और कश्मीर में पत्थरबाजी का खात्मा होना था. दो साल से ज्यादा का वक्त हो गया, लेकिन इन अच्छी चीजों में एक भी नहीं हुई. आतंकवाद अपने चरम पर है, हर रोज कश्मीर में हमला हो रहा है, कालाधन वापस नहीं आया, नकली नोट पकड़े ही जा रहे हैं और नक्सली हमले में भी कोई कमी नहीं आई है.

नोटबंदी के बाद भी नक्सलवाद में कमी नहीं आई है.
ताजा मामला बिहार के औरंगाबाद जिले का है, जहां नक्सली हमला हुआ है. और इस नक्सली हमले की वजह वही 8 नवंबर, 2016 की तारीख है, जिस दिन नोटबंदी हुई थी. नोटबंदी की वजह से नक्सली तो खत्म नहीं हुए, उल्टे ये हमले की वजह बन गया. ये कब हुआ, कैसे हुआ और क्यों हुआ, हम आपको पूरी कहानी बता रहे हैं.
भाकपा (माओवादी) ने किया हमला

हमले की जिम्मेदारी भाकपा (माओवादी) ने ली है.
बिहार के औरंगाबाद के देव इलाके के सुद्दी बिगहा में 29 दिसंबर की रात नक्सली हमला हुआ था. कई पिकअप गाड़ियों से करीब 200 की संख्या में पहुंचे नक्सलियों ने कई बसों के मालिक सुनील सिंह के गोदाम में आईइडी से धमाका किया. 10 से ज्यादा गाड़ियों को आग लगा दी, बन रही सरकारी बिल्डिंग को बम से उड़ा दिया और बीजेपी के एमएलसी राजन कुमार सिंह के चाचा नागेंद्र सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी. नक्सलियों की ओर से करीब 100 राउंड फायरिंग की गई. इस हमले की जिम्मेदारी ली प्रतिबंधित संगठन भाकपा (माओवादी) ने. पुलिस और सीआरपीएफ के मुताबिक इस हमले को अंजाम दिया है नक्सलियों के शीर्ष नेता संदीप यादव. संदीप के साथ इस हमले में संजीत कुमार और विवेक यादव का भी नाम सामने आया है.
नक्सलियों ने नोटबंदी के बाद बीजेपी नेता को दिए थे 5 करोड़ रुपये

एमएलसी राजन सिंह के नाम नक्सलियों की चिट्ठी मिली है.
29 दिसंबर को हमले के बाद 30 दिसंबर को पूरे इलाके में पुलिस और सीआरपीएफ ने सर्च अभियान चलाया. इस तलाशी के दौरान पुलिस को नक्सलियों का पर्चा मिला. इस पर्चे में नक्सलियों ने दावा किया है कि नोटबंदी के दौरान एमएलसी राजन कुमार सिंह ने नक्सलियों से पांच करोड़ रुपये के पुराने नोट लिए थे. एमएलसी ने ये पैसे लिए थे और कहा था कि वो इन्हें नए नोट में बदलवा देंगे. लेकिन राजन ने पैसे नहीं लौटाए. इसके अलावा नक्सलियों का दावा है कि लेवी के तौर पर एमएलसी राजन कुमार सिंह ने दो करोड़ रुपये लिए थे और ये पैसे भी उन्होंने नक्सलियों को नहीं लौटाए हैं. पैसे न मिलने की वजह से ही नक्सलियों ने ये हमला किया है. हालांकि एमएलसी राजन सिंह ने इस बात से इन्कार किया है. उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलकर अपने लिए सुरक्षा की मांग की है.
एमएलसी का घर उड़ाने की थी तैयारी

एमएलसी राजन सिंह और पुलिस का दावा है कि नक्सली उनका घर उड़ाना चाहते थे.
पुलिस के मुताबिक नक्सली एमएलसी राजन कुमार सिंह का भी घर उड़ाना चाहते थे. इसके लिए नक्सलियों ने राजन सिंह और उनके चाचा नरेंद्र सिंह के घर कोडेक्स वायर बिछा रखे थे, ताकि आईइडी के जरिए ब्लास्ट कर दिया जाए. लेकिन ब्लास्ट में सिर्फ सामुदायिक भवन ही उड़ा और राजन सिंह का घर बच गया. इसके बाद नक्सलियों ने राजन सिंह के घर का सारा कीमती सामान लूट लिया और चलते बने. औरंगाबाद के एसपी सत्य प्रकाश के मुताबिक पूरी घटना की जांच की जा रही है और नक्सलियों की तलाशी के लिए सर्च अभियान चलाया जा रहा है. सर्च अभियान के लिए सीआरपीएफ के असिस्टेंट कमांडेंड सौरभ चौधरी अपनी टीम के साथ गांव में कैंप कर रहे हैं.
पहले भी हो चुका है गांव में हमला

नक्सली पहले भी इस गांव में हमला कर चुके हैं. पिछले हमले में भी एमएलसी राजन सिंह के भजीते की हत्या हुई थी.
नक्सलियों ने पहले भी इस गांव में हमला किया है. पांच साल पहले 21 मार्च, 2013 को नक्सलियों ने इस गांव में हमला कर कई गाड़ियों में आग लगा दी थी. उस दौरान फायरिंग भी की थी, जिसमें गांव के अजीत कुमार सिंह की हत्या कर दी गई थी. अजीत कुमार सिंह भी एमएलसी राजन सिंह के रिश्ते में भतीजे लगते थे. इसके अलावा भी कई बार औरंगाबाद में नक्सली हमले हो चुके हैं. कई पुलिस अफसरों का दावा है कि एमएलसी राजन कुमार सिंह की कंस्ट्रक्शन कंपनी है. नक्सली उनसे लेवी वसूलते थे. जब राजन सिंह ने नक्सलियों को लेवी देना बंद कर दिया, तो नक्सलियों ने बदला लेने के लिए ये हमला किया. राजन सिंह के मुताबिक वो हमेशा से नक्सलियों के निशाने पर रहे हैं. उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी और डीजीपी से मिलकर पहले भी खुद के लिए सुरक्षा की मांग की थी, लेकिन उन्हें सुरक्षा नहीं मिली. इसी का नतीजा है कि नक्सली हमला करने में सफल रहे.

नोटबंदी के बाद भी नक्सलवाद में कमी नहीं आई है.
ताजा मामला बिहार के औरंगाबाद जिले का है, जहां नक्सली हमला हुआ है. और इस नक्सली हमले की वजह वही 8 नवंबर, 2016 की तारीख है, जिस दिन नोटबंदी हुई थी. नोटबंदी की वजह से नक्सली तो खत्म नहीं हुए, उल्टे ये हमले की वजह बन गया. ये कब हुआ, कैसे हुआ और क्यों हुआ, हम आपको पूरी कहानी बता रहे हैं.
भाकपा (माओवादी) ने किया हमला

हमले की जिम्मेदारी भाकपा (माओवादी) ने ली है.
बिहार के औरंगाबाद के देव इलाके के सुद्दी बिगहा में 29 दिसंबर की रात नक्सली हमला हुआ था. कई पिकअप गाड़ियों से करीब 200 की संख्या में पहुंचे नक्सलियों ने कई बसों के मालिक सुनील सिंह के गोदाम में आईइडी से धमाका किया. 10 से ज्यादा गाड़ियों को आग लगा दी, बन रही सरकारी बिल्डिंग को बम से उड़ा दिया और बीजेपी के एमएलसी राजन कुमार सिंह के चाचा नागेंद्र सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी. नक्सलियों की ओर से करीब 100 राउंड फायरिंग की गई. इस हमले की जिम्मेदारी ली प्रतिबंधित संगठन भाकपा (माओवादी) ने. पुलिस और सीआरपीएफ के मुताबिक इस हमले को अंजाम दिया है नक्सलियों के शीर्ष नेता संदीप यादव. संदीप के साथ इस हमले में संजीत कुमार और विवेक यादव का भी नाम सामने आया है.
नक्सलियों ने नोटबंदी के बाद बीजेपी नेता को दिए थे 5 करोड़ रुपये

एमएलसी राजन सिंह के नाम नक्सलियों की चिट्ठी मिली है.
29 दिसंबर को हमले के बाद 30 दिसंबर को पूरे इलाके में पुलिस और सीआरपीएफ ने सर्च अभियान चलाया. इस तलाशी के दौरान पुलिस को नक्सलियों का पर्चा मिला. इस पर्चे में नक्सलियों ने दावा किया है कि नोटबंदी के दौरान एमएलसी राजन कुमार सिंह ने नक्सलियों से पांच करोड़ रुपये के पुराने नोट लिए थे. एमएलसी ने ये पैसे लिए थे और कहा था कि वो इन्हें नए नोट में बदलवा देंगे. लेकिन राजन ने पैसे नहीं लौटाए. इसके अलावा नक्सलियों का दावा है कि लेवी के तौर पर एमएलसी राजन कुमार सिंह ने दो करोड़ रुपये लिए थे और ये पैसे भी उन्होंने नक्सलियों को नहीं लौटाए हैं. पैसे न मिलने की वजह से ही नक्सलियों ने ये हमला किया है. हालांकि एमएलसी राजन सिंह ने इस बात से इन्कार किया है. उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलकर अपने लिए सुरक्षा की मांग की है.
एमएलसी का घर उड़ाने की थी तैयारी

एमएलसी राजन सिंह और पुलिस का दावा है कि नक्सली उनका घर उड़ाना चाहते थे.
पुलिस के मुताबिक नक्सली एमएलसी राजन कुमार सिंह का भी घर उड़ाना चाहते थे. इसके लिए नक्सलियों ने राजन सिंह और उनके चाचा नरेंद्र सिंह के घर कोडेक्स वायर बिछा रखे थे, ताकि आईइडी के जरिए ब्लास्ट कर दिया जाए. लेकिन ब्लास्ट में सिर्फ सामुदायिक भवन ही उड़ा और राजन सिंह का घर बच गया. इसके बाद नक्सलियों ने राजन सिंह के घर का सारा कीमती सामान लूट लिया और चलते बने. औरंगाबाद के एसपी सत्य प्रकाश के मुताबिक पूरी घटना की जांच की जा रही है और नक्सलियों की तलाशी के लिए सर्च अभियान चलाया जा रहा है. सर्च अभियान के लिए सीआरपीएफ के असिस्टेंट कमांडेंड सौरभ चौधरी अपनी टीम के साथ गांव में कैंप कर रहे हैं.
पहले भी हो चुका है गांव में हमला

नक्सली पहले भी इस गांव में हमला कर चुके हैं. पिछले हमले में भी एमएलसी राजन सिंह के भजीते की हत्या हुई थी.
नक्सलियों ने पहले भी इस गांव में हमला किया है. पांच साल पहले 21 मार्च, 2013 को नक्सलियों ने इस गांव में हमला कर कई गाड़ियों में आग लगा दी थी. उस दौरान फायरिंग भी की थी, जिसमें गांव के अजीत कुमार सिंह की हत्या कर दी गई थी. अजीत कुमार सिंह भी एमएलसी राजन सिंह के रिश्ते में भतीजे लगते थे. इसके अलावा भी कई बार औरंगाबाद में नक्सली हमले हो चुके हैं. कई पुलिस अफसरों का दावा है कि एमएलसी राजन कुमार सिंह की कंस्ट्रक्शन कंपनी है. नक्सली उनसे लेवी वसूलते थे. जब राजन सिंह ने नक्सलियों को लेवी देना बंद कर दिया, तो नक्सलियों ने बदला लेने के लिए ये हमला किया. राजन सिंह के मुताबिक वो हमेशा से नक्सलियों के निशाने पर रहे हैं. उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी और डीजीपी से मिलकर पहले भी खुद के लिए सुरक्षा की मांग की थी, लेकिन उन्हें सुरक्षा नहीं मिली. इसी का नतीजा है कि नक्सली हमला करने में सफल रहे.
