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पाकिस्तान के पीएम इमरान को नसीरुद्दीन के बाद ओवैसी ने झाड़ के रख दिया

इमरान खान को ऐसा जवाब मिला है कि आगे से वो बेमतलब भारत के मसलों में कूदकर नंबर कमाने की कोशिश नहीं करेंगे.

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24 दिसंबर 2018 (अपडेटेड: 23 दिसंबर 2018, 03:49 AM IST)
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इमरान खान ने नसीरुद्दीन शाह के बयान का फ़ायदा उठाकर ब्राउनी पॉइंट्स कमाने की कोशिश की थी. पहले नसीरुद्दीन शाह ने खुद और फिर असाउद्दीन ओवैसी ने, दोनों ने इमरान खान और पाकिस्तान को शीशा दिखा दिया (फोटो: PTI+रॉयटर्स)
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इमरान खान साहब, आपको भारत से कुछ सीखना चाहिए.
जिन इमरान खान के नाम ये नसीहत है, वो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री हैं. नसीहत देने वाले का नाम है असदुद्दीन ओवैसी. ऑल इंडिया मज़लिस-ए-इत्तेहादुल मुसिलमीन (AIMIM) के अध्यक्ष. 23 दिसंबर को एक ट्वीट में ओवैसी ने लिखा-
पाकिस्तानी संविधान के मुताबिक, बस एक मुसलमान ही मुल्क का राष्ट्रपति हो सकता है. भारत में दबे-कुचले वर्ग से कई लोग राष्ट्रपति हुए हैं. अब वक़्त आ गया है कि खान साहब समावेशी (सबको साथ लेकर चलने) राजनीति और अल्पसंख्यक अधिकारों पर भारत से कुछ सीखें.
इमरान बीच में कूदकर मौके का फ़ायदा उठाने निकले थे इमरान खान को सीख देने की नौबत यूं आई कि 22 दिसंबर को पाकिस्तान के वज़ीर-ए-आज़म ने एक बयान दिया था. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की नींव रखने वाले लोगों ने अल्पसंख्यकों को बराबरी का अधिकार देने का सपना देखा था. इमरान ने कहा कि अब वो भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सिखाएंगे कि अल्पसंख्यकों के साथ किस तरह का बर्ताव किया जाना चाहिए. इमरान के इस बयान का कॉन्टेक्स्ट था नसीरुद्दीन शाह का एक बयान. एक इंटरव्यू में नसीर ने कहा था-
मेरी मज़हबी तालीम हुई. लेकिन मेरी पत्नी रत्ना पाठक शाह बेहद लिबरल फैमिली से आती है. हमने अपने बच्चों को बिल्कुल भी मज़हबी तालीम नहीं दी. मेरा ये मानना है कि अच्छाई और बुराई का धर्म से कोई लेना-देना नहीं है. अच्छाई और बुराई के बारे में ज़रूर सिखाया उनको. मुझे फ़िक्र होती है अपने बच्चों के लिए. कल को अगर किसी भीड़ ने उन्हें घेर लिया और पूछा कि तुम हिंदू हो या मुसलमान, तो उनके पास कोई जवाब ही नहीं होगा. इन बातों से मुझे डर नहीं लगता, गुस्सा आता है. मैं चाहता हूं कि हर सही तरह से सोचने वाले इंसान को इन बातों पर गुस्सा आना चाहिए. डर नहीं लगना चाहिए हमें. हमारा घर है, हमें कौन निकाल सकता है यहां से.
नीचे लगे वीडियो में आप नसीरुद्दीन शाह का ये इंटरव्यू देख सकते हैं-
पढ़ें: नसीरुद्दीन शाह ने नहीं कहा 'मुझे डर लगता है' नसीरुद्दीन शाह ने इमरान से कहा, अपने काम से काम रखिए नसीर के इस बयान को लोगों ने लपक किया. झूठ फैलाया जाने लगा कि नसीरुद्दीन ने डर लगने की बात कही है. बिना रेफरेंस-कॉन्टेक्स्ट जाने नसीर को गालियां दी जाने लगीं. उन्हें उनकी औक़ात दिखाई जाने लगी. पाकिस्तान जाने को कहा जाने लगा. इसी मारा-मारी में इमरान खान भी कूद पड़े. नसीर के बहाने भारत पर निशाना साधा और कहा कि वो मोदी सरकार को सिखाएंगे कि अल्पसंख्यकों के साथ कैसा सलूक किया जाना चाहिए. इमरान के इस बयान पर नसीरुद्दीन शाह ने उन्हें बड़े सधे तरीके से सही जगह दिखाई. इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए नसीर ने कहा-
इमरान खान को अपने मुल्क में चल रही बातों पर ध्यान देना चाहिए. न कि उन बातों पर, जिनसे उनका कोई वास्ता नहीं. भारत पिछले 70 सालों से लोकतंत्र है और हमें पता है कि हमें अपना ध्यान कैसे रखना चाहिए.
पढ़ें: पाकिस्तान के PM को नसीरुद्दीन ने जो जवाब दिया, वो अब भारत पर चुप ही रहेंगे ओवैसी पहले भी पाकिस्तान से कह चुके हैं, हिंदुस्तानी मुसलमानों की फ़िक्र मत करो नसीरुद्दीन शाह और ओवैसी के बयान न केवल इमरान खान को आईना दिखाते हैं. बल्कि हिंदुस्तान के उन लोगों को भी उनकी सही जगह दिखाते हैं, जिन्होंने अपने दिमाग में मुसलमानों के लिए एक तय छवि बनाई हुई है. कि मुसलमान होने का मतलब है पाकिस्तान-परस्त होना. जो सोचते हैं कि मुल्क से मुहब्बत बस हिंदुओं को है, मुसलमानों को नहीं. वैसे ओवैसी ने पाकिस्तान को पहली बार खरी-खोटी नहीं सुनाई है. 2017 में एक बार ओवैसी और कीर्ति आज़ाद ने पाकिस्तान के एक टीवी शो में शिरकत की थी. वहां बहस के दौरान ओवैसी ने कहा था-
हिंदुस्तान में जो हमारा संविधान है, वो कहता है कि भारत सेकुलर देश है. हिंदुस्तान की विविधता, उसका प्लुरलिज़म हमेशा बना रहेगा. आप हिंदुस्तान के मुसलमानों की फ़िक्र करना छोड़ दीजिए. हम (हिंदुस्तानी मुसलमान) अपना फैसला कर चुके हैं कि ये (भारत) हमारा मुल्क है. और हम अपने मसलों का हल जम्हूरियत (लोकतंत्र) में मिलकर निकालने की कोशिश कर रहे हैं. आप हमारी फ़िक्र करना छोड़ दीजिए.
ओवैसी ने पाकिस्तान में जो कहा, उसे आप नीचे दिए गए वीडियो लिंक पर सुन-देख सकते हैं-

नसीरुद्दीन शाह के देश में बढ़ रही असहिष्णुता वाले बयान की सच्चाई क्या है?
क्या कर्नाटक के स्कूल में हिंदू बच्चों को जबरन नमाज पढ़ाई जा रही है?

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