बॉलीवुड एक्टर इरफान नहीं रहे. वो 53 साल के थे. 28 अप्रैल को कोलोन इन्फेक्शन कीशिकायत के बाद उन्हें मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में भर्ती करवाया गया था. 29अप्रैल वहीं उन्होंने अपनी आखिरी सांसें लीं. वर्सोवा के कब्रिस्तान में उनका अंतिमसंस्कार किया गया. इस आखिरी सफर में कुछ चुनिंदा लोगों को ही शामिल होने की परमिशनमिल पाई क्योंकि देशभर में कोरोवायरस की वजह से लॉकडाउन लगा हुआ है. इसमें इरफान कापरिवार और उनके करीबी दोस्त-फिल्ममेकर्स विशाल भारद्वाज और तिग्मांशु धूलिया शामिलथे. ज़ाहिर तौर पर ये बड़ा मुश्किल समय है. ऐसे में हमने बात की शिवकेश मिश्रा से.लंबे समय से इंडिया टुडे मैग्ज़ीन के साथ जुड़े हुए हैं. इरफान पर इन्होंने कईरिपोर्ताज लिखे हैं और उनके ऊपर किताब लिखना चाहते हैं. इसी बाबत उन्हें कई बारइरफान से रूबरू होने का मौका मिला. अपनी इन बातों-मुलाकातों में उन्होंने इरफान केबारे जो जाना, वो हमसे शेयर कर रहे हैं.अंतिम संस्कार के लिए ले जाए जाते इरफान.बतौर पत्रकार इरफान से अपनी पहली मुलाकात के बारे में बात करते हुए वो बताते हैं-''पहले फोन पर बातचीत होती थी. 2008 के आसपास जब कबीर खान डायरेक्टेड फिल्म 'न्यूयॉर्क' रिलीज़ हुई थी. तब मेरी दिल्ली के ओबेरॉय होटल में उनसे पहली मुलाकात हुई.वहां एक बड़ा दिलचस्प वाकया हुआ. मेरे फोटोग्राफर लिखी गई प्रोफाइल में इस्तेमालकरने के लिए कुछ तस्वीरें चाहते थे. खासकर फेशियल एक्सप्रेशंस. फोटोग्राफर कुछ शब्दकहते और इरफान उस हिसाब से अपनी भाव-भंगिमा बदलते रहते. इतने में उनके मुंह से'मां' शब्द निकला. इरफान ठहर गए. कमरे में फूलों का एक गुलदस्ता रखा था. मुझसे कहा-क्या आप मुझे उसमें से एक फूल दे सकते हैं? मैं कहा- जी ज़रूर. और मैंने वो फूलउन्हें पकड़ा दिया. उस फूल को इरफान ने अपने चेहरे पर रखा और फिर से तस्वीर खिंचानेलगे.'' इरफान अपनी मां के बहुत करीब थे. क्योंकि उनके पिता का इंतकाल काफी (एनएसडीमें भर्ती होने से 15 दिन) पहले हो गया था. 25 अप्रैल को इरफान की मां सईदा बेगम कीभी मौत हो गई. इस चीज़ ने इरफान को एक दम परेशान कर दिया. वो सदमे में चले गए. मांकी मौत के ठीक तीन दिन बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया और चौथे दिन वोगुज़र गए.अपनी मां और परिवार के बाकी सदस्यों के साथ इरफान.शिवकेश जी के मुताबिक इरफान वो शख्स थे, जो कभी कैरिड अवे नहीं होते थे. न ही आपउनके मुंह से वो चीज़ कहलवा सकते थे, जो वो कहना नहीं चाहते. ऐसा शिवकेश अपने अनुभवके आधार पर बता रहे हैं. उन्होंने इरफान से एक सवाल पूछा- 'आप ग्लैमर की दुनिया मेंरहते हैं, आप कभी भटके नहीं?' इरफान ने बड़े ही अलग अंदाज़ में उसका जवाब दे दिया.हालांकि वो समझ चुके थे कि ये सवाल कहां से आ रहा. जब उनसे वही सवाल दोहराया गया,तो वो खुले. उन्होंने कहा- 'देखिए उसकी एक उम्र होती है. और मैं उस वक्फे को पार करआया हूं. दिली तौर पर उस चीज़ से मेरा कोई डिस्ट्रैक्शन होता नहीं है. मैं बस कामके दौरान ही उसमें रहता हूं फिर मैं बाहर आ जाता हूं.' एक इंसान के तौर पर शिवकेशइरफान को ऑथेंटिक पर्सनैलिटी मानते हैं. बकौल शिवकेश- 'इरफान कभी बनावटी नहीं होसकते थे. आपको उनकी बात अच्छी लगे या नहीं, वो आपको खुश करने के लिए आपसे बात नहींकरेंगे. अगर आपके साथ बातचीत नहीं करना चाहते, तो वो साफ कर देंगे. बहुत से लोगकहते हैं कि इरफान से उनकी दोस्ती है. लेकिन इरफान बहुत ज़्यादा लोगों सेघुलते-मिलते नहीं थे. वो कहते थे कि ये उनका काम है, जिसकी वजह से उन्हें लोगों सेमिलना पड़ता है.' इसका उदाहरण देते हुए शिव ने बताया कि वो उनसे अपनी किताब केसिलसिले में बात करने पहुंचे थे. यहां इरफान ने उन्हें एक किस्सा सुनाया है.उन्होंने बताया कि एक अग्रेज़ी पब्लिशिंग कंपनी ने उन्हें फोन किया. वो चाहते थे किइरफान के ऊपर किताब लिखी जाए. इसके लिए उन्होंने एक आदमी चुना था, जो इरफान सेमिलने वाला था. ये चीज़ उन्हें कुछ समझ नहीं आई. इरफान का कहना था कि आप किसी इंसानके ऊपर किताब लिखने के लिए किसी आदमी को चुन कैसे सकते हो. ये तो स्वेच्छा की चीज़है. इन्हीं चीज़ों के मद्देनज़र रखते हुए, इरफान ने उस पब्लिशर को मना कर दिया.जनवरी 2020 में मशहूर राइटर असीम छाबड़ा ने इरफान के ऊपर 'इरफान खान- द मैन, दड्रीमर, द स्टार' नाम की किताब लिखी है-इरफान के ऊपर लिखी असीम छाबड़ा की किताब का कवर.इरफान को इस बात से बड़ी दिक्कत थी कि लोगों को ये लगता है कि वो हमेशा अपने किसीकिरदार में रहते हैं. वो जिससे भी मिलते, यही कहते- 'जब कोई फिल्म खत्म हो गई, उसकेबाद मुझसे एक्टिंग मत करवाया करो'. इंटरव्यू से इतर या ऑफ द रिकॉर्ड भी इरफानसिनेमा की ही बातें करते थे. जब शिवकेश ने बताया कि उनकी आसिफ कपाड़िया केडायरेक्शन में बनी फिल्म 'द वॉरियर' वो नहीं देख पाए. क्योंकि वो उन्हें कहीं मिलनहीं पाई. .तो इरफान ने उस फिल्म की सीडी-डीवीडी उन्हें खुद कुरियर की. 'द वॉरियर'का एक छोटा सा हिस्सा आप यहां देख सकते हैं:2001 में आई 'द वॉरियर' वो फिल्म थी, जिसने इरफान फिल्म एक्टिंग में इंटरनेशनल लेवलपर पहचान दिलाई. उसके पहले वो पिछले काफी सालों से टीवी में एक्टिंग कर रहे थे.शूजीत सरकार की 'पीकू' की रिलीज़ के दौरान इरफान गुरुग्राम के होटल में रुके हुएथे. यहां उन्होंने शिवकेश को फोन करके बुलाया. बात-बात में शिव ने उनसे पूछा किआपके फोन में दीपिका पादुकोण (पीकू में इरफान की को-स्टार) का नंबर कब सेव हुआ?जवाब में हंसते-मुस्कुराते इरफान ने जवाब दिया कि दीपिका का नंबर तो उनके फोन मेंअब भी सेव नहीं है. मज़ाक-मज़ाक में उन्होंने ये पूछ डाला कि कहीं शिवकेश कोई गॉसिपमसाला तो नहीं ढूंढ रहे. दीपिका ने इंस्टाग्राम पर काली तस्वीर पोस्ट कर इरफान कोआखिरी विदाई दी:View this post on Instagram💔 #irrfankhanA post shared by Deepika Padukone(@deepikapadukone) on Apr 29, 2020 at 3:51am PDTशिवकेश इरफान से अपनी आखिरी मुलाकात के बारे में बताते हुए कहते हैं- 'मैं 2017 मेंउनके मुंबई वाले घर में उनसे मिला था. उसके बाद वो अपने इलाज के लिए लंदन चले गए.तब भी व्हाट्स ऐप पर हमारी बात होती थी. ओटीटी प्लैटफॉर्म पर आने के बाद मैंने उनकीफिल्म 'अंग्रज़ी मीडियम' देखी. मुझे उस फिल्म को देखते वक्त अहसास हुआ कि इरफान इसफिल्म में बिलकुल लय में नज़र नहीं आ रहे. मैं उनसे ये बात कहना चाहता था लेकिनमुझे मौका ही नहीं मिला.अपनी आखिरी फिल्म 'अंग्रेज़ी मीडियम' के सेट पर अपने को-स्टार्स दीपक डोबरियाल औररणवीर शोरे के साथ इरफान.उनके गुज़रने पर मैं थोड़ा भावुक हो रहा हूं लेकिन ऐसी पर्सनैलिटीज़ के बारे मेंदुखी नहीं होना चाहिए. उनके काम को सेलीब्रेट करना चाहिए. वो किसी खास मक़सद से इसदुनिया में आए थे. वो अपने कई इंटरव्यू में ये कहा करते-'यार ज़िंदगी का कुछ भरोसा नहीं है'.--------------------------------------------------------------------------------वीडियो देखें: मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती इरफ़ान का निधन