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"सेकुलर लोग चुप्पी साधे हुए हैं" - मुस्लिम लॉ बोर्ड ने ज्ञानवापी केस पर कही बड़ी बात!

कैसा जन आंदोलन शुरू करने की बात हो रही है?

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19 मई 2022 (अपडेटेड: 19 मई 2022, 05:29 PM IST)
All India Muslim Personal Law Board meeting on Gyanvapi
ज्ञानवापी पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक हुई (मस्जिद की फाइल फोटो और बोर्ड के मीटिंग की प्रेस रिलीज)
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ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (All India Muslim Personal Law Board) ने बताया कि उसने ज्ञानवापी (Gyanvapi) जैसे मस्जिद से जुड़े सभी मुकदमों के लिए एक लीगल कमिटी बनाई है. ये कमिटी इस तरह के मामलों में जरूरी कार्रवाई करेगी. बोर्ड ने 17 मई की रात एक ऑनलाइन इमरजेंसी मीटिंग की थी. बोर्ड की ओर से जारी प्रेस रिलीज में बताया गया कि इस मीटिंग में ज्ञानवापी मस्जिद और देश की दूसरी मस्जिदों और इमारतों को लेकर सांप्रदायिक रवैये पर विचार किया गया.

सरकार और अदालत के रवैये पर सवाल

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की मीटिंग में कहा गया,

एक ओर नफरत फैलाने वाली शक्तियां पूरी ताकत के साथ झूठा दुष्प्रचार कर रही हैं और मुसलमानों को पवित्र स्थानों को निशाना बना रही हैं. दूसरी ओर केंद्र सरकार और राज्य सरकारें, जिन पर संविधान और कानून को लागू करने की जिम्मेदारी है, मूक दर्शक बनी हुई हैं. जो राजनीतिक दल खुद को सेकुलर और न्यायप्रिय कहते हैं, वे भी चुप्पी साधे हुए हैं. उन्हें इस मसले पर अपना पक्ष साफ करना चाहिए.

बैठक में उम्मीद जताई गई कि पर्सनल लॉ बोर्ड के लोग जल्द ही अपना पक्ष रखेंगे और देश के संविधान और धर्मनिरपेक्षता की सुरक्षा के लिए आवाज़ उठाएंगे.

मस्जिदों से जुड़े मुकदमों के लिए बनाई गई कानूनी कमिटी क्या करेगी?

बोर्ड ने पूजा स्थलों से जुड़े 1991 के कानून और बाबरी मस्जिद से जुड़े फैसले में उस कानून की पुष्टि को लेकर विचार करने के लिए एक कानूनी कमिटी बनाई है. कमिटी में जस्टिस शाह मुहम्मद कादिरी, यूसुफ हातिम मछाला, एमआर शमशाद, फुजैल अहमद अय्यूबी, ताहिर एम हकीम, न्याज़ फ़ारुकी, डॉ. सैयद कासिम रसूल इलयास और कमाल फारुकी को शामिल किया गया है. ये कमिटी मस्जिद से जुड़े सभी मुकदमों का जायजा लेगी और प्रभावी ढंग से कार्रवाई करेगी.

बोर्ड की बैठक में तय किया गया कि जरूरत पड़ने पर शांतिपूर्ण जन आंदोलन भी शुरू किया जा सकता है. ये भी तय किया गया कि बोर्ड हिंदुओं और दूसरे अल्पसंख्यक वर्गों को भरोसे में लेकर धर्मस्थलों के सम्मान और सुरक्षा को लेकर जनजागरुकता अभियान चलाएगा. वहीं सरकार से मांग की गई है कि 1991 के पूजास्थल कानून के बारे में वो अपना पक्ष स्पष्ट करे. बैठक में बोर्ड ने मस्जिदों के खतीबों और उलमा से अपील की है कि वे आने वाले तीन हफ्ते में मस्जिद के महत्व, शरीयत में उसकी जगह और मस्जिद की सुरक्षा जैसे विषयों पर जागरुकता लाएं. वहीं मुसलमानों से अपील की गई है कि वे धैर्य से काम लें और लोगों के सामने अपना पक्ष रखें. 

वीडियो- ज्ञानवापी मस्जिद की सर्वे रिपोर्ट दाखिल होने के बाद भी सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई क्यों टाल दी?

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