भुजंगी भाई जिन्दगी भर कहिते-कहिते अल्लाह मियां के पास पहुंच गए कि अमेरिका वालेसारे सब बहुत बदमाश होवत हैं. तब लगता था, भुजंगी भाई का कोई समझा दिहिस है कि जौनअमेरिका के ट्विन टॉवर गिरै वाला वीडियो झूठा है, इसी से वो ऐसा कहते हैं. पर अबसमझ आ गया है कि उनकी बात में कुछ न कुछ सच्चाई जरूर थी. एक ठो जांच चली है जिसनेअमेरिका की बदमाशी पर मुहर लगा दी है. पता चला कि अमेरिका ने 35 अरब 90 लाख रुपयेखर्च कर दिए आतंकवादी बनाने में. माने अमेरिका ने खुद ही अपने लिए आतंकवादी बनाए.पूरी कहानी जानने से पहले ये जान लो कि ये जांच की है संडे टाइम्स अखबार और ब्यूरोऑफ इंवेस्टिगेटिव जर्नलिज्म ने. इनके हिसाब से पीआर फिल्म बनाने वाली एक ब्रिटिशकंपनी को पेंटागन ने करीब 36 अरब रुपये दिए थे. जिस पीआर कंपनी को ये पैसे मिलेउसका नाम है बेल पोटिंगर. इन पैसों से पीआर कंपनी ने छोटी-छोटी टीवी फिल्में बनाईं.इन फिल्मों में अरब चैनल्स की नकल की गई थी. इस टीम का हिस्सा रहे एकएम्प्लॉयी मार्टिन वेल्स ने बताया कि इन झूठे वीडियोज के सहारे हम इनको देखकरइंस्पायर होने वाले आतंकियों को ट्रैक भी किया करते थे. बगदाद कैंप में अमेरिकीसेना के बड़े अफसरों ने भी पीआर टीम के साथ काम किया था, नकली वीडियो बनाने के लिए.ब्यूरो की रिपोर्ट में इस बात का भी दावा किया गया है.दुनिया के बड़े-बड़े लोगों के लिए काम कर चुकी है ये पीआर कंपनीइस फर्म के क्लाइंट सऊदी अरब सरकार, मार्गेट थेचर और चिली के डिक्टेटर ऑगस्टोपिंचेट के फाउंडेशन भी रह चुके हैं. रिपोर्ट का कहना है कि CIA और नेशनल सिक्योरिटीकाउंसिल और पेंटागन मिलकर ये काम करवा रहे थे. इनका मकसद था अलकायदा को निगेटिव शेडके साथ पेश करना. ताकि जब अलकायदा सिम्पेथैसाइजर इनके बनाए नकली वीडियो को देखें तोउनको ट्रैक करके पकड़ा जा सके. इन वीडियोज का एक काम इराक वालों का लोकतांत्रिकचुनावों के लिए मूड तैयार करना भी था.जान-बूझकर गंदी क्वालिटी का वीडियो बनाया जाता थाजो वीडियो बनाया जाता था, उसमें ये दिखाने की कोशिश होती थी कि ये अरेबिक टीवी सेआया हुआ वीडियो है. बम वगैरह फोड़ने की बाकायदा शूटिंग होती थी. ये वीडियो ईरान,सीरिया और अमेरिका में भी शूट किए जाते थे. और वीडियो जानबूझकर लो क्वॉलिटी काबनाया जाता था. ऐसा इसलिए किया जाता था कि ये न्यूज फुटेज की तरह लगे. कई बार शूटकरने के बाद भी वो अलकायदा की अलग-अलग फुटेज उसमें मिला देते थे. वेल्स को बतायागया था कि वो लोग चाहते थे कि वीडियो 10 मिनट का हो. ठीकठाक वीडियो इस तरह से बनादो. इतना ही नहीं इस बात पर भी नजर रखी जाती थी कि वीडियो को लोग देख रहे हैं यानहीं.पेंटागन अंदर ही अंदर बहुत खेल रचता हैपेंटागन ने अपने रिश्ते तो इस पीआर फर्म से मान लिए हैं. पर इस पूरे ऑपरेशन पर कुछभी कहने से इनकार कर दिया है. अमेरिकी कानून के हिसाब से प्रोपगेंडा फैलाना मना हैइसलिए पेंटागन ने इसके लिए एक बाहरी यानी इंग्लैण्ड की कंपनी का सहारा लियाथा. जो डॉक्यूमेंट मिले हैं, उनके हिसाब से 2007 से 2011 के बीच बेल पोटिंगर कोकरीब 36 अरब का कॉन्ट्रैक्ट मिला. यानी जबसे सरेआम इराक में जाके जम गए अंकल सैम,तभी से पीआर कंपनी का ये नकली आतंकी बनाने वाला काम स्टार्ट हो गया था. 2009 मेंपेंटागन पर कांट्रोवर्सियल पीआर फर्म रेंडन ग्रुप को भी जर्नलिस्ट की मॉनीटरिंग केलिए हायर करने का आरोप लगा था. ये पेंटागन ने इसलिए किया था कि अमेरिका के ईराकमिशन की पॉजिटिव कवरेज ही हो. ये भी पढ़ें -पाकिस्तान को क्रिकेट के मैदान में भी नीचे कर चोटी पर पहुंचा भारतक्या आपको पता है, ऐश्वर्या और रणबीर बहुत पहले से रिश्तेदार हैंदेश की पहली महिला ग्रेजुएट जिसे लोग वेश्या कहते थे