ताजमहल का फोटो, इंडिया की फ्री फ्लाइट, 2.4 लाख भी मिलेंगे, अमेरिका ने क्यों निकाला ये ऑफर?
American Anti-Immigration Policy: इस कैंपेन में अमेरिका ने भारत के अलावा चीन और कोलंबिया से आए लोगों को भी टारगेट किया है. ताजमहल की तरह अमेरिका ने अपने पोस्ट में कोलंबिया और चीन के मशहूर लैंडमार्क्स का भी इस्तेमाल किया है.

अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट (DHS) ने एक ऑफर निकाला, जिसमें भारत वापस जाने के लिए मुफ्त फ्लाइट दी जा रही है. इसके अलावा डिपार्टमेंट 2600 डॉलर यानी करीब 2.40 लाख रुपये भी दे रहा है. लेकिन राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की सरकार किसी को भारत भेजने के लिए इतनी बेताब क्यों है और वह पानी की तरह पैसा क्यों खर्च करने को तैयार है? ऑफर को और भी अट्रैक्टिव बनाने के लिए अमेरिका ने ताजमहल का एक पोस्टर भी इस्तेमाल किया है.
होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट (DHS) ने भारत के अलावा चीन और कोलंबिया के लिए भी ऐसा ही ऑफर निकाला है. माने फ्री फ्लाइट और लगभग 2.40 लाख रुपये. लेकिन, ये अमेरिका की एक स्ट्रेटेजी है, जो अमेरिका के अवैध अप्रवासियों से छुटाकारा पाने के उतावलेपन का दिखाता है.
डॉनल्ड ट्रंप ने दूसरा कार्यकाल संभालते ही बगैर कानूनी कागजात के अमेरिका में एंट्री करने वाले लोगों के खिलाफ सख्ती बरती है. ट्रंप शासन ऐसे लोगों को अमेरिका से बाहर भेजना चाहता है, जिन लोगों के पास अमेरिका में रहने का कानूनी आधार नहीं है.
इसी कवायद के चलते अमेरिका सेल्फ-डिपोर्ट स्कीम को काफी बढ़ावा दे रहा है. माने, अगर कोई अवैध अप्रवासी खुद सामने आकर अपने देश वापस जाना चाहता है, तो अमेरिका उसे खुशी-खुशी ऐसा करने देगा. अब एक कदम आगे बढ़ते हुए होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट (DHS) ने फ्री फ्लाइट और पैसा देना भी शुरू कर दिया है.

DHS ने X पर एक पोस्ट शेयर किया, जिसमें DHS ने उन लोगों के लिए घर वापसी के लिए फ्लाइट टिकट के साथ 2600 डॉलर (करीब 2.40 लाख रुपये) का पेमेंट देने का ऑफर दिया, जो कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन के CBP होम ऐप के जरिए खुद को रिपोर्ट करके सेल्फ-डिपोर्ट करना चुनते हैं.

लेकिन गौर करने वाली बात ये है कि ट्रंप सरकार ने भारत की गौरवशाली मुगलकालीन इमारत ताजमहल का इस्तेमाल माइग्रेशन के खिलाफ अपने कैंपेन के लिए किया है. उनका एंटी-माइग्रेशन कैंपेन सिर्फ अवैध अप्रवासी तक सीमित नहीं है. H-1B वीजा वाले भारतीय प्रोफेशनल्स और ग्रीन कार्ड होल्डर्स अमेरिका में नफरत की बढ़ती घटनाओं का सामना कर रहे हैं.

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 तक अमेरिका में बिना कानूनी कागजात के रहने वाले भारतीयों की अनुमानित संख्या लगभग 7.50 लाख थी. इसी कैंपेन में अमेरिका ने चीन और कोलंबिया से आए अवैध अप्रवासियों को टारगेट किया. ताजमहल की तरह अमेरिका ने अपने पोस्ट में कोलंबिया और चीन के मशहूर लैंडमार्क्स का भी इस्तेमाल किया है.
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