प्रिंसिपल ने विधवा की नौकरी खाई, DM ने वापस दिलाई, खाया उसके हाथ का खाना
दलित विधवा स्कूल में कुक थी. प्रिंसिपल ने नौकरी से निकाल दिया. उनके खिलाफ FIR हो गई है.
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फोटो - thelallantop
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बिहार के एक स्कूल में प्रिंसिपल साहब गुस्से में भारी गलती कर गए. स्कूल में मिड डे मील बनाने वाली औरत को विधवा कहा, और नौकरी से निकाल दिया. बात डीएम तक पहुंच गई. वो आए. औरत की बहाली कराई. खुद उसके हाथ का बना खाना खाया. और प्रिंसिपल साहब के ऊपर FIR करा दी.
औरंगाबाद के रफीगंज में है बटुरा प्राइमरी प्लस जूनियर हाईस्कूल. प्रिंसिपल हैं शिव गोविंद प्रसाद. और खाना बनाने वाली उर्मिला देवी दलित हैं. उनकी तैनाती तो स्कूल में भयी सन 2005 में. लेकिन 2013 में पति गुजर गए. अगले साल प्रिंसिपल साहब ने उनको नौकरी से निकाल दिया ये कहकर कि "विधवा के हाथ का खाना नहीं खाना चाहिए. अशगुन होता है."
अब एक तो पति की मौत, ऊपर से नौकरी हाथ से गई. तगड़ा सदमा उर्मिला को. तब से शिकायत लेकर इधर उधर दौड़ी. खूब दौड़ी लेकिन कोई फायदा नहीं. आखिर में औरंगाबाद के डीएम कंवल तनुज के पास पहुंची. डीएम ने उनकी बात सुनी. कहा, घर जाओ. हम आते हैं.
दूसरे दिन स्कूल में आ धमके. प्रिंसिपल को बुलाया. कहा बताओ भाई, काहे निकाला कुक को? प्रिंसिपल बोले कि वो रोज आती नहीं थी. डीएम को हील हुज्जत वाले जवाबों से तसल्ली नहीं हुई. कहा कि इस प्रिंसिपल पर FIR की जाए तुरंत. और फिर उर्मिला से कहा "अपने हाथ का गरमा गरम खाना खिलाओ." उसकी बहाली कराई और स्कूल के बच्चों के साथ बैठ के खाना खाया.
दूसरे दिन स्कूल में आ धमके. प्रिंसिपल को बुलाया. कहा बताओ भाई, काहे निकाला कुक को? प्रिंसिपल बोले कि वो रोज आती नहीं थी. डीएम को हील हुज्जत वाले जवाबों से तसल्ली नहीं हुई. कहा कि इस प्रिंसिपल पर FIR की जाए तुरंत. और फिर उर्मिला से कहा "अपने हाथ का गरमा गरम खाना खिलाओ." उसकी बहाली कराई और स्कूल के बच्चों के साथ बैठ के खाना खाया.
