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SIMI के 29 संदिग्धों के भागने की तैयारी के सबूत मिले!

बैरक में कागज के टुकड़ों पर उनके छिपने का पूरा प्लान मिला था.

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जेल तोड़के फरार हो गए थे.
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आशुतोष चचा
3 नवंबर 2016 (Updated: 3 नवंबर 2016, 08:39 AM IST)
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ये हफ्ता इन्हीं के हलगुम्मे में तो निकल रहा है. एनकाउंटर पर गरम पॉलिटिक्स के बीच भोपाल से एक और खबर आई है. कि जो कथित SIMI मेंबर मार दिए गए वो तो सिर्फ आठ थे. लेकिन बाकी 29 के भागने का भी फुल प्रूफ प्लान था. इसी जेल में एमपी का SIMI चीफ अबू फैजल भी था. वो भी निकलने वाला था जुगाड़ से. साबुन पर चाबियों के निशान, 17 नकली चाबियां, जेल रजिस्टर पर हिंदी और अंग्रेजी में पैर से लिखा (माने घटिया राइटिंग) 'हम दीपावली पर आ रहे हैं.' ये सारी चीजें नई तफ्तीश में सामने आई हैं. इस रिपोर्ट के हिसाब से ब्लॉक बी से भागे थे ये आठों लोग. भागने से पहले ये ब्लॉक ए की तरफ गए. उसमें बंद लोगों को छुड़ाने. अबू फैजल भी इसी ब्लॉक में था. लेकिन हेड कॉन्स्टेबल रमाशंकर यादव और कॉन्स्टेबल चंदन सिंह ने अटका लिया. लड़ाई हुई जिसमें रमाशंकर की जान लेकर ये फरार हो गए. ऐसा माना जा रहा है कि इन लोगों ने भागने की प्लानिंग तब की होगी, जब ये जेल अस्पताल में भर्ती थे. ए और बी ब्लॉक के लोग एक साथ. जांच में ब्लॉक बी से कागज के छोटे मुड़े-तुड़े टुकड़े मिले हैं. जिसमें पहाड़ी के नक्शे थे. उर्दू में कुछ इबारत लिखी थी. जांच करने वालों के हिसाब से वो इसी पहाड़ी पर कुछ दिन छिपने वाले थे. कुछ सूखा खाना मिला, जो छिपने के दौरान काम आता. अब दूसरी तरफ का पक्ष सुनो. मारे गए आठों में से सात का केस लड़ रहे थे परवेज आलम. उन्होंने कुछ सवाल उठाए हैं और इस एनकाउंटर को नकली बताया है. कहा कि जेल के CCTV तो खराब बताए गए हैं. लेकिन अगर फुटेज सामने आए तो सारा खेल खुल जाएगा. हिंदुस्तान टाइम्स अखबार को कुछ पॉइंट्स बताए हैं. पढ़ो:

आठों को लगी कमर के ऊपर गोली

आलम ने बुधवार को बताया कि मारे गए सारे लोगों को कमर के ऊपर गोली मारी गई थी. ज्यादातर को सिर पर और छाती में. ऐसा लगा कि सामने से फायर किये गए हों. ऐसा हो सकता है कि उन्होंने हेड कॉन्स्टेबल का मर्डर किया हो. लेकिन उसके बाद का काम मतलब एनकाउंटर स्क्रिप्टेड है.

सीनियर अफसरों के बयान मैच नहीं कर रहे

ऐसा लगता है कि या तो बिना तैयारी के बयान दिए गए. या गलत बयान दिए गए. आईजी चौधरी ने कहा कि कैदी बेडशीट के सहारे भागे. लेकिन जेल में बेडशीट मिलती ही नहीं. ब्लैंकेट मिलते हैं. और सबसे अजीब है टूथब्रश से चाबी बनाकर ताले खोलना. कोई कैसे यकीन करे इस पर?

भागकर एक साथ क्यों रहे?

अजीब तो ये भी है कि ये अलग क्यों नहीं हुए. इनमें से चार पहले भी भाग चुके थे. लेकिन तब वो गुट से बिखरकर भागे थे. दूसरी बात वो सुबह 10 से 11 बजे के बीच मारे गए. मतलब पहले 7-8 घंटे थे उनके पास. चाहते तो भोपाल जिला क्रॉस कर सकते थे. क्या करते रहे वो?
स्टेट के एंटी टेरर स्क्वॉड मुखिया संजीव शामी ने एक टीवी चैनल को बताया कि ये SIMI मेंबर बिना हथियारों के थे. ये भी कहा कि इस एनकाउंटर में किसी पुलिस वाले को जरा भी चोट नहीं आई. जबकि आईजी योगेश चौधरी ने कहा कि दो लोगों को चोट आई थी.
परवेज आलम ने कहा कि वो पिटीशन दायर करने जा रहे हैं. इसकी पूरी जांच के लिए. कोशिश करेंगे कि जांच हाईकोर्ट जज या CBI करे.
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