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US-ईरान दोनों कह रहे हमने बातचीत की पहल नहीं की, तो पाकिस्तान में मीटिंग करवा कौन रहा?

US-Iran के बीच बातचीत कराने के लिए Pakistan में एक मीटिंग बुलाने की कोशिश हो रही है. इसमें ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबफ और स्टीव विटकॉफ, जेरेड कुशनर और शायद अमेरिकी वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस शामिल हो सकते हैं.

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24 मार्च 2026 (अपडेटेड: 24 मार्च 2026, 10:38 AM IST)
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अमेरिकी मीडिया इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान की मीटिंग का दावा कर रहा है. (Reuters)
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अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग रोकने की कोशिशें तेज हो रही हैं. इस कवायद में पाकिस्तान बड़े रोल में नजर आ रहा है. एक इजरायली अधिकारी का कहना है कि पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि एक टेबल पर आ सकते हैं. मिस्र, तुर्की और पाकिस्तान की तरफ से अंदरखाने इस जंग को रोकने की मेहनत हो रही है, जिसका फल इस्लामाबाद की मीटिंग में मिलने की उम्मीद है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने खुद बताया है कि अमेरिका और ईरान के बीच डील को लेकर 'अच्छी बातचीत' चल रही है. इसलिए, ट्रंप ने अपने वॉर डिपार्टमेंट (रक्षा मंत्रालय) को ईरान के पावर प्लांट्स और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले पांच दिनों के लिए टालने का ऑर्डर दिया है. हालांकि, ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी बातचीत से पूरी तरह इनकार किया है.

डॉनल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उनके दूत ईरान के एक सीनियर अधिकारी से बात कर रहे हैं, और कई मुद्दों पर दोनों देश राजी हो गए हैं. ट्रंप के इस दावे से इजरायल भी हक्का-बक्का है. एक इजरायली अधिकारी ने अमेरिकी न्यूज वेबसाइट Axios को बताया कि अमेरिका के मिडिल ईस्ट के लिए दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर (डॉनल्ड ट्रंप के दामाद) ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबफ के संपर्क में थे.

हालांकि, ट्रंप ने गालिबफ का नाम लिया. उन्होंने कहा कि वे ईरानी अधिकारी का नाम इसलिए नहीं बताना चाहते क्योंकि कोई उन्हें जान से ना मार दे. ट्रंप ने कहा,

"हम एक ऐसे शख्स से बात कर रहे हैं जो मेरे हिसाब से सबसे ज्यादा इज्जतदार है, सुप्रीम लीडर नहीं, हमने उनसे बात नहीं की है."

डॉनल्ड ट्रंप के आम सहमति बढ़ने के दावों के बावजूद, बातचीत की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने कहा कि मोहम्मद बाघेर गालिबफ और डॉनल्ड ट्रंप की टीम के बीच अभी तक कोई सीधी बातचीत नहीं हुई है.

रिपोर्ट में इजरायली अधिकारी ने कहा कि अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत कराने वाले देश इस्लामाबाद में एक मीटिंग बुलाने की कोशिश कर रहे हैं. इस मीटिंग में तेहरान की तरफ से मोहम्मद बाघेर गालिबफ और दूसरे अधिकारी, और वाशिंगटन की तरफ से स्टीव विटकॉफ, जेरेड कुशनर और शायद वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस शामिल हो सकते हैं. शायद इस हफ्ते के आखिर में ये मीटिंग हो सकती है.

अधिकारी ने यह भी कहा कि इजरायल को वाशिंगटन और तेहरान के बीच इनडायरेक्ट बातचीत के बारे में पता था, लेकिन सोमवार, 23 मार्च को राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के बयान सुनकर वो हैरान था. अधिकारी ने कहा, "हमें नहीं पता था कि चीजें इतनी तेजी से आगे बढ़ रही हैं."

बातचीत से वाकिफ सूत्र ने कहा कि बातचीत में मोहम्मद बाघेर गालिबफ का शामिल होना उनकी सीनियरिटी और सरकार में उनकी क्रेडिबिलिटी की वजह से जरूरी है. गालिबफ इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) में एक पूर्व जनरल, तेहरान के पूर्व मेयर और नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के करीबी सहयोगी हैं.

यह भी पढ़ें- 'ईरान को रोकने में ट्रंप फेल', लादेन को मारने वाली टीम के हेड ने बताया अब कैसे बचेगी यूएस की इज्जत

ट्रंप ने एक और दावा ठोका

ईरान के साथ बातचीत के दावे ने डॉनल्ड ट्रंप का गोल पोस्ट बदलकर रख दिया है. जो ट्रंप आक्रामक रुख अख्तियार किए हुए थे, उन्हीं की तरफ से जंग रोकने और डील पर सहमति बनाने के लिए बातचीत की टेबल पर आना कई लोगों के गले नहीं उतर रहा है. डिप्लोमैटिक तौर पर इसे ट्रंप का पीछे हटना माना जा रहा है.

डॉनल्ड ट्रंप भी इससे अनजान नहीं हैं. सोमवार को अमेरिकी न्यूज चैनल CNN के साथ एक इंटरव्यू में ट्रंप ने दावा किया कि बातचीत के लिए तो ईरान ही आगे आया था. उसी ने डील पर बात करने की बात कही थी, वर्ना अमेरिका तो अपने रास्ते पर चल ही रहा था. CNN के रिपोर्टर से बात करते हुए ट्रंप ने कहा,

"(ईरान) उन्होंने फोन किया. मैंने फोन नहीं किया. उन्होंने फोन किया. वे एक डील करना चाहते हैं. और हम भी डील करने के लिए तैयार हैं. यह एक अच्छी डील होनी चाहिए. और इसमें कोई और युद्ध नहीं होना चाहिए, कोई और न्यूक्लियर हथियार नहीं होने चाहिए."

डॉनल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के पास अब न्यूक्लियर हथियार नहीं होंगे. ट्रंप ने दावा किया कि ईरान इस शर्त को मान रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर ईरान से जंग रुकी और सीजफायर हुआ तो इजरायल बहुत खुश होगा.

वीडियो: डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमला रोका, लेकिन 5 दिन ही क्यों?

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