असम में दो औरतों को कुएं में धकेल दिया गया. कीचड़ में गिराने के बाद ऊपर से मिट्टीडालकर, पाटकर मार दिया गया. ये वो खबर है, जो हर तरह के शोर में आपसे भी मिस हो गईऔर हम से भी. ज़िंदा दफनाई गई औरतों को ये 'सजा' मिली. उनका 'गुनाह' ये था कि उन्हें'डायन' करार दिया गया था. कहा गया ये डायन हैं. काला जादू करती हैं, जिससे कुएं केपानी में कीड़े पैदा हो गए हैं. डायन बताकर आज भी औरतों को जला देते हैं, मार देतेहैं, घर से, गांव से निकाल देते हैं. सड़कों पर पत्थर मारे जाते हैं. असम ही नहीं हरओर ये होता है. जिन्हें मार दिया गया सगु गौर और सल्मी गौर नाम थे उनके. 60 और 48की उम्र थी. असम के नगांव के नाहरबारी की बात बता रहे हैं. गुवाहाटी से डेढ़ सौकिलोमीटर भी न होगी ये जगह. गुवाहाटी असम की राजधानी है. असम का सबसे बड़ा शहर है.बासु गौर, सानू गौर, कुमार सानू गौर ये तीन उन भाइयों के नाम हैं, जिनने उन दोभारतमांओं को मारा. उन्हें कुएं में धक्का दिया था. हिंदुस्तान टाइम्स की खबर केहिसाब से. बासु ने कैमरों के सामने बताया, सगु और सल्मी काला जादू करती थीं. कुएंको पानी को खराब करती थीं. इसीलिये हमने उन्हें दफना दिया. ये दूर के लोग नहीं थे.ये तीन सल्मी के कजन थे. सगु उनकी मामी थी. असम में पिछले ही अगस्त में डायन बताकरमार देने की घटनाओं को रोकने के लिए एक बिल पास हुआ है. ऐसा वहां अक्सर होता रहताहै. हर जगह ऐसा होता है. अगस्त में एक औरत को डायन बताकर मार दिया. हाथ, पांव, सिर,धड़ सब अलग-अलग कर गड्ढे में लाश फेंक दी. भीलवाड़ा में एक औरत को सास-ससुर ने पांचमहीने तक बहू को कमरे में बंद रखा. खाने के नाम पर राख खिलाई. गर्म लोहे से दागा.पलामू में अगस्त में दो औरतों को पीटा, और मरने के बाद नदी में फेंक दिया. अगस्तमें पांच औरतों को एक साथ डायन बताकर मार दिया था. औरतें मार दी जाती हैं. पेट केबाहर भी. घर के अंदर भी. रिश्तेदारों के हाथों. पंचायत और गांववालों के हाथों. साल2016 चल रहा है.