एमसीडी चुनाव के मतदान से कुछ दिन पहले ही कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है. दिल्लीकांग्रेस के नेता अरविंदर सिंह लवली अब बीजेपी में शामिल हो गए हैं. कहा जा रहा हैकि वह एमसीडी चुनावों में टिकट बंटवारे से नाराज थे. इंडिया टुडे के पंछियों केमुताबिक एमसीडी चुनावों में अजय माकन ने कांग्रेस के बड़े नेताओं को किनारे कर दियाहै. उनकी अनदेखी से कई नेता नाराज हैं. अरविंदर भी उन्हीं में से एक हैं. टिकटबंटवारे में लवली की कोई राय नहीं ली गई, नतीजा लवली ने बीजेपी ज्वाइन कर ली.बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के कमरे में अरविंदर सिंह लवली को गुलदस्ता देकर और मिठाईखिलाकर बीजेपी में शामिल करवाया गया. बता दें कि 2013 के दिल्ली विधानसभा चुनाव मेंआप पार्टी को 70 में से 28 सीटें मिली थीं. तब कांग्रेस के समर्थन से अरविंदकेजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री बने थे. संसद में उस वक्त अरविंदर सिंह लवली नेबीजेपी पर खूब तंज कसे थे. कहा था कि इतनी आंधी में भी सरकार नहीं बना पाए तो कोईमौका नहीं मिलेगा सरकार बनाने का. तब उन्होंने केजरीवाल से कहा था कि वे भ्रष्टाचाररोकना चाहते हैं तो जान लें कि एमसीडी में वो जहां हाथ डालेंगे वहीं भ्रष्टाचारमिलेगा. बीजेपी को उन्होंने गुमराह करने वाली पार्टी बताया था. उन्होंने सदन मेंबीजेपी को संबोधित करते हुए कहा था, 'वो कांग्रेस सरकार पर तो भ्रष्टाचार के आरोपलगा रहे हैं लेकिन एमसीडी भी पाक साफ नहीं रही है. बात ऐसी कर रहे हो जैसे सारीदिल्ली को भारतीय जनता पार्टी चला रही है. जो काम अच्छे हों वो आपने कर दिए और जोबुरे हैं वो हमने कर दिए. 1993 से 1998 तक क्या स्थिति थी? घर जाने से डर लगता था नजाने कौन लोग पानी की समस्या को लेकर घर के सामने बैठे हों. हमने केजरीवाल को इसलिएसपोर्ट दिया ताकि लोकतंत्र जिंदा रहे.' [facebook_embedded_posthref="https://www.facebook.com/thelallantop/videos/1675779806062189/"] उनकेबीजेपी में शामिल होने पर दिल्ली की पूर्व सीएम शीला दीक्षित ने उन्हें कांग्रेस केसाथ गद्दारी करने वाला कह दिया. शीला दीक्षित की सरकार में लवली शिक्षा मंत्री हुआकरते थे. 1990 में उन्हें दिल्ली प्रदेश युवा कांग्रेस के महासचिव के रूप में चुनागया था. 1998 में वे पहली बार दिल्ली विधानसभा में चुने गए, जहां वह सबसे कम उम्रके विधायक थे. इसके बाद 2000 में उन्हें दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमिटी का महासचिवऔर पूर्वी जिला कांग्रेस कमिटी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया. 1998 में पहली बारचुने जाने के बाद से ही वे कभी चुनाव नहीं हारे थे. दिल्ली विधानसभा चुनाव 2013 मेंवे लगातार चौथी बार गांधीनगर विधानसभा क्षेत्र से जीते थे. 2015 की केजरीवाल आंधीमें वो लड़े ही नहीं थे. एक और अरविन्दर सिंह लवली हैं जो 2015 में दिल्ली विधानसभाचुनाव में कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हुए थे. वे पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री एवंकभी कांग्रेस के बड़े नेता रहे बूटा सिंह के बेटे हैं. लवली ने 2008 में दिल्ली कीदेवली विधानसभा सीट से जीत हासिल की थी. कांग्रेस ने उन्हें टिकट नहीं दिया थाजिससे नाराज हो कर वे बीजेपी में शामिल हुए थे. 2013 के विधानसभा चुनाव में वो आमआदमी पार्टी के उम्मीदवार से हार गए थे.--------------------------------------------------------------------------------ये स्टोरी लल्लनटॉप के साथ इंटर्नशिप कर रही रुचिका ने की है.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें: दिल्ली बीजेपी का वो प्लान, जिससे वो MCD चुनाव जीतना चाहती है एकलड्डू खाने से डेढ़ महीने तक देशभक्ति बढ़ी रहती है काम दिल्ली में बोल रहा है, येकेजरीवाल का विकास मॉडल है