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भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग को लेकर असम और महाराष्ट्र क्यों भिड़ गए?

शिवरात्रि के लिए असम सरकार ने विज्ञापन जारी किया, महाराष्ट्र के नेता भड़क उठे.

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15 फ़रवरी 2023 (अपडेटेड: 15 फ़रवरी 2023, 09:47 PM IST)
assam government ad and bhjimashankar temple
(बाएं-दाएं) असम सरकार का विज्ञापन और भीमाशंकर मंदिर. (फोटो: सोशल मीडिया और आजतक)
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असम सरकार के एक विज्ञापन ने भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग की भौगोलिक स्थिति को लेकर बहस छेड़ दी है. इसकी वजह से बीजेपी पर धार्मिक भावनाओं से छेड़छाड़ करने का आरोप लग रहा है. सरकार का ये विज्ञापन मंगलवार 14 फरवरी को आया. इसमें सरकार ने दावा किया कि ‘छठवां ज्योतिर्लिंग असम में’ है. इसका विरोध हो रहा है, खासकर महाराष्ट्र में. वहां के नेताओं का कहना है कि 12 ज्योतिर्लिंगों में से छठवां ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के पुणे जिले के भीमाशंकर में स्थित है.

कहां हैं छठवां ज्योतिर्लिंग?

हिंदू मान्यताओं के अनुसार कुल 12 ज्योतिर्लिंग हैं. इनमें से 3 ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र में हैं. नाशिक में त्र्यंबकेश्वर, औरंगाबाद में घृष्णेश्वर और पुणे में भीमाशंकर जो सभी में छठवां ज्योतिर्लिंग है. लेकिन इस ज्योतिर्लिंग को लेकर असम और महाराष्ट्र के लोगों के अपने-अपने दावे रहे हैं. कई लोगों का मानना है कि छठवां ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र में ही है जो पुणे के सह्याद्रि पर्वत पर स्थित है. लेकिन ये दावा करने वाले भी कम नहीं कि असम के गुवाहाटी के नजदीक ज्योतिर्लिंग ही भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग है. इस दावे के पीछे शिवपुराण का हवाला दिया जाता है. इतनी जानकारी ये समझने के लिए काफी है कि असम सरकार के विज्ञापन पर सियासी हंगामा क्यों मच गया है. 

विज्ञापन में बताया गया है कि छठवां ज्योतिर्लिंग गुवाहटी एयरपोर्ट से 18 किलोमीटर दूर पामोही में हैं. इसके मुताबिक ये ज्योतिर्लिंग असम राज्य में डाकिनी पहाड़ियों की तलहटी में मौजूद है. असम सरकार महाशिवरात्रि के अवसर पर वहां एक कार्यक्रम आयोजित करवा रही है. उसने विज्ञापन में श्रद्धालुओं से वहां भारी संख्या में आने की अपील की है.

विरोध करने वाले क्या कह रहे?

कांग्रेस के महासचिव सचिन सावंत ने अपने एक ट्वीट में बीजेपी पर आरोप लगाते हुए लिखा, 

'बीजेपी उद्योगों को महाराष्ट्र से छीनने के बाद भगवान शिव को भी छीनना चाहती है. अब असम की बीजेपी सरकार ने दावा किया है कि छठवां ज्योतिर्लिंग भीमाशंकर महाराष्ट्र के पुणे में नहीं असम में मौजूद है. हम इस दावे का कड़ा विरोध करते हैं.' 

उन्होंने आगे लिखा,

'हम शिंदे-फडणवीस सरकार से मांग करते हैं कि वो इस पर अपना रुख स्पष्ट करे. और असम सरकार के इस फैसले की निंदा करे. असम सरकार ने न सिर्फ 12 करोड़ लोगों की आस्था और विश्वास को चोट पहुंचाई है बल्कि सारे भारतीयों के साथ ऐसा किया है. महाराष्ट्र के खिलाफ बीजेपी की नाराजगी फिर नजर आ रही है.'

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की सांसद सुप्रिया सुले ने भी ट्विटर पर असम सरकार की आलोचना करते हुए नाराजगी जाहिर की. उन्होंने पूछा कि क्या बीजेपी ने अब महाराष्ट्र के उद्योगों के साथ सांस्कृतिक खजाने को छीनने का फैसला किया है. सुप्रिया ने आदि शंकराचार्य के बृहद स्तोत्र रत्नाकर का उल्लेख करते हुए कहा,

असम में बीजेपी सरकार जो कर रही है वो गलत है और उसका कोई आधार नहीं है.

वहीं शिवसेना नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आदित्य ठाकरे ने बीजेपी पर राजनीति के लिए धर्म और राज्यों के बीच दरार पैदा करने का आरोप लगाया है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक आदित्य ने कहा कि कई लोगों ने चिंता व्यक्त की है कि जिस तरह से महाराष्ट्र से महत्वपूर्ण परियोजनाओं को छीन लिया गया है, उसी तरह मंदिरों को भी अब दूसरे राज्य ले जाया जा रहा है.

वहीं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुट के नेताओं ने सुप्रिया सुले और बाकी विपक्षी नेताओं पर इस मुद्दे को लेकर 'गंदी राजनीति' करने का आरोप लगाया. सीएम शिंदे के प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री दीपक केसरकर ने कहा कि महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा ज्योतिर्लिंग हैं और सबको इस पर गर्व है, लेकिन राजनीति के लिए किसी भी बात को शिंदे गुट से जोड़ देना ठीक नहीं है. मंत्री केसरकर ने आगे कहा कि असम में भीमाशंकर नाम की कोई जगह होगी और वहां इसी तरह पूजा हो रही होगी तो ठीक है. इससे महाराष्ट्र के भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग का महत्व कम नहीं हो सकता.

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