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छेड़खानी के विरोध में BHU की दीवारें हिला दी हैं लड़कियों ने

पीएम मोदी को बदलना पड़ा रास्ता.

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23 सितंबर 2017 (अपडेटेड: 23 सितंबर 2017, 11:18 AM IST)
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बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के मेन गेट पर दो दिन से चल रहा है छात्राओं का प्रदर्शन.
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बहन-बेटियों के सम्मान में, बीजेपी मैदान में...

क्या ये मैदान मंगल या चांद पर है? क्योंकि बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में तो बहन-बेटियों को खुद ही अपनी सुरक्षा के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. 22 सितंबर की सुबह 6 बजे से बीएचयू के गेट पर 1000 से भी ज्यादा छात्राएं बैठी हैं. दिन भर बैठी रहीं. रात भर बैठी रहीं. मांग में कोई हीरे-जवाहरात नहीं चाहिए थे. चाहिए थी बस सुरक्षा की गारंटी. जिद थी कि वीसी गिरीश चंद्र त्रिपाठी मौके पर आकर उनकी मांगें सुनें और सख्त कदम उठाएं. मगर वीसी साहब आने को तैयार नहीं हैं. शायद पैरों में मेहंदी लगा के बैठे हैं. इधर छात्राएं भी हटने को तैयार नहीं है.
बीएचयू के मेन गेट पर डटी हुई हैं छात्राएं.
बीएचयू के मेन गेट पर डटी हुई हैं छात्राएं.

अब इसे संयोग ही मानिए कि प्रधानमंत्री और वाराणसी के सांसद मोदी भी इन दिनों शहर में ही हैं. उनको तुलसी मानस मंदिर जाने के लिए बीएचयू के इसी गेट से गुजरना था जहां प्रदर्शन चल रहा है. छात्राओं ने सोचा होगा- पीएम यहीं से गुजरेंगे और उनकी बातें सुनकर सारा मामला निपटवा देंगे पर पीएम का रूट ही बदल दिया गया. छात्राओं ने भी ठान रखा है कि इस बार वो पीछे नहीं हटेंगी. डटी हुई हैं.
शिकायत की तो कहा, 6 बजे के बाद क्यों निकलती हो
मुद्दा कैंपस में लड़कियों के साथ आए दिन होने वाली छेड़छाड़ का है. ताजा मामला 21 सितंबर की शाम का है. बैचलर ऑफ फाइन आर्ट्स की एक छात्रा के साथ बाइक सवार कुछ लड़कों ने छेड़छाड़ की. घटना बीएचयू कैंपस के अंदर ही कला भवन के पास हुई. छात्रा ने विरोध किया और मदद के लिए चिल्लाई. बताया जा रहा है कि पास में ही कॉलेज के गार्ड थे पर उन्होंने कोई मदद नहीं की. लड़की की ही हिम्मत और विरोध का नतीजा था कि बदमाश लड़के वहां से भाग गए.
रात भर प्रदर्शन करती रहीं छात्राएं.
रात भर प्रदर्शन करती रहीं छात्राएं.

इसके बाद मामला प्रॉक्टर के पास पहुंचा पर उन्होंने इसे टाल दिया. उलटा छात्रा को ही नसीहत दे डाली, कहा- 6 बजे के बाद बाहर न निकला करो. हॉस्टल आकर छात्रा ने और लड़कियों को ये बात बताई. लड़कियों का गुस्सा फट पड़ा. लड़कियों ने रात में ही बीएचयू के संकुल गेट पर प्रदर्शन किया. कोई नहीं सुनने आया. सो 22 सितंबर को सुबह 6 बजे छात्राएं विश्वविद्यालय के मेन गेट पर पहुंच गईं. प्रदर्शन जारी है.

प्रॉक्टर को लेटर लिख जो बताया, वो हिला देने वाला है
वाकई शर्मनाक है ये. चीफ प्रॉक्टर को लिखे पत्र में छात्राओं ने बताया कि लड़के हॉस्टल के बाहर मास्टरबेशन करते हैं. पत्थर फेंकते हैं. आपत्तिजनक कमेंट्स करते हैं. और क्या कहा है, इस लेटर में पढ़ें-
मांगों को लेकर लड़कियों द्वारा प्रॉक्टर को भेजी गई चिट्ठी.
मांगों को लेकर लड़कियों द्वारा प्रॉक्टर को भेजी गई चिट्ठी.

छात्रा ने मुंडवाया सिर- बोली अब शायद न हो छेड़छाड़
छात्राओं की मांगें भी ऐसी हैं, जिन्हें कॉलेज प्रशासन को बिना कहे पूरी कर देनी चाहिए थी. पर अपने यहां बिना मांगे कहां कुछ मिलता है. कॉलेज प्रशासन तो ऐसे मामला टाल रहा है जैसे उनकी जान मांग ली गई हो.
छेड़खानी के विरोध में एक छात्रा ने सिर मुंडवा लिया है.
छेड़खानी के विरोध में एक छात्रा ने सिर मुंडवा लिया है.

अब सिक्योरिटी गार्ड की रात भर तैनाती, अच्छी लाइटिंग व्यवस्था और सीसीटीवी ही तो मांगा है. कॉलेज प्रशासन न जाने किस टशन में है. न जाने काहे अड़ा हुआ है. छात्राओं का गुस्सा बढ़ता जा रहा है. छात्राएं अब चीफ प्रॉक्टर ओमकारनाथ सिंह के इस्तीफ़े की भी मांग कर रही हैं. प्रदर्शन कर रही छात्राओं में से एक छात्रा ने विरोध में अपना सिर भी मुंडा लिया है. छात्रा का कहना था कि इस तरह गेटअप बदल लेने से शायद उनके साथ छेड़छाड़ नहीं होगी.
छेड़खानी रोकने की बजाय लड़कियों पर ही लगाम
अपने यहां बहन-बेटियों से कहा जाता है, बाहर जाना तो मुंह में कपड़ा बांध के जाना. रात को जल्दी घर लौट आना. नाक की सिधाई में देखते हुए जाना और वैसे ही लौट आना. इसी संस्कृति को आगे बढ़ाने का काम बीएचयू प्रशासन कर रहा है. हमें पता चला है कि पहले गर्ल्स हॉस्टल में शाम को लौटने का समय 9 बजे था. अब इसे घटाकर 7 बजे कर दिया है. कार्रवाई करनी थी शोहदों पर, लगाम लगा दी लड़कियों पर. कमाल ही है ये तो.
छात्राओं ने मेन गेट ब्लॉक कर रखा है.
छात्राओं ने मेन गेट ब्लॉक कर रखा है.

एबीवीपी पर आंदोलन को भटकाने का आरोप
छात्राएं बीएचयू के गेट पर बैठी हैं. नारेबाजी कर रही हैं मगर हंगामे जैसी स्थिति नहीं है. यही कारण है कि पुलिस-प्रशासन भी उन्हें हटा नहीं पा रहा है. कुछ हंगामा-बवाल हो तो पुलिस लाठी-डंडा चलाए. आरोप है कि एबीवीपी ने इस बवाल की जमीन तैयार करने की कोशिश की. छात्राओं ने बीएचयू के गेट पर एक बैनर टांगा है. उस पर लिखा है- बचेगी बेटी, तभी तो पढ़ेगी बेटी. बस इसी को एबीवीपी ने महामना के सम्मान से जोड़ दिया. कहा जा रहा है कि कुछ लड़के इसके विरोध में नारेबाजी करने लगे. कुछ लड़के आंदोलन कर रहीं लड़कियों की तरफ बढ़े. बहसबाजी भी शुरू हो गई. मगर शिकायत पर पुलिस ने लड़कों को हटा दिया. फिर भी तनाव बना हुआ है.
सोशल मीडिया पर चल रहा है जोरदार कैंपेन-








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