बावर्ची ने CM से कहा, गांव में पुल नहीं है, CM ने बनवा दिया
'डर लगता था, पर एक दिन खाना परोसते समय उनसे कह दिया.'
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फोटो - thelallantop
गोमती नदी के किनारे बसे सुनवा गांव में हाल ही में एक नया पुल बनवाया है UP सरकार ने. ये पुल गांव को नदी के पार वाले गांवों से जोड़ता है. इसके अलावा वहां एक गर्ल्स इंटर कॉलेज और एक हेल्थ सेंटर की नींव रखी गई है. गांव वाले खूब खुश हैं. और शुक्रिया कह रहे हैं. लेकिन CM अखिलेश यादव को नहीं. फिर किसे?
अखिलेश यादव के रसोइया को. जो 50 साल के हैं. और CM के सरकारी घर में अपनी 20 साल की बेटी और दो बेटों के साथ रहते हैं.
द इंडियन एक्सप्रेस की इस खबर के मुताबिक अखिलेश यादव के कुक सुंदर लाल मौर्य इसी गांव से आते हैं. 20 सालों से उनके घर में खाना पका रहे हैं. जाहिर सी बात है, अखिलेश की फैमिली से घुले-मिले हैं. तो गांव वालों ने सुंदर से कहा, कि वो मुख्यमंत्री से गांव में पुल बनवाने की बात करें. सुंदर कहते हैं “जब गांव वाले मेरे पास आए, मैं अखिलेश जी से बात करने को तैयार नहीं था. डर लगता था कि डांट पड़ जाएगी. फिर एक दिन खाना परोसते समय मैंने हिम्मत जुटाई. और गांव के विकास की बात की. मुख्यमंत्री जी ने फ़ौरन गांव का सर्वे करवाया. और आधिकारिक रूप से हरी झंडी मिलते ही काम शुरू हो गया."
सुनवा गांव की जनसंख्या 4 हजार लोगों की है. जिनमें से अधिकतर लोग अन्य पिछड़ी जातियों से हैं. फैजाबाद के इस गांव और अमेठी में एक नदी भर का फासला है. इस पुल के बनने से दोनों के बीच की दूरी 70 किलोमीटर से घट कर 10 किलोमीटर हो गई है.
गांव के प्रधान शेर बहादुर सिंह बमबम हो गए हैं. उन्होंने कहा, 'सुंदर अपने लिए कुछ भी मांग सकते थे अखिलेश जी से. पर उन्होंने गांव के हित में मांग की. ये पुल सिर्फ हमारे ही नहीं, पड़ोस के गांवों की भी मदद करेगा. हम सालों से अफसरों और नेताओं से कह कह कर थक गए थे. कि यहां लड़कियों का स्कूल बनवा दें. बेटियों को 25 किलोमीटर दूर रुदौली तहसील तक जाना पड़ता था पढ़ने के लिए.
सुंदर लाल मौर्य कहते हैं, "कोई काम छोटा नहीं होता. देखो, मेरे खाना बनाने से गांव में विकास हो गया." इधर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी माना कि समस्या पर उनकी नज़र तभी गई, जब उनके कुक ने उनसे इसके बारे में बताया. मजाक करते हुए कहा, "अगर अपने कुक की नहीं सुनता, तो घर पे खराब खाना मिलता."
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