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अटॉर्नी जनरल ने देशभर में जजों की ट्रेनिंग करवाए जाने का सुझाव क्यों दे डाला है?

देश में अब तक कोई महिला चीफ जस्टिस न होने का भी हवाला दिया है

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सुप्रीम कोर्ट में सेना की तरह से सरकार ने पक्ष रखा है और कानून को बनाए रखने की बात कही है. फोटो- PTI
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Varun Kumar
2 दिसंबर 2020 (अपडेटेड: 2 दिसंबर 2020, 02:07 PM IST)
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अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने महिला जजों की संख्या बढ़ाए जाने का सुझाव दिया है. उन्होंने कहा कि ऐसा होने पर महिलाओं के यौन शोषण से जुड़े मामलों पर ज्यादा संवेदनशीलता के साथ फैसले दिए जा सकेंगे. उन्होंने अपनी बात पर जोर देने के लिए इस बात का भी हवाला दिया कि देश के सबसे बड़े न्यायिक पद, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की कुर्सी पर अब तक कोई भी महिला जज नहीं बैठी है. दरअसल, हाल ही में मध्य प्रदेश में छेड़छाड़ के एक मामले में हाई कोर्ट ने अनोखा फैसला दिया था. इसमें पीड़िता से राखी बंधवाने और शगुन देने की शर्त पर आरोपी को जमानत पर रिहा करने को कहा था. इसी फैसले के खिलाफ कुछ महिला वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके कहा कि ऐसे अदालती फैसलो से समाज में अच्छा मेसेज नहीं जाता. ये विशेष अनुमति याचिका अपर्णा भट और आठ अन्य महिला वकीलों की ओर से दायर की गई है. जस्टिस एएम खानविलकर की बेंच के सामने सवाल उठा था कि भविष्य में इस तरह के फैसलों से किस तरह बचा जा सकता है. इस बारे में अटॉर्नी जनरल से सुझाव मांगे गए थे. इसी के बाद अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने अब हलफनामा दाखिल किया है. इसमें इस तरह के मामलों को देखते हुए महिला जजों की संख्या बढ़ाने, जजों की ट्रेनिंग और बेल कंडीशन के बारे में अपनी राय दी है. अटॉर्नी जनरल ने सुझाव दिया है कि अदालतों को आरोपों की गंभीरता समझते हुए शादी कराने जैसे फैसले नहीं देने चाहिए. पीड़िता की सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए. वेणुगोपाल का कहना है कि महिलाओं से जुड़े मामलों के लिए जजों की ट्रेनिंग होनी चाहिए, ताकि फैसलों में संवेदनशीलता ज्यादा दिखाई दे. उन्होंने कहा कि महिला जजों की संख्या और हकों का ध्यान रखा जाना चाहिए, तभी महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों में सख्ती बरती जा सकेगी. उन्होंने जुडिशरी और कोर्ट स्टाफ में महिलाओं की संख्या बढ़ाने की भी वकालत की. ऐसे आदेश न दिए जाने की अपील की, जिनसे आरोपी और पीड़िता का आमना-सामना हो. अटॉर्नी जनरल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में केवल दो महिला जज हैं, जबकि यहां जजों की 34 सीटें हैं. यहां कभी कोई महिला चीफ जस्टिस भी नहीं रही हैं. पूरे देश में हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जजों के कुल 1113 स्वीकृत पद हैं. इनमें से केवल 80 महिला न्यायाधीश हैं. इन 80 में से 78 महिला जज विभिन्न हाई कोर्ट्स में हैं. ये कुल जजों की संख्या का केवल 7.2 प्रतिशत ही हैं. क्या था राखी बंधवाने का मामला? मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने महिला के घर में घुसकर छेड़छाड़ के आरोपी को जमानत का ये फैसला 30 जुलाई को दिया था. NDTV की खबर के मुताबिक, हाई कोर्ट ने कहा था कि आरोपी अपनी पत्नी के साथ पीड़ित के घर जाएगा, राखी बंधवाकर 11 हजार रुपये देगा. उसकी रक्षा का वादा करेगा. पीड़िता के बेटे को 5 हजार रुपये, कपड़े और मिठाई भी देगा. इसकी तस्वीरें रजिस्ट्री में जमा कराएगा. उसके बाद 50 हजार के मुचलके पर उसे जमानत पर छोड़ा जाएगा.

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