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'जिसे चाहो हराम कहो, जिसे चाहो हलाल करो', नरोदा गांव दंगा मामले में कोर्ट के फैसले पर ओवैसी

सारे आरोपियों को बरी कर दिया गया है.

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Asaduddin Owaisi, Supriya Shrinate react on Naroda Gam massacre case judgement
ओवैसी ने नरोदा गांव फैसले पर क्या कहा? (फाइल फोटो)
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पुनीत त्रिपाठी
20 अप्रैल 2023 (अपडेटेड: 20 अप्रैल 2023, 12:25 AM IST)
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अहमदाबाद की एक स्पेशल कोर्ट ने नरोदा गांव दंगा मामले के सभी आरोपियों को बरी कर दिया. इन दंगों में 11 लोगों की मौत हुई थी. घटना के 21 साल बाद गुरुवार, 20 अप्रैल को फैसला सुनाते हुए जज शुभादा कृष्णकांत बक्शी ने पूर्व मंत्री माया कोडनानी और बाबू बजरंगी समेत सभी आरोपियों को सबूतों के अभाव में छोड़ दिया. इसके बाद लोकसभा सांसद और AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने एक ट्वीट किया. इसमें उन्होंने लिखा, 'जिसे भी चाहो हराम कह दो, जिसे भी चाहो हलाल कर दो...'

क्या बोले ओवैसी?

दरअसल असदुद्दीन ओवैसी ने ट्वीट में जाने-माने शायर राहत इंदौरी का एक कलाम लिखा,

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कोर्ट के फैसले पर कांग्रेस की सुप्रिया श्रीनेत ने भी ट्वीट किया. उन्होंने लिखा,

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आजतक में छपी रिपोर्ट के अनुसार इस मामले की सुनवाई 2009 में शुरू हुई थी. ट्रायल के दौरान 86 में से 17 आरोपियों की मौत हो गई. बाकी बचे 69 आरोपियों को बरी कर दिया गया है. ट्रायल के दौरान 182 लोगों से पूछताछ की गई, और 57 चश्मदीदों के बयान भी दर्ज किए गए. 13 साल से चल रही इस सुनवाई में सितंबर 2017 में अमित शाह माया कोडनानी के बचाव में गवाह के रूप में पेश भी हुए थे. उन्होंने कोडनानी के पक्ष में गवाही दी थी.

27 फरवरी, 2002 को गुजरात के गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन जलाए जाने के एक दिन बाद गुजरात में दंगे शुरू हो गए. 28 फरवरी 2002 की सुबह नरोदा गांव में भी सुबह-सुबह हिंसा शुरू हो गई थी. माया कोडनानी पर आरोप लगा कि उन्होंने हजारों लोगों की भीड़ को नरोदा गाम में हिंसा के लिए उकसाया. जिसके बाद भीड़ ने मुस्लिम समुदाय के 11 लोगों की हत्या कर दी थी.

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