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AMU टीचर्स ने हिंसा को लेकर की CBI जांच की मांग

कैंपस में दो गुटों के बीच फायरिंग में गई 2 लोगों की जान. 50 राउंड गोलियां चली. पढ़िए पूरा मामला.

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फोटो - thelallantop
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विकास टिनटिन
25 अप्रैल 2016 (अपडेटेड: 26 अप्रैल 2016, 09:49 AM IST)
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देश की एक बड़ी सेंट्रल यूनिवर्सिटी में बवाल हुआ. दो गुट आपस में भिड़ गए. यूनिवर्सिटी कैंपस, प्रॉक्टर ऑफिस और हॉस्टल के कमरे में आग लगी दी गई. फायरिंग में 2 लोगों की जान चली गई. अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में शनिवार से लेकर रविवार तड़के तक खूब बवाल रहा. जानिए क्यों अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी कैंपस में इतना बवाल हुआ और क्यों इन 'बदमाश स्टूडेंट्स' के मचाए बवाल पर इतनी चुप्पी है? अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (AMUTA) ने सीबीआई जांच की मांग की है. AMUTA ने कैंपस में हुई हिंसा को लेकर बैठक की. बैठक में पारित प्रस्ताव के आरोप के मुताबिक, कैंपस में हुई हिंसा प्रशासन में वर्चस्व की लड़ाई का नतीजा है.
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लफड़े की शुरुआत कहां से? शनिवार की शाम थी. यूनिवर्सिटी में एमए के पॉलिटिकल साइंस का स्टूडेंट मोहसिन इकबाल मुमताज हॉस्टल के पास से गुजर रहा था. तभी एक दूजे लड़के जैद शेरवानी ने मोहसिन को रोक लिया. पुलिस को अपनी शिकायत में मोहसिन ने कहा, 'जैद ने तमंचा दिखाकर मुझसे 1300 रुपये लूट लिए. कई स्टूडेंटस ने मेरे हॉस्टल के कमरे में आकर आगजनी की.'
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वहां मौजूद चश्मदीदों के मुताबिक, 'फायरिंग रुकने के बाद भीड़ प्रॉक्टर ऑफिस की तरफ तेजी से बढ़ी. और वहां रखे डॉक्यूमेंट्स जला दिए. सूत्रों के मुताबिक, यूनिवर्सिटी कैंपस के सिक्योरिटी गार्ड्स ने खुद को अंदर बंद कर लिया. भीड़ ने कैंपस में खड़ी कार को भी आग लगा दी. द इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर जमीर उद्दीन शाह ने कहा, 'यूनिवर्सिटी कैंपस में फायरिंग दरअसल दो पुराने ग्रुप्स के बीच की दुश्मनी है. गुटबाजी की वजह से ये बवाल हुआ है.' पुलिस ने बताया कि फायरिंग करने वाले 6 स्टूडेंट्स की पहचान कर ली गई है. पुलिस ने यूनिवर्सिटी प्रशासन से सीसीटीवी फुटेज मुहैया कराने की अपील की है. कौन थे मरने वाले लोग? अलीगढ़ यूनिवर्सिटी कैंपस में मेहताब और मोहम्मद वकीफ की मौत हुई. 22 साल का मेहताब अनुशासनहीनता की वजह से पिछले साल यूनिवर्सिटी से निकाला गया था. जबकि 18 साल का मोहम्मद वकीफ यूनिवर्सिटी कैंपस के पास अपने परिवार के साथ रहता था. वकीफ ने 12वीं तक पढ़ाई की थी.
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पुलिस के सामने भी होती रही धांय-धांय यूनिवर्सिटी कैंपस में फायरिंग कुछ इस कदर हुई कि जब पुलिस पहुंची, तब भी फायरिंग जारी रही स्टूडेंट्स की. दैनिक जागरण की खबर के मुताबिक, कैंपस में फायरिंग की शिकायत सुनकर शहर के 15 थानों की पुलिस कैंपस पहुंची थी. लेकिन पुलिस कुछ समझ ही नहीं पा रही थी कि फायरिंग रोकने के लिए क्या किया जाए. फिर बाद में रैपिड एक्शन फोर्स को बुलाया गया, जब जाकर मामला कुछ हद तक शांत हुआ.
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किस्सों की मानें तो एक दौर था, जब कैंपस में तमंचों का दौर हुआ करता था. कुछ लोगों का कहना है कि लाइब्रेरी में किताब निकालने के लिए हाथ बढ़ाओ तो कट्ट गिर जाता था. हालांकि ये एक किस्सा ही है. पर अब जब दिन दहाड़े कानून को ताक पर रखके यूनिवर्सिटी कैंपस में ये सब बवाल हुआ है तो मी़डिया से लेकर यूनिवर्सिटी और पढ़े लिखे लोग इस पर चुप हैं.

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