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आपने सुल्तान फिल्म देखी है, उसमें बहुत सी बातें बकवास हैं!

जानिए ओलंपिक में कुश्ती दल के अगुआ को, जिसे पोडियम पर खड़े होकर दूसरे का राष्ट्रगान सुनना रास नहीं आता.

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26 जुलाई 2016 (अपडेटेड: 26 जुलाई 2016, 09:31 AM IST)
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Source-Reuters
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कुश्ती ख़बरों में हैं. सुल्तान के बहाने. नरसिंह यादव और उनके रूममेट का डोपिंग में नाम आता है तो सुगबुगाहट बढ़ जाती है. फिर सुशील कुमार भी तो नाराज बैठे हैं. इधर आमिर खान की दंगल भी आ रही है. वो भी कुश्ती पर ही है. कुश्ती का एक नाम है. योगेश्वर दत्त. 5 फुट 7 इंच के योगेश्वर के खाते में राष्ट्रमंडल खेलों के दो गोल्ड मेडल हैं. एक गोल्ड एशियाई खेलों का भी है. अबकी बार उनका चौथा और आखिरी ओलंपिक होगा. 2004 में पहली बार एथेंस ओलंपिक्स में हिस्सा लिया था तब 18 वें नंबर पर रहे थे. 2012 के लंदन ओलंपिक में उनने कांस्य जीता था. हालांकि कांसा उन्हें सुहाता नहीं. कहते हैं जब आप कांसा जीतते हैं तो पोडियम पर खड़े होकर किसी और देश का नेशनल एंथम सुनना पड़ता है. मैं अगले ओलंपिक में भारत का राष्ट्रगान सुनना चाहता हूं. उन्हीं योगेश्वर दत्त ने कुश्ती के ख़बरों में होने पर, फ़िल्मी कुश्ती पर इंडिया टुडे से एक इंटरव्यू में कहा.
"आपने सुल्तान देखी है? इसमें बहुत सी बातें एकदम बकवास हैं. आप बैलों से खेत जोतकर या ईंटों के बोझ के साथ सीढ़ियां चढ़कर मॉर्डन ओलंपिक की तैयारी नहीं कर सकते. आपको आज के खेलों को समझना होगा. 1940 के ये नुस्खे अब किसी काम के नहीं रह गए हैं."

सलमान इसके पहले भी उनके निशाने पर रह चुके हैं

salman yogesh

योगेश्वर दत्त कुश्ती के अलावा हाल ही में तब भी चर्चा में आए थे. जब जेएनयू में नारेबाजी के मौके पर उनने फेसबुक पर ये अपडेट लिखा था.

योगेश्वर हरियाणा के हैं. 2 नवंबर 1982 को सोनीपत जिले में जन्मे थे. आठ साल के थे तब से कुश्ती में हाथ आजमाना शुरू कर दिया था. पहले-पहल बलराज पहलवान से इंस्पायर हुए थे जो उन्हीं के गांव से ताल्लुक रखते हैं. उनके कोच रामफल हुआ करते थे, जिनसे उनने कुश्ती की ट्रेनिंग ली और कुश्ती के पैंतरे सीखे. अब तो वो अत्याधुनिक हाइपॉक्सिक चैंबर में प्रैक्टिस करते हैं. 2012 में योगेश्वर दत्त ने ओलंपिक मेडल फ्रीस्टाइल के 60 किलो वजन वर्ग के रेपेचेज प्ले ऑफ मुकाबले में जीता था. तब उनके सामने उत्तर कोरिया के जांग म्यांग री थे. उसके पहले वो बीजिंग ओलंपिक में भी पदक जीतते-जीतते रह गए थे. तब से पहले भी वो कई-कई मेडल जीत चुके थे. 2003 कॉमनवेल्थ कुश्ती चैंपियनशिप में उन्होंने गोल्ड मेडल जीता था. 2013 में ढेर सी चोटों के बाद वापसी की. इंचियॉन में सोना जीता. दोहा में हुए 15वें एशियन गेम्स में भी उन्होंने कांस्य पदक जीता था.
2006 में जब दोहा एशियाई खेलों में खेलने गए तो नौ दिन पहले ही उनने अपने पिता को खोया था. उस वक़्त उनके घुटने में भी चोट लगी थी. इस सबके बावजूद वो खेले और कांस्य पदक जीता.
India's Yogeshwar Dutt poses with his bronze medal at the podium of the Men's 60Kg Freestyle wrestling at the ExCel venue during the London 2012 Olympic Games ये उनका आखिरी ओलंपिक होगा. और उन्हें सोने के तमगे से कम कुछ मंजूर नहीं. लंदन का कांस्य जीतकर भी वो खुश नहीं हुए थे. लगा मानो कुछ हुआ ही नहीं. कुछ कमी सी लगती है उनको. सबकुछ बेमानी सा. ये एक खिलाड़ी की बैचेनी है. देश को भले उनकी 2012 की वो तस्वीर याद हो. जिसमें वो सूजी हुई आंख के साथ पोडियम पर खड़े पदक चूम रहे हैं, पर योगेश्वर को और ज्यादा लड़ना है. और ज्यादा जीतना है. उनका कहना है. "मैट पर उतरकर सामने वाले की आंख में देखते ही आपको पता चल जाता है, आप उससे जीतने वाले हैं या नहीं. इस बार मैं चाहता हूं. सामने वाला मेरी आंखों में देखते ही जान जाए, मैं जीतने के लिए आया हूं."

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