अग्निपथ प्रदर्शन: बिहार, यूपी, तेलंगाना में 9 ट्रेनें जलाई, बसों में की तोड़फोड़
बिहार में विरोध प्रदर्शन काफी हिंसक हो गया है.

सशस्त्र बलों में भर्ती के लिए केंद्र सरकार द्वारा लाई गई 'अग्निपथ योजना' के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन चल रहा है. बहुत सी जगहों पर ये प्रदर्शन हिंसक हो गया है. प्रदर्शनकारियों ने कहीं पर ट्रेन जलाईंं, तो कहीं पर बसों में तोड़-फोड़ की है.
ताजा जानकारी के मुताबिक बिहार के सुपौल, लखीसराय, समस्तीपुर, दानापुर और आरा में सात ट्रेनों को आग लगा दी गई. इसके अलावा उत्तर प्रदेश के बलिया में एक और तेलंगाना के सिकंदराबाद में एक ट्रेन में आग लगाई गई है. इस तरह प्रदर्शनकारियों ने अग्निपथ योजना के विरोध में कम से कम नौ ट्रेनों में आग लगाई है.
इसके साथ ही पूर्वी मध्य रेलवे की आठ ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुई हैं. मालदा टाउन-लोकमान्य टिलक एक्सप्रेस और हावड़ा-नई दिल्ली दुरंतो एक्सप्रेस को रद्द कर दिया गया है.
प्रदर्शनकारियों ने बिहार की उपमुख्यमंत्री रेणु देवी और बिहार बीजेपी अध्यक्ष तथा पश्चिम चंपारण के सांसद संजय जायसवाल के घर पर हमला किया है. न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक बेतिया स्थित जायसवाल के घर पर हमला हुआ, जिसमें कम से कम एक पुलिसकर्मी को चोटें आई हैं.
जायसवाल ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा, 'ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है.'
इस बीच हिंसा की आशंका होने पर हरियाणा सरकार ने फरीदाबाद के बल्लभगढ़ में इंटरनेट सेवाओं को प्रतिबंधित कर दिया है. प्रदर्शन के दौरान तेलंगाना में कई लोग घायल भी हुए. आरोप है कि पुलिस ने सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन पर जमा हुई भीड़ पर गोली चलाई, जिसके बाद हिंसा और बढ़ गई.
इससे पहले 15 और 16 जून को भी बिहार में अग्निपथ योजना के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन हुआ. युवाओं ने अलग-अलग जगहों पर रोड जाम कर दी थी, जिसे लेकर पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी छोड़े.
बुधवार, 15 जून को मुजफ्फरपुर, बेगुसराय और बक्सर जिले में प्रदर्शन हुआ था और रेल तथा रोड को जाम किया गया था. अगले दिन यानी 16 जून को ये प्रदर्शन और तेज हो गया.
क्यों है अग्निपथ का विरोध?अग्निपथ योजना को लेकर प्रदर्शनकारी युवाओं की मुख्य रूप से दो चिंताएं हैं. पहली ये कि इसमें स्थाई नौकरी नहीं है. चार साल बाद ही 75 फीसदी लोगों की सर्विस खत्म हो जाएगी. दूसरी ये कि पुरानी भर्ती योजना के तहत सैनिकों को जो जीवन पर्यंत पेंशन और स्वास्थ्य बीमा की सुविधा मिलती थी, वो अब इन 75 फीसदी लोगों पर लागू नहीं होगी.
अग्निपथ योजना के तहत हर साल 45 हजार से 50 हजार सैनिकों की नियुक्ति की जाएगी. लेकिन इसमें से 75 फीसदी लोगों को चार साल बाद ही नौकरी छोड़नी पड़ेगी. बाकी के 25 फीसदी लोगों को अगले 15 सालों तक के लिए स्थाई जॉब मिलेगी. पहले सशस्त्र बलों में चयन होने पर करीब 17 साल की स्थाई नौकरी होती थी.
इस योजना के तहत जिन कैंडिडेट्स का चयन होगा, उन्हें पहले साल में हर महीने 30 हजार रुपये, दूसरे साल 33 हजार रुपये, तीसरे साल 36 हजार 530 रुपये और चौथे साल 40 हजार रुपये सैलरी मिलेगी.
खास बात ये है कि इस सैलरी का 30 फीसदी हिस्सा सेवा निधि प्रोग्राम के तहत काट लिया जाएगा और सरकार भी इतनी ही राशि इसमें जमा करेगी. इसी राशि पर ब्याज जोड़कर चार साल की नौकरी खत्म होने पर हर एक सैनिक को करीब 11.71 लाख रुपये मिलेंगे और ये रकम टैक्स फ्री होगी.
इसके अलावा इन सैनिकों को चार साल के लिए 48 लाख रुपये का जीवन बीमा मिलेगा. यदि मृत्यु हो जाती है, तो परिवार को बची हुई सैलरी के साथ एक करोड़ रुपये दिए जाएंगे.
इस योजना के तहत 17.5 साल से 21 साल की उम्र वाले युवा अप्लाई कर सकते हैं. हालांकि युवाओं के विरोध प्रदर्शन और इस बात को ध्यान में रखते हुए कि साल 2020 से कोई नियुक्ति नहीं हुई है, सरकार ने साल 2022 के लिए अधिकतम उम्र बढ़ाकर 23 वर्ष कर दी है.

