एक वीडियो वायरल हो रहा है, अमिताभ बच्चन की आवाज में. यूं तो अमिताभ की आवाज औरउनका चार्म ऐसा है कि किसी मरे हुए वीडियो या स्क्रिप्ट में भी जान फूंक दे. पर इसवीडियो में आप जिस अमिताभ को देखेंगे, वो एक स्टार नहीं, एक शरीर भी नहीं. एक आवाजहै, सच्चाई की. एक दिन आप 10 लड़कियों से मिलें. अलग-अलग काम करने वाली 10 लड़कियां.उनसे पूछिए, उन सभी बातों के बारे में, जो उनसे सुबह से शाम तक सिर्फ इसलिए कहीगईं, क्योंकि वो लड़कियां हैं. उन्हें जोड़ लीजिए. कानों में जो आवाज सुनाई पड़ेगी, वोकिसी औरत की या मर्द की नहीं, एक सोच की होगी. इन्हीं आवाजों को जमा किया है इसवीडियो ने. और लेकर आया है आपके सामने. ये आवाज है समझौते की एक आदत, एक तौर, एकतरीके की ये आवाज है औरत की ख़ामोशी की उससे रखी गई हर अनुचित उम्मीद की ये आवाज हैहम सबकी जिसे बोल के भी, हम सब चुप हैं. उसे बोलने दो. अब समझौता नहीं...लीजिए, पहले वीडियो ही देख लीजिए...https://www.youtube.com/watch?v=pd5PHICXi-8 कितने कमाल की बात है. रोज कही जानेवाली ये सब चीजें हमारे लिए इतनी नॉर्मल हैं कि इन्हें कहते या सुनते वक़्त हम सोचतेनहीं. किराए पर रह रहीं लड़कियों से अगर मकान-मालिक उनकी पर्सनल लाइफ के बारे मेंसवाल करते हैं, उनके बॉयफ्रेंड या पुरुष दोस्तों को उनके कमरे में आने नहीं देते,हम इसे बड़ा नॉर्मल समझते हैं. कहते हैं, वो तो दूसरी जनरेशन के हैं, उन्हें क्यापता. इसी तरह की हजारों बातों के साथ हम इतने सहज हो गए हैं, कि कभी इन पर सवालनहीं उठाते. ये वीडियो हमें बड़े अच्छे तरीके से याद दिलाता है हमारे मन में बसे वोस्टीरियोटाइप, जो हमने औरतों के लिए बनाए हैं. उन्हें मर्दों से कम आंकना, उन्हेंकम सैलरी देना सिर्फ इसलिए कि वो औरत हैं, अगर वो मोटी हैं और शॉर्ट ड्रेस में हैंतो छाती से लेकर जांघों तक उन्हें इस तरह घूरना कि वो अगली बार कभी छोटे कपड़े पहननेकी जुर्रत न करें. मीडिया में काम करने वाली औरतों को लुक डाउन कर देते हैं. औरत का'सिंगल' रहना पाप बना देना. बेटी सत्रह साल की हुई नहीं कि उसकी 'लड़कों वालीहरकतें' छुड़वा देना. खेलना-कूदना बंद करवा देना. कैद कर लेना उसे घर की चारदीवारोंमें. उसे आलू काटना और मटर छीलना सिखाना मां के लिए सिरदर्द बन जाना. पति के अपनीपत्नी का बैग उठा लेने पर उसे बुली करके मर्दानगी का पाठ पढ़ाना. कितनी आसानी से येस्टीरियोटाइप बन गए और अब कितना मुश्किल लग रहा है इन्हें तोड़ना. बस जरा सी मुश्किलहै. 'आई एम् फाइन, इट्स ओके' कहना बंद कीजिये. अपने औरत होने के नाम पर 'सॉरी'बोलना बंद कीजिये. फैज़ याद हैं? कहते थे, बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे, बोल ज़बां अबतक तेरी है.--------------------------------------------------------------------------------ये स्टोरी ज्योति ने की है.