5 राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं. जिनमें असम में तो चुनाव शुरू भी हो गए हैं.पहली स्टेज में 78% वोटिंग हुई. माने लोग वोट दे रहे हैं, जो सेंसिटिव जगहें हैं,वहां भी. लेकिन, इस बार असम चुनाव में सिर्फ इंडियंस ही विधायक नहीं चुन रहे.विदेशी भी 'विधानसभा में कौन बैठेगा?' इस बात का फैसला करेंगे. इंडिया टुडे नेजांच-पड़ताल की. उनके मुताबिक अगर आपके पास 10 हजार रुपए हैं तो आप आसानी से सच्चेहिंदुस्तानी बन सकते हैं. मय कागज-पत्तर.कैसे बनें 'सच्चे हिन्दुस्तानी'असम में एक जगह है, ढुबरी. वहां बॉर्डर के पास बहती है ब्रह्मपुत्र नदी. अब नदी परक्या है कि बाउंड्री खींची नहीं गई है. तो लोग मुंह उठकर बांग्लादेश से इंडिया आजाते हैं. यहां पूरे इंडिया के रेशियो में मुस्लिम आबादी बहुत तेजी से बढ़ रही है.मुस्लिम पर ज्यादा न चौंकिएगा. ये मुस्लिम वो हैं जो बांग्लादेश से घुसे आ रहे हैं.वहां के डिस्ट्रिक्ट ट्रांसपोर्ट ऑफिस जहां सिर्फ इंडियंस के ड्राइविंग लाइसेंसबनते हैं. वहां दलाल 10-10 हजार लेकर किसी के भी लाइसेंस बनवा देते हैं. भले आपकेपास कोई कागज न हो. ये लाइसेंस ढिबरी के पते पर बनते हैं. यही हाल चिरांग जिले मेंभी है. बल्कि यहां थोड़ी सहूलियत बढ़ जाती है. बर्थ सर्टिफिकेट चाहिए? मात्र 5 हजारदीजिए. ड्राइविंग लाइसेंस चाहिए तो अलग से पैंतीस सौ दीजिए. सब मिल जाएगा. यहांआपको एक बात और बताते चलें. आधार कार्ड के चलन में आने से पहले ड्राइविंग लाइसेंसपहचान के सबूत के तौर पर देशभर में यूज होता था. अगर ड्राइविंग लाइसेंस हाथ में है,तो बाकी के कागजात बनने में कितनी आसानी होगी आप समझ सकते हैं.चुनाव पर असरसाल 2013 से ही नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस ऑफिस एक कोशिश कर रहा है. राज्य मेंविदेशियों की संख्या पता लगाने की. नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस ने ये माना है कि यहांबाहरी लोग फर्जी तरीके से वोटर आई डी कार्ड बनवा लेते हैं. अकेले ढुबरी जिले में27000 लोग गैर कानूनी ढंग से रह रहे हैं. ये सरकारी आंकडा है. असली कितना हो सकताहै, आपकी समझ पर है.