बादल साहब, गाने पर नहीं ड्रग स्मगलिंग पर एक्शन लीजिए
'सुखबीर बना दुखबीर, प्रकाश अंधेरा करने लगा', ऐसा गा रहे हैं कुमार विश्वास
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फोटो - thelallantop
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पंजाब विधानसभा चुनाव सिर पर हैं. पार्टियों का प्रचार भी ज़ोरों-शोरों पर है. ऐसे में आम आदमी पार्टी ने अपना एक पुराना पैंतरा खेला है. गाना. जी हां गाना. दिल्ली चुनावों के टाइम पर '5 साल केजरीवाल' खूब चला था. और इस बार AAP ने बादल सरकार पर निशाना साधते हुए एक गाना रिलीज़ किया है. कुमार विश्वास की आवाज़. बोल हैं 'ओए छड दे पुड़िया जट्टा, तेरी गुड़िया करे पुकार'. नशे के मुद्दे पर बना ये गाना आने वाले दिनों में पंजाब चुनाव में AAP एंथम भी हो सकता है.
https://www.youtube.com/watch?v=Ifsm5aZGh3Q
कैसा है गाना?
एक यूपी का आदमी, जिसे पहले कभी पंजाबी बोलते हुए भी नहीं सुना, वो गाएगा ऊंची हेक में पंजाबी गाना? बड़ा डाउटफुल सा लगा. प्ले किया तो फनी लगा. क्योंकि बड़े ही हल्के से विज़ुअल्स थे और कुमार का एक्सेंट भी नॉन-पंजाबी जान पड़ रही थी. लेकिन ऐसा सिर्फ पहली दो लाइनों में ही हुआ.
क्या हुआ दो लाइनें सुनने के बाद?
गाने की तीसरी लाइन आई 'जद नशे दे कारोबार होए', ये लाइन काफी थी सीरियस करने के लिए. और ध्यान कुमार की गायकी से हट के उसके कंटेंट पर चला गया. जो गाना कुछ देर पहले चेहरे पर हल्की सी मुस्कान लेकर आ रहा था, पता ही नहीं चला कि कब माथे पर सिलवटें ले आया. सिलवटें तो पड़नी जायज ही हैं, जब कोई आपको आपके पंजाब की असलियत से रू-ब-रू करवाए. वो असलियत जिसमें डूबा जा रहा है पंजाब. हां वही हंसता-खेलता, हरा-भरा पंजाब. जो थोड़ी बहुत खुशहाली पंजाब में नज़र आती भी है, वो NRI भाई या वहां के महनती लोगों की देन है. वरना सरकारों ने तो कोई कसर नहीं छोड़ी लूटने में.
क्या है गाने में?
गाने में बादल सरकार पर वार किया गया है. प्रदेश की बदहाली के लिए ज़िम्मेदार ठहराया गया है. और मेन फोकस है नशे की लत पर. होना भी चाहिए. पूरा यूथ खराब कर दिया है इस लत ने. लेकिन सरकार पिछले 10 साल में कुछ नहीं कर पाई. जब भी जवाब मांगा जाता तो कहते कि सरहद पार से आता है, केंद्र सरकार को कुछ करना चाहिए. तो आप क्या करेंगे बादल साहब? आपसे तो ये भी नहीं हुआ कि जब तस्कर जगदीश भोला ने आपके बेटे के साले बिक्रम मजीठिया का खुलेआम नाम लिया तो उसको कैबिनेट से हटा देते. गाने में कुमार विश्वास बाप-बेटे(प्रकाश और सुखबीर) का नाम लेकर उन पर आरोप भी लगा रहे हैं.
अब आगे क्या?
विरोध करेंगे अकाली. केस भी कर सकते हैं. ऐसा कह रहे हैं अकाली लीडर संता सिंह उमैदपुरी. कुछ नहीं मिला तो बोले की गाने में जट्टा शब्द कह कर कुमार ने जट्ट कौम को बेइज़्ज़त किया है. साहब बेइज़्ज़ती नहीं, वो असलियत है आज के पंजाब की और वहां के लोगों की. और आपको जट्टों की इतनी ही फिक्र होती है तो क्यों नहीं इस नशे की स्मग्लिंग को बंद करने के लिए कुछ करते. और फिर कर दो इन कुमार विश्वास जैसे कवि/गायकों के मुंह बंद. पर नहीं, आपको तो सिर्फ वोट से मतलब है. गाने में पंजाब की बेइज़्ज़ती नहीं दिखती आपको, सिर्फ जट्टों की नज़र आती है.
वैसे ही जैसे अकाली देल के नेता पिछले दिनों दिलजीत दोसांझ को कोस रहे थे. दिलजीत की फिल्म आ रही है 'उड़ता पंजाब', नशे की लत के मुद्देपर. अकाली लीडर विरसा सिंह वलटोहा का कहना था कि जो दिलजीत अपने गानों में शराब पीने की बात करते हैं वो तो नशे के खिलाफ मुहिम ना ही चलाएं.
क्या हुआ दो लाइनें सुनने के बाद?
गाने की तीसरी लाइन आई 'जद नशे दे कारोबार होए', ये लाइन काफी थी सीरियस करने के लिए. और ध्यान कुमार की गायकी से हट के उसके कंटेंट पर चला गया. जो गाना कुछ देर पहले चेहरे पर हल्की सी मुस्कान लेकर आ रहा था, पता ही नहीं चला कि कब माथे पर सिलवटें ले आया. सिलवटें तो पड़नी जायज ही हैं, जब कोई आपको आपके पंजाब की असलियत से रू-ब-रू करवाए. वो असलियत जिसमें डूबा जा रहा है पंजाब. हां वही हंसता-खेलता, हरा-भरा पंजाब. जो थोड़ी बहुत खुशहाली पंजाब में नज़र आती भी है, वो NRI भाई या वहां के महनती लोगों की देन है. वरना सरकारों ने तो कोई कसर नहीं छोड़ी लूटने में.
क्या है गाने में?
गाने में बादल सरकार पर वार किया गया है. प्रदेश की बदहाली के लिए ज़िम्मेदार ठहराया गया है. और मेन फोकस है नशे की लत पर. होना भी चाहिए. पूरा यूथ खराब कर दिया है इस लत ने. लेकिन सरकार पिछले 10 साल में कुछ नहीं कर पाई. जब भी जवाब मांगा जाता तो कहते कि सरहद पार से आता है, केंद्र सरकार को कुछ करना चाहिए. तो आप क्या करेंगे बादल साहब? आपसे तो ये भी नहीं हुआ कि जब तस्कर जगदीश भोला ने आपके बेटे के साले बिक्रम मजीठिया का खुलेआम नाम लिया तो उसको कैबिनेट से हटा देते. गाने में कुमार विश्वास बाप-बेटे(प्रकाश और सुखबीर) का नाम लेकर उन पर आरोप भी लगा रहे हैं.
अब आगे क्या?
विरोध करेंगे अकाली. केस भी कर सकते हैं. ऐसा कह रहे हैं अकाली लीडर संता सिंह उमैदपुरी. कुछ नहीं मिला तो बोले की गाने में जट्टा शब्द कह कर कुमार ने जट्ट कौम को बेइज़्ज़त किया है. साहब बेइज़्ज़ती नहीं, वो असलियत है आज के पंजाब की और वहां के लोगों की. और आपको जट्टों की इतनी ही फिक्र होती है तो क्यों नहीं इस नशे की स्मग्लिंग को बंद करने के लिए कुछ करते. और फिर कर दो इन कुमार विश्वास जैसे कवि/गायकों के मुंह बंद. पर नहीं, आपको तो सिर्फ वोट से मतलब है. गाने में पंजाब की बेइज़्ज़ती नहीं दिखती आपको, सिर्फ जट्टों की नज़र आती है.
वैसे ही जैसे अकाली देल के नेता पिछले दिनों दिलजीत दोसांझ को कोस रहे थे. दिलजीत की फिल्म आ रही है 'उड़ता पंजाब', नशे की लत के मुद्देपर. अकाली लीडर विरसा सिंह वलटोहा का कहना था कि जो दिलजीत अपने गानों में शराब पीने की बात करते हैं वो तो नशे के खिलाफ मुहिम ना ही चलाएं.

