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12 साल पहले दी दारोगा भर्ती की अर्जी, दौड़ का नंबर आया तो सब फेल हो गए

बस यूं कहो कि सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर की लाज रखने के लिए भर्ती प्रक्रिया पूरी कर दी. 233 लोग घर चले गए.

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13 जुलाई 2016 (अपडेटेड: 12 जुलाई 2016, 05:00 AM IST)
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Image: Reuters
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बिहार में टॉपर जितनी स्पीड से बनते हैं. सरकारी नौकरी पाने की स्पीड उतनी ही स्लो है. वहां 2004 ईसवी(12 साल पहले) में तमाम लोगों ने दारोगा बनने के लिए अप्लाई किया. इतिहास लिखे जाने से दो दिन पहले यानी सोमवार को उनकी दौड़ कराई गई. नतीजा तो हेडलाइन में पढ़ ही लिया होगा. पूरा मामला ये है कि 2004 में भर्ती निकली. पेपर हुआ. रिजल्ट में गड़बड़ी हुई. एग्जाम देने वाले बमक कर हाईकोर्ट पहुंचे. दैनिक भास्कर की खबर के मुताबिक हाईकोर्ट ने 1510 लोगों को पास कर दिया. वहां से निकाले गए 233 लोग सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए. ये साल 2009 की बात है. 2011 में इसका फैसला आ गया बड़कई कोरट से. जज साहब बोले इन लोगों का फिटनेस टेस्ट लेओ, मेडिकल कराओ. और रिटेन टेस्ट भी कराओ. उसके बाद भर्ती डिपार्टमेंट कान में कड़वा तेल डाल के सन्न बैठ गया. अब याद आई पांच साल बाद. तो बुला के दौड़ा दिया. कि भाई अप्लाई करने वालों की भर्ती भी न हो. सुप्रीम कोर्ट के आदेश की लाज भी बच जाए. मुजफ्फरपुर में ये दौड़ हुई तो एक लेडी के अलावा सब फेल हो गए. महिला को सिर्फ मेडिकल कराना था. उसे दौड़ नहीं लगानी थी.

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