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दुनिया में ‘हसल पॉर्न’ नाम की नई बीमारी आई है, आप भी इसके शिकार तो नहीं?

'हसल पॉर्न' की आदत दिल की बीमारी भी साथ लेकर आती है.

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6 मार्च 2019 (अपडेटेड: 6 मार्च 2019, 07:11 AM IST)
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रेडिट के फाउंडर हसल पॉर्न पर काफी दिनों से बात कर रहे हैं
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आंत्रप्रेन्योर!  जिसका हिंदी मतलब होता है व्यवसायी. आज की तारीख में व्यवसायी से ज्यादा आंत्रप्रेन्योर वर्ड काफी पॉपुलर हो रहा है. युवाओं के बीच इस शब्द का खूब क्रेज़ बढ़ रहा है. आज ज्यादातर युवा आंत्रप्रेन्योर बनने का ही सपना देख रहे हैं. वो अपना खुद का व्यापार करना चाहते हैं. ये व्यवस्था इसीलिए ज्यादा फेमस हो रही है क्योंकि इस व्यवस्था में लोग खुद ही खुद के मालिक होते हैं. उनके ऊपर कोई बॉस नहीं होता है. उनकी शिफ्ट टाइमिंग नहीं होती है. उनके काम को चेक करने के लिए कोई क्वालिटी मैनेजर नहीं होता, किसी की डांट नहीं सुननी पड़ती है. छुट्टी के लिए किसी के पास कोई आवेदन नहीं देना होता.

लेकिन इस आंत्रप्रेन्योर वाली व्यवस्था में एक दिक्कत है, दिक्कत ये कि आज के दौर में कुछ भी आसानी से नहीं मिल जाता. मान कर चलिए कि आप आंत्रप्रेन्योरशिप के तहत किसी काम को शुरू करते हैं, तो उस काम को मुकाम तक पहुंचाने के लिए कई सैक्रिफाइज़ करने पड़ते हैं, बहुत मेहनत करनी पड़ती है. स्मार्ट डिसीज़न्स लेने पड़ते हैं. दिन-रात एक करके काम करना पड़ता है. कस्टमर में विश्वास जगाना होता है. तब जाकर कहीं उनका विश्वास आप पर बनता है. फिर जाकर आपका काम सफलता की एक सीढ़ी चढ़ पाता है.


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हसल पॉर्न जीवन के लिए ज़हर के जैसा काम करता है- एलेक्सिस ओहानियन (सांकेतिक तस्वीर)

ये सफलता वाली सीढी बहुत मेहनत करवाती है. इसमें लोग दिन को दिन और रात को रात नहीं समझते हैं, लगातार काम करते हैं. इस लगातार काम करने वाली प्रवृति को Hustle Porn का नाम दिया जा रहा है. Hustle Porn के मुद्दे पर गंभीरता से बात की है Reddit.com के फाउंडर एलेक्सिस ओहानियन ने. NBC न्यूज़ से बात करते हुए उन्होंने कहा-
आंत्रप्रेन्योर के मुद्दे पर लिखने वाले पता नहीं किस हद तक मेरी बात से सहमत होंगे, लेकिन ‘हसल पॉर्न’ आज की तारीख में अच्छी आदत नहीं है. आंत्रप्रेन्योर और आईटी सेक्टर में काम करने वाले लोग इसे बढ़ावा भी देते हैं, सक्सेस के लिए वो दिन-रात लगातार काम करते हैं. जो कि अच्छी बात नहीं है. तकनीक के क्षेत्र में ‘हसल पॉर्न’ बिल्कुल ज़हरीले पदार्थ की तरह काम करता है, जिसकी वजह से लोगों की शारीरिक और मानसिक सेहत पर काफी बुरा असर पड़ता है.
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आंत्रप्रेन्योर और आईटी सेक्टर के लोग काफी लंबे वक्त तक काम करते हैं- एलेक्सिस ओहानियन

PNAS यानी प्रोसिडिंग ऑफ द नेशनल एकैडमी ऑफ साइंसेस की स्टडी के मुताबिक इस कल्चर की वजह से लोगों की ज़िंदगी डिसबैलेंस यानी कि असंतुलित हो जाती है. PNAS की स्टडी के मुताबिक लोगों को समय, स्वास्थ्य और रिश्तों के बीच एक बैलेंस बनाकर रखना बहुत ज़रूरी है, जो तरक्की की सीढ़ी चढने में मदद करता है. स्टडी के मुताबिक लोग काम के चक्कर में तीनों के बीच का बैलेंस बिगाड़ लेते हैं. नींद में भी कटौती करते हैं. जिसका सीधा असर सेहत पर पड़ता है. स्टडी के मुताबिक कम नींद लेने की वजह से कार्डियोवस्क्यूलर यानी कि सीने से जुड़ी बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती है.

कई साइंटिफिक स्टडी में ये बात सामने आ चुकी है कि ज्यादा देर तक काम करने से ना सिर्फ क्रियेटिविटी घटती है, बल्कि प्रोडक्टिविटी भी कम हो जाती है. एक रिसर्च के मुताबिक जो इंसान सप्ताह भर में 70 घंटे काम करता है, उसकी प्रोडक्टिविटी उतनी ही रहती है जितनी कि 55 घंटे काम करने वाले लोगों की होती है.

तो कुल मिलाकर यही कहना चाहेंगे कि काम कीजिए. दबाकर कीजिए. लेकिन काम के चक्कर में सेहत मत बिगाड़ियेे. अक्सर ये कहा जाता है कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है. इसीलिए इस बात का खास ख्याल रखिए.




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