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'निष्पक्ष नहीं, वो बस अमेरिका की तरफ से... ', ईरान ने पाकिस्तान का 'भेद' खोल दिया

America-Iran Peace Talk: ईरान के सांसद इब्राहिम रेज़ाई ने पाकिस्तान की भूमिका पर बड़े सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने साफ कहा क‍ि पाकिस्तान मध्यस्थ बनने के लायक नहीं है. इस बीच विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी ओमान के सुल्तान से मिले और कूटनीतिक कोशिशों पर बात की.

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आसिफ़ असरार
| शुभम कुमार
27 अप्रैल 2026 (पब्लिश्ड: 10:18 AM IST)
iran accused pakistan of failed association
ईरानी सांसद ने कहा कि पाकिस्तान निष्पक्ष मीडिएटर नहीं है. (फोटो- इंडिया टुडे)
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क्या पाकिस्तान, अमेरिका और ईरान के बीच ‘ब्रोकर’ बनने की कोशिश कर रहा है? लेकिन खुद ईरान को ही उस पर भरोसा नहीं है? मीड‍िएशन की पूरी कहानी पर अब सवाल खड़े हो गए हैं, और वो भी ईरान के अंदर से. पाकिस्तान की भूमिका पर बड़ा सवाल खड़ा किया है ईरान के सांसद इब्राहिम रेज़ाई (Ebrahim Rezaei) ने.  रेज़ाई, जो ईरान की नेशनल सिक्योरिटी और फॉरेन पॉलिसी कमीशन के प्रवक्ता भी हैं, उन्होंने साफ कहा क‍ि पाकिस्तान मध्यस्थ बनने के लायक नहीं है.

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा- 

‘पाकिस्तान एक अच्छा दोस्त और पड़ोसी है, लेकिन सही मध्यस्थ नहीं है. क्योंकि वो अक्सर अमेरिका के साथ खड़ा दिखता है. एक मीडिएटर को निष्पक्ष होना चाहिए.’

यानी, सीधा आरोप क‍ि पाकिस्तान निष्पक्ष नहीं है. रेज़ाई यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद खुलकर वॉशिंगटन की आलोचना करने से बचता है. यहां तक कि उन मुद्दों को भी नहीं उठाता, जहां अमेरिका पर वादाखिलाफी के आरोप हैं. जैसे, लेबनान का मामला या रोकी गई संपत्तियां. ये बयान ऐसे वक्त में आया है जब ईरान बातचीत का सिलसिला टूटने से बचाने की कोशिश में लगा है. 

दूसरी तरफ ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची लगातार एक्टिव हैं. वो हाल ही में तीन दिनों में दूसरी बार पाकिस्तान पहुंचे. यहां उन्होंने पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर से मुलाकात की और मौजूदा तनाव पर चर्चा की. इससे पहले वो प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ और अन्य अधिकारियों से भी मिल चुके हैं.

पीस डील से ईरान क्या चाहता है? 

पाकिस्तान आने से पहले अब्बास अराघची ओमान में थे, जहां उन्होंने ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक अल सईद से बातचीत की. ओमान में हुई इन चर्चाओं में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ की सुरक्षा और बड़े स्तर पर कूटनीतिक कोशिशों पर बात हुई. ईरानी मीडिया के मुताबिक, बातचीत सिर्फ न्यूक्लियर मुद्दे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें और बातें भी शामिल हैं. जैसे- 

# स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के लिए नया कानूनी ढांचा
# मुआवज़े की मांग
# आगे कोई सैन्य कार्रवाई न हो इसकी गारंटी
# और अमेरिका की समुद्री पाबंदियों को हटाने की बात

यानी बातचीत का दायरा काफी बड़ा है. पाकिस्तान से निकलने के बाद अराघची मॉस्को जाने वाले हैं, ताकि बातचीत चलती रहे. अब इस पूरे मामले पर अमेरिका का स्टैंड भी समझ लीजिए. 

प्रेसिडेंट ट्रंप का क्या रुख है?

अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने इस पूरी प्रक्रिया को लेकर अलग ही संकेत दिए हैं. एक इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने कहा, 'अगर वे बात करना चाहते हैं, तो हमें कॉल कर सकते हैं. हमारे पास सिक्योर लाइनें हैं.'

ट्रंप का ये बयान ऐसे वक्त में आया है जब अमेरिका ने अपनी पहल थोड़ी धीमी कर दी है. ट्रंप ने यहां तक कहा कि ये जंग जल्द खत्म हो सकती है और अमेरिका इसमें जीत सकता है. ट्रंप ने ये भी कहा क‍ि ‘ईरान में कुछ लोग समझदार हैं, कुछ नहीं. उम्मीद है ईरान समझदारी दिखाएगा.’ पहली बैठक में कोई रिजल्ट नहीं आया और दूसरे दौर की बैठक रद्द हो चुकी है. ऐसे में भरोसेमंद देश और मीड‍िएटर पाकिस्तान की भूमिका पर कई सवाल उठ रहे हैं. 

वीडियो: ट्रंप ने भारत को Hell-Hole कहा, भारत से पहले ईरान ने ही सुना दिया

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