अजय देवगन ने जेएनयू में हुई हिंसा पर क्या बात बोली है?
उन्होंने जेएनयू मसले पर बोलकर भी कुछ नहीं बोला.
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एक इवेंट के दौरान अजय देवगन. वो जल्दी ही फिल्म 'तान्हाजी' में नज़र आने वाले हैं.
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5 जनवरी को जेएनयू में हिंसा हुई. चेहरे पर मास्क पहने कुछ लोग यूनिवर्सिटी के अंदर घुस गए. स्टूडेंट्स को पीटा. टीचर्स को पीटा. हॉस्टलों में तोड़फोड़ की. इस हमले के पीछे कौन था? ये अभी नहीं पता. ABVP और लेफ्ट वाले ये इल्जाम एक-दूसरे के मत्थे मढ़ रहे हैं. दोनों ही धड़ों के समर्थकों ने अपना-अपना पक्ष ऑलरेडी चुन रखा है. हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़े नाम जेएनयू के छात्रों के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं. सोशल मीडिया पर भी और सड़कों पर भी. तिस पर दीपिका पादुकोण ने जेएनयू पहुंचकर ही अपना पक्ष साफ कर दिया. इस मसले पर आलिया भट्ट, सोनम कपूर, वरुण धवन और सोनाक्षी सिन्हा जैसे कुछ नए ज़माने के स्टार्स ने भी बात की. वो भी जेएनयू स्टूडेंट्स के साथ ही दिखाई दिए. लेकिन सीनियर सुपरस्टार्स इस पूरी घटना को अवॉयड ही किए जा रहे हैं.
अपने एज ग्रुप के सुपरस्टार्स में अजय देवगन वो पहले शख्स हैं, जिन्होंने कम से कम जेएनयू हिंसा से जुड़े सवाल का कुछ जवाब दिया है. अजय फिलहाल अपनी अगली फिल्म 'तान्हाजी' के प्रमोशंस में व्यस्त हैं. दीपिका की 'छपाक' के साथ अजय की 'तान्हाजी' भी 10 जनवरी को ही रिलीज़ होनी है. ऐसे ही एक प्रमोशनल इवेंट में उन्होंने न्यूज़ एजेंसी पीटीआई से बात की. इस बातचीत में अजय ने बताया कि वो जेएनयू हिंसा के बारे में क्या सोचते हैं. 7 जनवरी को हुए इस इंटरैक्शन में अजय ने बताया-
'तान्हाजी' के ट्रेलर लॉन्च के मौके पर अजय देवगन और सैफ अली खान. इस फिल्म को ओम राउत ने डायरेक्ट किया है.
अजय इस लिहाज से सही है कि वो कौन लोग थे जो हिंसा कर रहे थे क्योंकि उनके नकाब थे. लेकिन जो लोग बाहर मीडिया को पीट रहे थे. योगेंद्र यादव को पीट रहे थे. उनके नारों से पता चलता है कि वो किस पक्ष के थे. उस पर अजय कुछ नहीं बोले. जामिया मामले में पुलिस लाइब्रेरी में घुसी. पीटा. उस मामले में सब स्पष्ट था, तब अजय कुछ नहीं बोले. जबकि वे तो मुंबई पुलिस के एबेंसेडर टाइप रहे हैं 'सिंघम' के बाद से. ऐसा नहीं कि अजय की राय गलत है. लेकिन उस पर बात करने से बचना. उस टॉपिक के बारे में कुछ नहीं पता कहकर आगे बढ़ जाना गलत है. अजय जैसे सुपरस्टार से ऐसी उम्मीद तो बिलकुल नहीं थी. उन्होंने जेएनयू मसले पर बोलकर भी कुछ नहीं बोला है. ऐसा लग रहा है, जैसे अजय इस इंटरैक्शन से पहले सैफ अली खान से मिलकर आए हैं. CAA विवाद पर सैफ ने भी कुछ ऐसा ही बयान दिया था
. और संयोग देखिए कि 'तान्हाजी' में सैफ अली खान और अजय देवगन दोनों ही काम कर रहे हैं.
वीडियो देखें: क्या हुआ, जब दीपिका पादुकोण जेएनयू पहुंच गईं?
अपने एज ग्रुप के सुपरस्टार्स में अजय देवगन वो पहले शख्स हैं, जिन्होंने कम से कम जेएनयू हिंसा से जुड़े सवाल का कुछ जवाब दिया है. अजय फिलहाल अपनी अगली फिल्म 'तान्हाजी' के प्रमोशंस में व्यस्त हैं. दीपिका की 'छपाक' के साथ अजय की 'तान्हाजी' भी 10 जनवरी को ही रिलीज़ होनी है. ऐसे ही एक प्रमोशनल इवेंट में उन्होंने न्यूज़ एजेंसी पीटीआई से बात की. इस बातचीत में अजय ने बताया कि वो जेएनयू हिंसा के बारे में क्या सोचते हैं. 7 जनवरी को हुए इस इंटरैक्शन में अजय ने बताया-
''मैं सुबह से ये खबरें देख रहा हूं. ये बड़ा ही कंफ्लिक्टिंग (परस्पर विरोधी) मामला है. अभी तक हमें ये नहीं पता चला कि किसने क्या किया है. जब तक सबकुछ साफ नहीं हो जाता है, उससे पहले इस मामले पर कैसे कमेंट किया जाए ये मुझे समझ नहीं आ रहा. लेकिन जो कुछ भी हो रहा है ये बड़ा दुखदाई है. जो कोई भी कर रहा है, गलत कर रहा है. हिंसा किसी चीज़ का समाधान नहीं है. इससे हमारे देश को ही नुकसान हो रहा है. इसके पीछे क्या एजेंडा है, अगर आपको पता है, तो मुझे भी बताइए. क्योंकि न्यूज़ में जो कुछ भी दिखाया जा रहा है, उससे कुछ क्लीयर नहीं हो रहा.
हम (एक्टर्स) जब भी कुछ कहते हैं, तो उसे सीरियसली लिया जाता है. कभी सही, तो कभी गलत तरीके से. मैं ये कहूंगा कि जब तक आपको किसी मामले के बारे में सबकुछ नहीं पता, तब तक आपको उस पर बोलने का कोई हक नहीं है. पहले ही कुछ साफ नहीं है और उस पर कमेंट करके हम कंफ्यूज़न नहीं बढ़ाना चाहते. हमें इस मामले को और जानने की ज़रूरत है. जब तक हम नहीं जानते, हमें चुप रहना चाहिए. अगर लोगों को लगता है कि इस मामले पर कुछ नहीं बोलने का मतलब, दोषियों के साथ खड़ा होना है, तो ये बेवकूफी है. हम आग में और घी नहीं डाल सकते.''

'तान्हाजी' के ट्रेलर लॉन्च के मौके पर अजय देवगन और सैफ अली खान. इस फिल्म को ओम राउत ने डायरेक्ट किया है.
अजय इस लिहाज से सही है कि वो कौन लोग थे जो हिंसा कर रहे थे क्योंकि उनके नकाब थे. लेकिन जो लोग बाहर मीडिया को पीट रहे थे. योगेंद्र यादव को पीट रहे थे. उनके नारों से पता चलता है कि वो किस पक्ष के थे. उस पर अजय कुछ नहीं बोले. जामिया मामले में पुलिस लाइब्रेरी में घुसी. पीटा. उस मामले में सब स्पष्ट था, तब अजय कुछ नहीं बोले. जबकि वे तो मुंबई पुलिस के एबेंसेडर टाइप रहे हैं 'सिंघम' के बाद से. ऐसा नहीं कि अजय की राय गलत है. लेकिन उस पर बात करने से बचना. उस टॉपिक के बारे में कुछ नहीं पता कहकर आगे बढ़ जाना गलत है. अजय जैसे सुपरस्टार से ऐसी उम्मीद तो बिलकुल नहीं थी. उन्होंने जेएनयू मसले पर बोलकर भी कुछ नहीं बोला है. ऐसा लग रहा है, जैसे अजय इस इंटरैक्शन से पहले सैफ अली खान से मिलकर आए हैं. CAA विवाद पर सैफ ने भी कुछ ऐसा ही बयान दिया था
. और संयोग देखिए कि 'तान्हाजी' में सैफ अली खान और अजय देवगन दोनों ही काम कर रहे हैं.
वीडियो देखें: क्या हुआ, जब दीपिका पादुकोण जेएनयू पहुंच गईं?

