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वर्दी, सैलरी, ट्रेनिंग, ड्यूटी... आर्मी में भर्ती के नाम पर ऐसी ठगी हुई कि फिल्म की कहानी बन जाए!

ठगों ने भर्ती के नाम पर 16 लाख रुपये लिए. चार महीने बाद पता चली ठगी की बात.

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मेरठ पुलिस द्वारा मामले में गिरफ्तार आरोपी बिट्टू सिंह. (फोटो: आजतक)
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धीरज मिश्रा
23 नवंबर 2022 (अपडेटेड: 23 नवंबर 2022, 06:02 PM IST)
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सेना में नौकरी (Indian Army Job) देने के नाम पर ठगी करने का एक बड़ा मामला सामने आया है. इस गिरोह ने गाजियाबाद के एक युवक मनोज कुमार को पैसे के बदले 'फर्जी नौकरी' दी थी. य़ुवक को लग रहा था कि वो सेना में काम कर रहा है, लेकिन 4 महीने बाद उसे एहसास हुआ कि उसकी सेना में भर्ती कभी हुई ही नहीं थी और ये पूरी तरह से ठगी का जाल था, जिसमें वो फंस गया था.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुमार को हर महीने 12,500 रुपये सैलरी भी दी गई थी और जुलाई महीने में उसकी कथित नौकरी लगी थी. ये पूरा जाल इस तरीके से बिछाया गया कि युवक को लग रहा था कि वो पठानकोट के 272 ट्रांजिट कैंप में 108 इन्फैंट्री बटालियन में नौकरी कर रहा है.

दो लोग गिरफ्तार

इस मामले में मेरठ पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि ये दोनों ही युवाओं को निशाना बनाते थे और लाखों की ठगी करते थे. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन ठगों के शातिराना तरीकों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ठगों ने बाकायदा आर्मी की वर्दी पहनकर पीड़ित लोगों को बाकायदा वीडियो कॉल किया और फिर उन्हें अपने जाल में फंसाया.

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, मेरठ पुलिस ने आर्मी इंटेलिजेंस के साथ मिलकर कार्रवाई करते हुए दो लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनके नाम राहुल सिंह और बिट्टू हैं. राहुल मूल रूप से मुजफ्फरनगर का रहने वाला है, जबकि बिट्टू मेरठ के दौराला का रहने वाला है. 

इन के पास से एक पिस्टल (32 बोर), दो मैगजीन (32 बोर), कैप्टन रैंक के दो बैज, 4 रबड़ स्टैम्प हैन्डल, तीन नेम प्लेट, दो आर्मी सोल्डर (टीए) बैच, एक आर्मी ऑफिसर कैप, एक मोबाइल फोन, ऑफिसर की पूरी यूनिफार्म, तीन मेडल समेत कई सामान बरामद किए गए हैं.

मेरठ पुलिस के मुताबिक, गाजियाबाद के थाना मुरादनगर गांव सुराना के रहने वाले मनोज कुमार ने मेरठ के थाना दौराला में एक मुकदमा दर्ज कराया था. इसमें उन्होंने बताया था कि 2020-21 में भर्ती के नाम पर राहुल सिंह ने उनसे 16 लाख रुपये लिए थे. मनोज ने बताया कि इसके बदले उन्हें आर्मी की वर्दी, आईडी कार्ड और नियुक्ति पत्र दिया गया था. हालांकि, कुछ महीने बाद जब उन्होंने मिलिट्री इंटेलिजेंस से पूछताछ की तो पूरे मामले का खुलासा हो गया.

कैसी की ठगी?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आर्मी में भर्ती के सिलसिले में मनोज कुमार साल 2019 में फैजाबाद गए थे. वहां पर उनकी मुलाकात राहुल से हो गई. राहुल ने उन्हें आर्मी में नौकरी दिलाने की बात की. मनोज और मनोज के भाई सेना में नौकरी करना चाहते थे. उन्हें लगा कि राहुल दोनों भाईयों को नौकरी दिला देगा. इसके लिए उन्होंने उसे 16 लाख रुपये दिए. लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं हुआ और उन्हें ठग लिया गया.

मनोज को ट्रेनिंग के लिए पठानकोट बुलाया गया था. इसी दौरान राहुल का एक साथी बिट्टू बाकायदा आर्मी की वर्दी पहन कर इन लोगों से वीडियो कॉल पर बात करता रहा. उन्हें विश्वास दिलाने के लिए वर्दी दी गई और मेस में काम कराया गया. रात में कुछ ड्यूटी भी कराई जाती थी. मनोज को हर महीने सैलरी भी दी जाती रही. 

लेकिन इसी बीच चौथे महीने में आर्मी इंटेलिजेंस को उनपर शक हुआ और मनोज से पूछताछ की गई, तो पता चला कि उसका आईडी कार्ड और नियुक्ति पत्र फर्जी हैं. इसके बाद मनोज ने मेरठ के दौराला थाने में ठगी का मुकदमा लिखवाया. आर्मी इंटेलिजेंस और पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए आरोपी राहुल और बिट्टू को गिरफ्तार कर लिया है.

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