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आखिर ये अगस्टा वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर भसड़ है क्या?

इसी डील की वजह से बोले सोनिया, मनमोहन- हमें डरने की जरूरत नहीं है. जानिए पूरा मामला...

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ये डील हुई थी यूपीए के टाइम में. लेकिन बातचीत शुरू हो गई थी अटल सरकार के दौर में. अब दोनों पार्टियां एक-दूसरे पर कीचड़ उछाल रही हैं.
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विकास टिनटिन
27 अप्रैल 2016 (अपडेटेड: 27 अप्रैल 2016, 11:36 AM IST)
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ये नाम फिर चर्चा में हैं. संसद में बवाल मचा हुआ है. टीवी चैनलों, अखबारों में इसकी खबरें हैं. सरकार और विपक्ष वाले लोग एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं. पर क्या आप जानते हैं कि आखिर ये पूरा मामला है क्या? इसकी शुरुआत कब और क्यों हुई? और क्यों आज इसकी फिर से बात हो रही है. जानिए पूरा अगस्टा वेस्टलैंड मामला...
  1. अगस्त 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी. वीवीआईपी लोगों के आवन-जावन के लिए  तब तक इंडियन एयरफोर्स MI-8 हेलिकॉप्टर्स का इस्तेमाल करती थी. लेकिन ये हेलिकॉप्टर पुराने हो गए थे. अटल सरकार ने कहा, इन हेलिकॉप्टर्स को बदला जाए. नए हेलिकॉप्टर्स को खरीदने का प्रपोजल रखा जाता है. 2. मार्च 2002 में हेलिकॉप्टर्स को खरीदने के लिए ग्लोबल टेंडर डाला जाता है. पूरी दुनिया से प्रपोजल मांगे जाते हैं. ताकि नए वीवीआईपी हेलिकॉप्टर्स खरीदे जा सकें. इन हेलिकॉप्टर्स का इस्तेमाल इंडिया के वीवीआईपी लोगों के लिए होना था. वीवीआईपी यानी प्रेसिडेंट या स्टेट लेवल के बड़े मंत्री लोग. लेकिन ये प्रपोजल कुछ सालों के लिए ठंडे बस्ते में चला जाता है. 3. 2004 में अटल सरकार चली जाती है. मनमोहन सिंह की सरकार आती है. VVIP हेलिकॉप्टर्स को खरीद फरोख्त की प्रोसेस 2005 में शुरू होती है. इसी साल यूपीए सरकार इंटीग्रेटी क्लॉज लागू करती है. इसके मुताबिक, हर रक्षा सौदे से पहले क्लॉज पर साइन किया जाना जरूरी किया गया कि अगर डील के दौरान अगर किसी मिडिलमैन का इस्तेमाल हुआ तो डील रद्द कर दी जाएगी. आगे जाकर यही क्लॉज यूपीए के फंसने की बड़ी वजह बनी. 4.  2005 में शुरू हुई प्रोसेस धीरे-धीरे आगे बढ़ती है. लेकिन हरी झंडी मिल पाती है जनवरी 2010 में. यूपीए कैबिनेट कमेटी 12 हेलिकॉप्टर्स लेने के लिए प्रपोजल को पास करती है. करीब 3600 करोड़ रुपये का ये पूरा सौदा होना था. 5 प्रपोजल पास होने के बाद डिफेंस मिनिस्ट्री इटली की हेलिकॉप्टर कंपनी अगस्टा वेस्टलैंड से सौदा फिक्स करती है. अगस्टा वेस्टलैंड ने ये कॉन्ट्रेक्ट अमेरिकी कंपनी  सिकोर्सिकी एयरक्राफ्ट (Sikorsky Aircraft) समेत कई कंपनियों को पछाड़ कर हासिल किया. 5. फरवरी 2012 में इटली की जांच एजेंसियों ने कहा, 'अगस्टा वेस्टलैंड की पैरेंट कंपनी फिनमैकेनिका ने डील हासिल करने के लिए इंडिया के कुछ लीडर्स और अधिकारियों को रिश्वत दी. इटली के जांच अधिकारियों ने डील को गलत बताया गया.  डील कराने में तीन दलालों के शामिल होने का पता चला. क्रिस्टियन मिशेल, गाइडो हास्चके (Guido Haschke) और पीटर हुलैट (Peter Hulett). यानी मनमोहन सिंह सरकार ने 2005 में जो क्लॉज पास किया था, उसके हिसाब से और इटली सरकार ने भी इस डील को गलत माना गया. 6.  इटली की कोर्ट में 2012 में केस हुआ. इंडिया तक खबर पहुंची. केंद्र में बैठी यूपीए-2 सरकार घिर गई. इंडिया की डिफेंस मिनिस्ट्री ने रोम की इंडियन एंबेसी से रिपोर्ट मांगी. 7. फरवरी 2013 में अगस्टा वेस्टलैंड की पैरेंट कंपनी फिनमकेनिका के सीईओ ब्रूनो स्पैगनोलिनी (Bruno Spagnolini) को इटली की पुलिस अरेस्ट कर लेती है. कंपनी का इंडिया के साथ हुए सौदे को होल्ड पर डाल दिया जाता है. कंपनी पर आरोप लगता है कि कॉन्ट्रेक्ट हासिल करने के लिए करीब 375 करोड़ रुपये रिश्वत में दिए गए. यानी इसे समझें तो ये माना जा सकता है कि 12 हेलिकॉप्टर्स में से एक हेलिकॉप्टर रिश्वत में दे दिया गया. 8. आगे की जांच में पता चला कि कंपनी और इंडियन गवर्मेंट के बीच सौदा कराने के लिए  दलालों ने कुछ कोड-वर्ड इस्तेमाल करता है, जैसे POL, AF, FAM, BUR. बताते हैं कि रिश्वत की रकम इन्ही कोडवर्ड्स के जरिए लोगों में बांटी गई. एक अंदाजा ये भी है कि POL से पॉलिटिक्ल, AF से एयरफोर्स, FAM से फैनमैकेनिका और BUR से ब्यूरोक्रेट्स. यानी रिश्वत इन कोडवर्ड्स के जरिए डील में शामिल लोगों को बांटी गई. 9.  2013 में मामले की जांच इंडिया में सीबीआई को सौंप दी जाती है. सीबीआई 11 लोगों के खिलाफ जांच शुरू करती है. पूर्व इंडियन एयरफोर्स चीफ एसपी त्यागी भी जांच के दायरे में आते हैं. त्यागी समेत 12 के खिलाफ एफआईआर दर्ज होती है. 10.  जनवरी 2014 में जब बीजेपी नरेंद्र मोदी को अपना बीजेपी पद का उम्मीदवार घोषित कर चुकी थी और कांग्रेस लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटी हुई थी, तब मनमोहन सिंह-सोनिया गांधी की यूपीए-2 सरकार अगस्टा वेस्टलैंड के साथ सौदा रद्द कर देती है. 11. अक्टूबर 2014 में इटली में जेल में कैद  फिनमैकेनिका के सीईओ ब्रूनो स्पैगनोलोनी (Bruno Spagnolini) को बरी किया जाता है. कहा जाता है कि डील के लिए हुई रिश्वतबाजी के लिए ब्रूनो निर्दोष बालक हैं. 12. अप्रैल 2016 में इटली की मिलान कोर्ट लोअर कोर्ट के फैसले को ओवररूल करती है. ठीक वैसे ही जैसे हमारे यहां हाईकोर्ट के फैसले को गलत पाने पर सुप्रीम कोर्ट रद्द कर देती है. मिलान कोर्ट फिनमैकेनिका के चीफ एक्जीक्यूटिव को दोषी मानती है. अगस्टा वेस्टलैंड के पूर्व हेड को भी दोषी माना जाता है. 13. इटली की मिलान कोर्ट में फिलहाल इस डील को लेकर केस चल रहा है. कोर्ट में दस्तावेज पेश किए गए. इन दस्तावेजों में उन लोगों के नाम हैं, जो डील के लिए हुई रिश्वतबाजी में शामिल थे. इन्ही शामिल लोगों में से एक नाम 'सिग्नोरा गांधी' भी है. राजनीतिक अटकलें ये हैं कि 'सिग्नोरा गांधी' नाम सोनिया गांधी के लिए इस्तेमाल किया गया. और रिश्वत लेने वालों में सोनिया गांधी भी शामिल थीं.  इटली की कोर्ट में अक्टूबर 2008 का एक दस्तावेज पेश किया गया, जिसमें सोनिया गांधी हेलिकॉप्टर डील में शामिल रही थीं. बताते हैं कि दस्तावेजों में चार बार सिग्नोरा गांधी का नाम है. 14. सोनिया गांधी के अलावा जिन नेताओं पर इस डील में रिश्वत लेने का आरोप लगाया जा रहा है, उनमें पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, अहमद पटेल, प्रणब मुखर्जी, एम वीरप्पा मोईली, ऑस्कर फर्नाडीज, एमके नारायण का नाम शामिल है. इस वक्त विपक्ष में बैठी कांग्रेस और सत्ता में काबिज बीजेपी इसी को लेकर अब फिर से बवाल मचाए पड़ी है. कांग्रेस कह रही है, हमें डरने की जरूरत नहीं है. केंद्र सरकार मन ही मन बोल रही है, 'चिड़िया जाल में फंस गई...'
 

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