देश की एक बड़ी सेंट्रल यूनिवर्सिटी में बवाल हुआ. दो गुट आपस में भिड़ गए.यूनिवर्सिटी कैंपस, प्रॉक्टर ऑफिस और हॉस्टल के कमरे में आग लगी दी गई. फायरिंग में2 लोगों की जान चली गई. अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में शनिवार से लेकर रविवारतड़के तक खूब बवाल रहा. जानिए क्यों अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी कैंपस में इतनाबवाल हुआ और क्यों इन 'बदमाश स्टूडेंट्स' के मचाए बवाल पर इतनी चुप्पी है? अलीगढ़मुस्लिम यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (AMUTA) ने सीबीआई जांच की मांग की है. AMUTAने कैंपस में हुई हिंसा को लेकर बैठक की. बैठक में पारित प्रस्ताव के आरोप केमुताबिक, कैंपस में हुई हिंसा प्रशासन में वर्चस्व की लड़ाई का नतीजा है. लफड़े कीशुरुआत कहां से? शनिवार की शाम थी. यूनिवर्सिटी में एमए के पॉलिटिकल साइंस कास्टूडेंट मोहसिन इकबाल मुमताज हॉस्टल के पास से गुजर रहा था. तभी एक दूजे लड़के जैदशेरवानी ने मोहसिन को रोक लिया. पुलिस को अपनी शिकायत में मोहसिन ने कहा, 'जैद नेतमंचा दिखाकर मुझसे 1300 रुपये लूट लिए. कई स्टूडेंटस ने मेरे हॉस्टल के कमरे मेंआकर आगजनी की.' यूनिवर्सिटी कैंपस में मौजूद एक कर्मचारी ने कहा, 'अपने साथ हुईमारपीट को लेकर मोहसिन यूनिवर्सिटी प्रॉक्टर के ऑफिस आया, लेकिन तभी दूसरी तरफ केकरीब 30 से 40 लोग मोटरसाइकिल पर आ गए. इन सभी लोगों के पास हथियार थे. थोड़ी देरमें दोनों तरफ के लोगों ने फायरिंग शुरू कर दी. करीब 30 राउंड फायरिंग हुई. क्योंकिइन लड़कों के पास हथियार थे, इसलिए हम लोग कुछ नहीं कर पाए.' वहां मौजूद चश्मदीदोंके मुताबिक, 'फायरिंग रुकने के बाद भीड़ प्रॉक्टर ऑफिस की तरफ तेजी से बढ़ी. औरवहां रखे डॉक्यूमेंट्स जला दिए. सूत्रों के मुताबिक, यूनिवर्सिटी कैंपस केसिक्योरिटी गार्ड्स ने खुद को अंदर बंद कर लिया. भीड़ ने कैंपस में खड़ी कार को भीआग लगा दी. द इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर जमीरउद्दीन शाह ने कहा, 'यूनिवर्सिटी कैंपस में फायरिंग दरअसल दो पुराने ग्रुप्स के बीचकी दुश्मनी है. गुटबाजी की वजह से ये बवाल हुआ है.' पुलिस ने बताया कि फायरिंग करनेवाले 6 स्टूडेंट्स की पहचान कर ली गई है. पुलिस ने यूनिवर्सिटी प्रशासन से सीसीटीवीफुटेज मुहैया कराने की अपील की है. कौन थे मरने वाले लोग? अलीगढ़ यूनिवर्सिटी कैंपसमें मेहताब और मोहम्मद वकीफ की मौत हुई. 22 साल का मेहताब अनुशासनहीनता की वजह सेपिछले साल यूनिवर्सिटी से निकाला गया था. जबकि 18 साल का मोहम्मद वकीफ यूनिवर्सिटीकैंपस के पास अपने परिवार के साथ रहता था. वकीफ ने 12वीं तक पढ़ाई की थी. पुलिस केसामने भी होती रही धांय-धांय यूनिवर्सिटी कैंपस में फायरिंग कुछ इस कदर हुई कि जबपुलिस पहुंची, तब भी फायरिंग जारी रही स्टूडेंट्स की. दैनिक जागरण की खबर केमुताबिक, कैंपस में फायरिंग की शिकायत सुनकर शहर के 15 थानों की पुलिस कैंपस पहुंचीथी. लेकिन पुलिस कुछ समझ ही नहीं पा रही थी कि फायरिंग रोकने के लिए क्या किया जाए.फिर बाद में रैपिड एक्शन फोर्स को बुलाया गया, जब जाकर मामला कुछ हद तक शांत हुआ.बताते हैं कि स्टूडेंट्स प्रॉक्टर ऑफिस से इमरजेंसी गेट तक फायरिंग करते जा रहे थे.पुलिस देखे जा रही थी. कैंपस के पास जज की कार तक तोड़ दी गई. बदमाश स्टूडेंट्स कीफायरिंग में दरोगा चंद्रशेखर को भी छर्रे लगे. एक रिपोर्ट के मुताबिक, कैंपस मेंकरीब 50 राउंड फायरिंग हुई है. पर इस बवाल के बावजूद देश का बुद्धिजीवी वर्ग चुपहै. अलीगढ़ यूनिवर्सिटी से जुड़े नामी लोग भी इस पर चुप्पी बनाए हुए हैं. किस्सोंकी मानें तो एक दौर था, जब कैंपस में तमंचों का दौर हुआ करता था. कुछ लोगों का कहनाहै कि लाइब्रेरी में किताब निकालने के लिए हाथ बढ़ाओ तो कट्ट गिर जाता था. हालांकिये एक किस्सा ही है. पर अब जब दिन दहाड़े कानून को ताक पर रखके यूनिवर्सिटी कैंपसमें ये सब बवाल हुआ है तो मी़डिया से लेकर यूनिवर्सिटी और पढ़े लिखे लोग इस पर चुपहैं.