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नोट बैन के बाद रुपया भूटानी करेंसी से नीचे आया, पर क्यों?

असम के सीमा वाले इलाके के लोगों का सहारा बना भूटानी नगुलट्रम.

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भूटानी कैरेंसी
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18 नवंबर 2016 (अपडेटेड: 18 नवंबर 2016, 01:10 PM IST)
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पूरे देश का नजारा ये है कि एटीएम और बैंकों के बाहर लोग लंबी कतारों में लगे हुए हैं. हर कोई अपने पुराने 500 और 1000 के नोट को बदलने में लगा हुआ है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ऐसे कंडीशन में असम के सीमा वाले इलाकों में लोग भूटानी करेंसी यूज कर रहे हैं. नोटों की कमी को दूर करने के लिए सीमा वाले गांवों के लोगों ने नई तरकीब ईजाद कर ली है. अब यहां के लोग अपनी डेली लाइफ में भूटानी करेंसी का यूज कर रहे हैं. यही कारण है कि भूटानी करेंसी की कीमत इंडियन करेंसी की तुलना में करीब 25 परसेंट तक ऊंचाई पर पहुंच गई है. दादगुरी के सीमा से सटे इलाकों में छोटे बिजनेसमैन और किराना दुकान वाले भी भूटानी करेंसी को रोज की खरीद-बिक्री में कर रहे हैं.
असम में चल रहा है भूटानी कैरेंसी

असम में चल रही है भूटानी करेंसी
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लोकल न्यूज एजेंसी नार्थ ईस्ट टुडे की रिपोर्ट्स के मुताबिक इस समय 500 के इंडियन नोट की वैल्यू 400 भूटानी नगुलट्रम हो गई है. नगुलट्रम भूटान की करेंसी है जैसे रूपया इंडियन करेंसी है. जबकि ऑफिसियल एक्सचेंज रेट 500 इंडियन रूपए की वैल्यू 500 भूटानी नगुलट्रम है. पर इंडियन नोटों की कमी की वजह से इंडियन कैरेंसी की वैल्यू कम हो गई है.


 

ये स्टोरी आदित्य प्रकाश ने की है 

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