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असम: पुलिस कस्टडी में मौत का आरोप लगा फूंका था थाना, अब घरों पर बुलडोजर चल गया

पुलिस अधिकारी ने कहा है कि अगर इस मामले में पुलिसवालों की तरफ से कोई गलती हुई है, तो दोषियों पर कार्रवाई जरूर की जाएगी.

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22 मई 2022 (अपडेटेड: 22 मई 2022, 06:27 PM IST)
Assam Police Station Set on fire
बाएं से दाएं. पुलिस स्टेशन के बाहर हंगामा करते लोग, बुलडोजर की कार्रवाई. (फोटो- आजतक/ANI)
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असम में पुलिस कस्टडी में मौत का एक कथित मामला सामने आया है. इस कारण इलाके में काफी बवाल हुआ. लोगों ने पुलिस पर एक व्यक्ति को प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए पुलिस स्टेशन (Assam police station) को आग के हवाले कर दिया. हिंसा इतनी बढ़ी की 20 लोगों की गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस अधिकारी सस्पेंड हुए. प्रशासन ने आरोपियों के घर पर बुलडोजर चला दिया. पूरा मामला असम के नागांव का है.

क्या है मामला?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नागांव के बाताद्रावा पुलिस स्टेशन में शनिवार, 21 मई को कथित तौर पर एक व्यक्ति की मौत हुई थी. पुलिस अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि व्यक्ति देर रात नशे की हालत में सड़क पर मिला था. जिसके बाद उसे पुलिस स्टेशन लाया गया था.

जिस व्यक्ति की मौत हुई, उसका नाम सफीकुल इस्लाम था. वो मछली बेचने का काम करता था. मीडिया रिपोर्ट्स में पुलिस से जुड़े सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि पुलिस ने सफीकुल से रिश्वत की मांग की थी. बताया गया,

“बाताद्रावा पुलिस ने सफीकुल को हिरासत में लिया और उससे (कथित तौर पर) एक बत्तख और 10 हजार रुपये की डिमांड की थी.”

NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस स्टेशन पर हंगामा कर रही भीड़ का आरोप था कि सफीकुल रिश्वत की रकम देने में असमर्थ था, जिस कारण कथित तौर पर पुलिस ने उसकी हत्या कर दी. मृतक के घरवालों ने आरोप लगाया कि सफीकुल को पुलिस कस्टडी में प्रताड़ित किया गया.

रिपोर्ट में आगे कहा गया कि घरवाले पुलिस स्टेशन पर जब शनिवार, 21 मई को सफीकुल से मिलने गए तो उन्हें बताया गया कि उसकी तबीयत खराब है. उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है. इसके बाद घरवाले अस्पताल पहुंचे. जहां उन्हें पता चला कि सफीकुल की मौत हो चुकी है. उसके शव को मुर्दाघर में रखा गया है.

तीन पुलिसकर्मी झुलसे, सामान खाक

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सफीकुल की मौत की खबर मिलने के बाद उसके घरवाले आसपास रहने वालों के साथ पुलिस स्टेशन पहुंचे. देखते ही देखते पुलिस स्टेशन के बाहर इकट्ठा हो गई. थोड़ी देर के बाद ये भीड़ उग्र हो गई और पुलिस स्टेशन में तोड़फोड़ शुरू कर दी. जिसके बाद पुलिस स्टेशन को आग के हवाले कर दिया गया. इस आगजनी में तीन पुलिसकर्मी गंभीर रुप से झुलस गए. इसके अलावा, कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, जब्त किए सामान, हथियार और गोला बारूद पूरी तरह से खाक हो गए.

इस मामले में आजतक से बात करते हुए नागांव के पुलिस उप महानिरीक्षक (मिडिल रेंज), सत्य रंजन हजारिका बताया कि इस संबंध में कई लोगों को हिरासत में लिया गया है. इसके साथ ही, संबंधित पुलिसकर्मी पर भी कार्रवाई की गई है. उन्होंने बताया,

“इस मामले में 14 महिलाओं समेत 20 लोगों को हिरासत में लिया गया है. वहीं, बाताद्रावा पुलिस स्टेशन के अधिकारी कुमुद गोगोई को भी ड्यूटी में लापरवाही बरतने के कारण सस्पेंड कर दिया गया है. गोगोई पर डिपार्टमेंटल एक्शन भी लिया जाएगा.”

पुलिस अधिकारी ने कहा है कि अगर इस मामले में पुलिसवालों की तरफ से कोई गलती हुई है, तो दोषियों पर कार्रवाई जरूर की जाएगी.

दूसरी तरफ, इन सब के बीच नागांव जिला प्रशासन ने रविवार, 22 मई को एविक्शन ड्राइव चलाया. इसके तहत ढींग इलाके में पांच परिवारों के घर पर प्रशासन ने बुलडोजर चलाया. इस दौरान ऐसे लोगों के भी घरों को ढहाया गया, जो कथित तौर पर शनिवार को पुलिस स्टेशन के बाहर हंगामा कर रहे थे. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने कहा कि भीड़ में कई लोग मृतक के रिश्तेदार होने का दावा कर रहे थे, लेकिन, जांच में पाया गया कि इनमें बैड कैरेक्टर और आपराधिक प्रवृति के लोग भी थे.

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