फोन का लॉक खुलवाने को बेक़रार सरकार!
दो फोन हैं. सरकार जांच करने के लिए उनका पूरा डाटा चाहती है. मोबाइल कम्पनी कोर्ट चली गयी. अब बहस चल रही है.
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ऐपल और अमीरीक रक्षा एजेंसियों की जानकारी चीन के पास जा चुकी है.
अमरीका में एक ड्रग डीलर पकड़ाया है. उसके बाद से बड़ा बवाल चल रहा है. हुआ ये है कि जुन फ़ेंग नाम का ड्रग डीलर फरवरी में पकड़ा गया था. अब पुलिस उससे और भी जानकारी लेना चाहती है. इसी क्रम में एफ़.बी.आई. यानी अमरीका की सी.बी.आई. उसका फ़ोन देखना चाहती है.
वहां का कानून एफ़.बी.आई. को इसकी परमीशन नहीं देता है इसलिए अमरीका के जस्टिस डिपार्टमेंट ने ऐप्पल को नोटिस भेजा कि वो जुन फ़ेंग के आईफ़ोन का डाटा उसे दे दे. ऐप्पल इस बात पे वहां के कोर्ट चला गया. कोर्ट के जज ने ऐप्पल का साथ दिया और एफ़.बी.आई को फ़ोन का डाटा न देने का फ़ैसला सुनाया.
आईफ़ोन इस दुनिया का सबसे ज़्यादा encrypted और secured फ़ोन माना जाता है. यूज़र्स का डाटा ऐप्पल के पास एकदम चौकस तरीके से सुरक्षित रहता है. ऐसे में एफ़.बी.आई. को किसी का डाटा देना, उसकी अपनी पॉलिसी के ही खिलाफ़ होगा.
ऐप्पल का कहना है कि वो अपने कस्टमर्स की प्राइवेसी का पूरा ध्यान रखती है और ऐसे में वो किसी भी यूज़र का डाटा किसी को भी नहीं उपलब्ध करवाएगी. कहने को ये भी कहा जा रहा है कि अगला तो एक ड्रग डीलर है लेकिन ये हर किसी को मालूम है कि एक बार शुरुआत हो जाये तो इस क्रम को कभी रोका नहीं जा सकेगा और बहुत ही जल्द हर ऐप्पल यूज़र का डाटा सरकार के पास होगा. ये सीधी तरह से प्राइवेसी पर सेंधमारी है.
जज का ऐप्पल को डाटा शेयर करने से मना करना सिर्फ इसी एक केस के लिए बहुत बड़ी खबर नहीं है. इससे भी बड़ा एक मुद्दा है. 2015 का सैन बर्नारडीनो अटैक. 2 दिसम्बर 2015 को एक आदमी और एक औरत ने मिलकर अंधाधुंध गोलियां चलायीं और बम फोड़ने की भी कोशिश की. इस में 14 लोग मारे गए थे. दोनों ही आतंकवादी हमले के तुरंत बाद पुलिस से भागते हुए मार दिए गए थे.
People injured in shooting
आदमी का नाम सैयद फ़ारूक था और औरत का तफ्शीन मलिक. दोनों पति पत्नी थे.
Vehicle of Farook and Malik. They were shot dead by the police while trying to fled the scene.
अब हुआ ये है कि अमरीका का जस्टिस डिपार्टमेंट और ऐप्पल एक दूसरे से भिड़ने जा रहे हैं अमरीकी संसद में जहाँ एफ़.बी.आई. ऐप्पल से अपनी पासवर्ड देने की पॉलिसी बदलने को कहेगी. ऐसे में जुन फ़ेंग के केस में जैसे जज ने आईफ़ोन को अनलॉक करने को मना कर दिया है, ये फ़ारूक और तफ्शीन के केस को influence कर सकता है. ऐप्पल का भी ऐसा ही कहना है कि अगर तफ्शीन और फारुक के केस में ऐप्पल को फ़ोन अनलॉक करना पड़ सकता है तो फिर ये आगे आने वाले केसों में भी लागू होगा और ऐप्पल के यूज़र्स की प्राइवेसी पर बट्टा लग जायेगा.
Farook and his wife Malik
ऐप्पल का कहना है कि ये संविधान के ही खिलाफ़ है जबकि जस्टिस डिपार्टमेंट कह रहा है कि ये सब एक पब्लिसिटी स्टंट है और ऐप्पल को कोई हक़ नहीं है देश की सुरक्षा से खेलने का.
जुन फ़ेंग के केस में जस्टिस डिपार्टमेंट ने जिस लॉ का इस्तेमाल किया है वो All Writ's Act है और जो कि 227 साल पुराना लॉ है. तब आईफ़ोन क्या कहीं पीसीओ भी नहीं हुआ करता था.
हाल ही में फेसबुक के लैटिन अमेरिका के वाईस प्रेसिडेंट को ब्राज़ील में अरेस्ट कर लिया गया है. व्हाट्सैप्प फेसबुक की ही कंपनी है और ब्राज़ील की कोर्ट ने व्हाट्सैप्प को ये निर्देश दिए थे कि वो ड्रग ट्रैफिकिंग से जुड़े लोगों की चैट को पुलिस को पहुंचा दे. व्हाट्सैप्प ने ये ऑर्डर मानने से मन कर दिया था.
वहां का कानून एफ़.बी.आई. को इसकी परमीशन नहीं देता है इसलिए अमरीका के जस्टिस डिपार्टमेंट ने ऐप्पल को नोटिस भेजा कि वो जुन फ़ेंग के आईफ़ोन का डाटा उसे दे दे. ऐप्पल इस बात पे वहां के कोर्ट चला गया. कोर्ट के जज ने ऐप्पल का साथ दिया और एफ़.बी.आई को फ़ोन का डाटा न देने का फ़ैसला सुनाया.
आईफ़ोन इस दुनिया का सबसे ज़्यादा encrypted और secured फ़ोन माना जाता है. यूज़र्स का डाटा ऐप्पल के पास एकदम चौकस तरीके से सुरक्षित रहता है. ऐसे में एफ़.बी.आई. को किसी का डाटा देना, उसकी अपनी पॉलिसी के ही खिलाफ़ होगा.
ऐप्पल का कहना है कि वो अपने कस्टमर्स की प्राइवेसी का पूरा ध्यान रखती है और ऐसे में वो किसी भी यूज़र का डाटा किसी को भी नहीं उपलब्ध करवाएगी. कहने को ये भी कहा जा रहा है कि अगला तो एक ड्रग डीलर है लेकिन ये हर किसी को मालूम है कि एक बार शुरुआत हो जाये तो इस क्रम को कभी रोका नहीं जा सकेगा और बहुत ही जल्द हर ऐप्पल यूज़र का डाटा सरकार के पास होगा. ये सीधी तरह से प्राइवेसी पर सेंधमारी है.
जज का ऐप्पल को डाटा शेयर करने से मना करना सिर्फ इसी एक केस के लिए बहुत बड़ी खबर नहीं है. इससे भी बड़ा एक मुद्दा है. 2015 का सैन बर्नारडीनो अटैक. 2 दिसम्बर 2015 को एक आदमी और एक औरत ने मिलकर अंधाधुंध गोलियां चलायीं और बम फोड़ने की भी कोशिश की. इस में 14 लोग मारे गए थे. दोनों ही आतंकवादी हमले के तुरंत बाद पुलिस से भागते हुए मार दिए गए थे.
People injured in shooting
आदमी का नाम सैयद फ़ारूक था और औरत का तफ्शीन मलिक. दोनों पति पत्नी थे.
Vehicle of Farook and Malik. They were shot dead by the police while trying to fled the scene.
अब हुआ ये है कि अमरीका का जस्टिस डिपार्टमेंट और ऐप्पल एक दूसरे से भिड़ने जा रहे हैं अमरीकी संसद में जहाँ एफ़.बी.आई. ऐप्पल से अपनी पासवर्ड देने की पॉलिसी बदलने को कहेगी. ऐसे में जुन फ़ेंग के केस में जैसे जज ने आईफ़ोन को अनलॉक करने को मना कर दिया है, ये फ़ारूक और तफ्शीन के केस को influence कर सकता है. ऐप्पल का भी ऐसा ही कहना है कि अगर तफ्शीन और फारुक के केस में ऐप्पल को फ़ोन अनलॉक करना पड़ सकता है तो फिर ये आगे आने वाले केसों में भी लागू होगा और ऐप्पल के यूज़र्स की प्राइवेसी पर बट्टा लग जायेगा.
Farook and his wife Malik
ऐप्पल का कहना है कि ये संविधान के ही खिलाफ़ है जबकि जस्टिस डिपार्टमेंट कह रहा है कि ये सब एक पब्लिसिटी स्टंट है और ऐप्पल को कोई हक़ नहीं है देश की सुरक्षा से खेलने का.
जुन फ़ेंग के केस में जस्टिस डिपार्टमेंट ने जिस लॉ का इस्तेमाल किया है वो All Writ's Act है और जो कि 227 साल पुराना लॉ है. तब आईफ़ोन क्या कहीं पीसीओ भी नहीं हुआ करता था.
हाल ही में फेसबुक के लैटिन अमेरिका के वाईस प्रेसिडेंट को ब्राज़ील में अरेस्ट कर लिया गया है. व्हाट्सैप्प फेसबुक की ही कंपनी है और ब्राज़ील की कोर्ट ने व्हाट्सैप्प को ये निर्देश दिए थे कि वो ड्रग ट्रैफिकिंग से जुड़े लोगों की चैट को पुलिस को पहुंचा दे. व्हाट्सैप्प ने ये ऑर्डर मानने से मन कर दिया था.

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