'खतरनाक और मूर्खतापूर्ण', ईरान पर हमला करने वाले ट्रंप को लेकर अमेरिकी नेता क्या बोल रहे?
US Attacked Iran: अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला बोल दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के इस फैसले का उनके ही देश में विरोध होने लगा है.

अमेरिका और इजरायल ने मिलकर शनिवार, 28 फरवरी को ईरान पर सैन्य हमले किए, जिसमें शीर्ष ईरानी अधिकारियों को निशाना बनाया गया था. इस हमले के बाद प्रेसिडेंट ट्रंप ने ईरान की रिवॉल्युशनरी सेना को सरेंडर करने की चेतावनी दी और कहा कि अगर वो ऐसा नहीं करते हैं तो उनकी मौत पक्की है. अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपने इस सैन्य अभियान को ऑपरेशन एपिक फ्यूरी नाम दिया है. ईरान की ओर से भी इस हमले की जवाबी कार्रवाई की गई. इसके तहत ईरान ने इजराइल पर मिसाइलें दागीं. साथ ही आसपास के अमेरिकी ठिकानों पर भी बम बरसाए. मिडिल-ईस्ट में इस जंग के धमाकों की गूंज अरब देशों में भी सुनी गईं.
हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति के इस फैसले का उनके ही देश में विरोध होने लगा है. सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी के सबसे वरिष्ठ डेमोक्रेटिक नेता और वर्जीनिया के सीनेटर मार्क वॉर्नर ने इस हमले की संवैधानिकता पर सवाल खड़े किए हैं. CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार, 28 फरवरी को अपने बयान में वॉर्नर ने कहा कि अमेरिका का संविधान साफ कहता है कि देश को युद्ध में ले जाने का फैसला कांग्रेस का होता है. ऐसे में बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई शुरू करना खासतौर पर तब जब अमेरिका पर तुरंत कोई सीधा खतरा न हो, गंभीर कानूनी और संवैधानिक चिंता पैदा करता है.
डेमोक्रेटिक सीनेटर टिम केन ने भी शनिवार, 28 फरवरी को कहा कि ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले खतरनाक हैं. उन्होंने इसे गैर-जरूरी और मूर्खतापूर्ण भी बताया. उन्होंने कहा कि ये हमले बहुत बड़ी गलती हैं और वो दुआ करते हैं कि इससे अमेरिकी सैनिकों या दूतावासों में तैनात कर्मचारियों की जान को कोई खतरा न हो. टिम केन ने आगे कहा कि सीनेट को तुरंत फिर से बैठक बुलानी चाहिए और ‘War Powers Resolution’ पर वोट करना चाहिए ताकि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सेना के इस्तेमाल को रोका जा सके.
कनेक्टिकट के डेमोक्रेट नेता जिम हाइम्स ने ट्रंप की सैन्य कार्रवाई को ऐसी जंग बताया है, जिसका कोई साफ रणनीतिक लक्ष्य नहीं है. हाइम्स हाउस इंटेलिजेंस कमेटी में शीर्ष डेमोक्रेट हैं. उन्होंने ऐलान किया कि जब अगले हफ्ते ‘वॉर पावर्स रिज़ॉल्यूशन’ पर वोट होगा तो वह उसके समर्थन में वोट करेंगे.
डी-एरिजोना के सीनेटर रुबेन गैलेगो ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके ईरान पर हमले की निंदा की. उन्होंने लिखा कि हम अपने सैनिकों को मरने के लिए भेजे बिना भी लोकतंत्र आंदोलन और ईरानी लोगों का समर्थन कर सकते हैं. गैलेगो इन हमलों पर प्रतिक्रिया देने वाले सबसे पहले डेमोक्रेट्स में से एक हैं.
तेहरान पर हमले की खबरें सामने आने के तुरंत बाद ट्रंप की ही पार्टी के अमेरिकी सांसद थॉमस मैसी ने इसकी आलोचना की. वह लगातार ट्रंप के विरोध में बयान देने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि ये हमले ‘कांग्रेस द्वारा अधिकृत कार्रवाई’ नहीं हैं.
ट्रंप को समर्थन भी मिलाहालांकि, ट्रंप को अपने कई सांसदों का समर्थन भी मिला है. सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने ईरान पर हमले के बाद राष्ट्रपति के भाषण को मिडिल ईस्ट में बदलाव का ऐतिहासिक उत्प्रेरक बताया. उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि वह ट्रम्प के ईरानी सेना, आईआरजीसी और सुरक्षा बलों से हथियार डालने की चेतावनी को सपोर्ट करते हैं. आगे उन्होंने कहा कि जब ट्रम्प ने कहा कि वो 47 सालों में पहले राष्ट्रपति हैं जो ईरान की जनता के साथ खड़े हैं और उन्हें जरूरी सपोर्ट दे रहे हैं तो वो बिल्कुल सही हैं. हाउस मेजॉरिटी व्हिप टॉम एमर ने एक्स पर एक पोस्ट में इन हमलों को 'राष्ट्रपति ट्रम्प का एक साहसिक और निर्णायक कार्य' बताया.
रिपब्लिकन पार्टी की सांसद नैन्सी मेस ने भी हमले को अपना समर्थन व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि ईरानी शासन ने हाल के दिनों में अपने ही हजारों लोगों, पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के साथ अत्याचार किया है. उनका एकमात्र अपराध स्वतंत्रता की मांग करना था.
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