'जन्म से ही तकलीफों में हूं, नौकरी के बहाने अधिकारियों ने रेप किया'- अंडमान पीड़िता की डराने वाली कहानी
आर्थिक तंगी के चलते 17 की उम्र से ही वो नौकरी कर रही थी और इसी जद्दोजहद में वह ऐसे लोगों के संपर्क में आ गई, जिन्होंने उसका रेप किया.
.webp?width=210)
ये कहानी उस पीड़िता की है, जिसने अंडमान और निकोबार के पूर्व प्रमुख सचिव जितेंद्र नारायण और श्रम आयुक्त आरएल ऋषि पर गैंगरेप और यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है. पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दायर की है. उसमें आरोप लगाया है कि नौकरी देने के बहाने नारायण और ऋषि ने उसका बलात्कार किया था. पुलिस ने शिकायत के 45 दिनों बाद 1 अक्टूबर को इस केस में FIR दर्ज की थी.
मामला सामने आने के बाद से ही पीड़िता के घर पर दिन-रात तीन पुलिसवालों का पहरा है.
केस के सामने आने के बाद 21 साल की पीड़िता ने इंडियन एक्सप्रेस की वरिष्ठ पत्रकार ऋतु सरीन से बात की.
रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़िता ने बताया कि जब वो दो साल की थी, तभी उसकी मां का देहांत हो गया था. उसके पिता ने कुछ महीनों में ही दूसरी शादी कर ली. बचपन भयावह तकलीफों में गुजरा. सौतेली मां ने पीड़िता का स्कूल छुड़वा दिया. पैसों की कमी के चलते पीड़िता को 17 की उम्र से ही काम शुरू करना पड़ा. वो एक डिपार्टमेंटल स्टोर में सेल्सगर्ल के रूप में काम करने लगी. उस समय उसे 7,000 रुपये हर महीने मिलते थे, जिसमें से उसकी सौतेली मां उसे 10 रुपये प्रतिदिन देती थी और बाकी पैसा अपने पास रख लेती थी.
घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी. ऐसे में पीड़िता को कई नौकरी बदलनी पड़ी. इसी दौरान वो संदीप सिंह उर्फ रिंकू नाम के एक शख्स के संपर्क में आई. वो एक होटल का मालिक था. रिंकू ने नौकरी दिलाने के बहाने पोर्ट ब्लेयर के दो बड़े अधिकारियों से उसका संपर्क कराया था.
पीड़िता ने कहा,
रिपोर्ट के मुताबिक, श्रम आयुक्त आरएल ऋषि कथित तौर पर नौकरी देने के बहाने पीड़िता को जितेंद्र नारायण के घर लेकर गया था, जहां दोनों ने लड़की का बलात्कार किया. पीड़िता ने बताया,
हालांकि पीड़िता को कभी कोई नौकरी नहीं मिली. रिपोर्ट के मुताबिक, लड़की ने बताया कि इसी साल जुलाई महीने में श्रम आयुक्त ने कहा था कि मुख्य सचिव का नई दिल्ली में तबादला कर दिया गया है और अब वह नौकरी नहीं दिला सकते हैं.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना के बाद पीड़िता ने आत्महत्या भी करने की कोशिश की थी, लेकिन उसके पति ने सही समय पर देख लिया और बचा लिया. फिलहाल इस मामले की जांच के लिए अंडमान और निकोबार की पुलिस ने एक एसआईटी गठित की है. वहीं जितेंद्र नारायण को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई है, जिसे केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन में चुनौती दी है.
वीडियो: प्रधानमंत्री मोदी के आने से पहले मोरबी सिविल हॉस्पिटल की रंगाई-पुताई, नई बेडशीट, नए वाटर कूलर

.webp?width=60)

